



बाबा न्यूज
आगरा । महिला दिवस पर शिक्षिका सीमा रहस्यमयी ने कविता के माध्यम से समाज को एक संदेश दिया है ।
नर की शोभा है नारी,
नारी से है दुनियाँ सारी।
हर क्षेत्र में आगे नारी,क्यों कहते सब अबला नारी।
फूट कर फिर से खुश,
ठीक हूँ ये फिर कहती है।
गम जाने कितने सहती है,
तन्हा कोने में जा रोती है।
दर्द भुलाती फिर मुस्काती है, रिवायतें ये कितनी निभाती है।
सलाम हर उस नारी को। जो घर को स्वर्ग बनाती है।
फिर क्यूँ इसे दुत्कारा जाता,कोख में ही मरवाया जाता।
उफ्फ,देखो लड़की हुई है क्यूँ कह गाल फुलाया जाता।
अब अबला नहीं,नादान नहीं : सीमा हस्यमयी कोई ये पहंचान नहीं। ये नारी है,ये शक्ति है।हौसलों से उड़ान भरती है।
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नारी की महिला अपरंपार
युगो-युगो से नारी की महिमा अपरंपार है,वेद पुराणों और देवों में नारी ही सृष्टि का आधार है।
घर संभाले और देश संभाले नारी से ही जीवन सकार है।
मां बनकर जब आती हो, तुम सारी दुविधाओं को हर जाती हो।
पत्नी बन कर जब आती हो,साजन का घर महकाती हो।
और जब बहना बन कर आओ तो, भाई की कलाई सजाती हो।
बेटी जब बनती हो तुम मां बाबुल की,आन बान और शान बन जाती हो। मित्र बनो तो मानो जैसे,राधा कृष्ण सी मुस्काती हो।
मां बहन पत्नी बहू और मित्र सब रूपों में नारी हो।
मां जगदंबे, मां शेरावाली, मां काली जो दुष्टों पर भी भारी हो,मां यशोदा,मां शारदे एवं मां भारती सबकी अति प्यारी हो।
तु सृष्टि की अद्भुत रचना जो सौ पर एक ही भारी हो।
प्रस्तुति: अनीता गौतम