



व्यासपीठ से महामंडलेश्वर नर्वदा शंकरपुरी महाराज करा रहे श्रवण
सुबह कथा स्थल पर श्री विष्णु सहस्त्रनाम महायज्ञ में दी आहुति
दूसरे दिन भीम विवाह, घटोत्कच्छ और मोरवी प्रसंग का हुआ वर्णन
बाबा न्यूज
आगरा। कोठी मीना बाजार स्थित खाटूश्याम धाम पर श्री मोरवीनंदन सेवा मंडल की ओर से चल रही खाटूश्याम कथा का श्रीगणेश सर्वप्रथम खाटू नरेश की आराधना कर हुआ। खचाखच भरे समूचे पंडाल में उज्जैन के निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर नर्वदा शंकरपुरी जी महाराज आते ही जय श्रीश्याम के जयघोष के साथ गूंज उठा। दूसरे दिन कथा में भीम विवाह, घटोत्कच्छ और माता मोरवी प्रसंग का वर्णन किया। इससे पहले सुबह आठ बजे कथा स्थल पर दैनिक यजमानो ने श्री विष्णु सहस्त्रनाम महायज्ञ में आहुति दी।
भीम और हिडिंबा का हुआ गंधर्व विवाह
व्यासपीठ से महामंडलेश्वर नर्वदा शंकरपुरी महाराज ने कहा कि एक जंगल में एक हिडिंब नाम का राक्षस अपनी बहन हिडिंबा के साथ रहता था। वह इंसानों को खाकर अपनी भूख मिटाता था। उस रात राक्षस ने अपनी बहन हिडिंबा को कहा कि उसे भूख लग रही है। वह किसी इंसान को पकड़ कर लेकर आए। भाई की बात सुनकर हिडिंबा जंगल में यहां-वहां घूमकर किसी मनुष्य को ढूंढने लगी। तभी उसकी नजर भीम पर पड़ी और वह भीम पर मोहित हो गई और अपने विवाह का प्रस्ताव रखा। जब इस बात का पता उसके राक्षस भाई को चला, तो वह अपनी बहन को मारने के लिए दौड़ा। यह देखकर भीम ने राक्षस को रोका और दोनों में जोरदार लड़ाई हुई, जिसमें हिडिंब राक्षस मारा गया। माता कुंती के समझाने पर भीम ने विवाह के लिये हां कर दी। भीम और हिडिंबा का गंधर्व विवाह जंगल में संपन्न हुआ और कुछ समय बाद उनके घर एक पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम घटोत्कच रखा गया।
मोरवी ने रखी घटोत्कच्छ से विवाह के लिए शर्त
महामण्डलेश्वर नर्वदा शंकरपुरी जी महाराज ने कहा कि भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच शूरवीर योद्धा थे। पांडवों ने श्रीकृष्ण से अनुरोध किया कि वह घटोत्कच के विवाह के लिए योग्य वधू सुझाएं। कृष्ण ने असुरों के शिल्पी मूर दैत्य की बुद्धिमान एवं वीर कन्या मोरवी ही इसके लिए सबसे योग्य है। मूरपुत्री मोरवी ने शर्त रखी है कि वह उस वीर से ही विवाह करेगी जो उसे शास्त्र और शस्त्र दोनों विद्याओं में परास्त कर दे। देवी कामाख्या की अनन्य भक्त और शस्त्र विद्या में पारंगत मोरवी को कामाख्या देवी ने उसे कई दिव्य शक्तियां दी थीं। घटोत्कच मोरवी के समक्ष उपस्थित हुए। मोरवी घटोत्कच के रूप एवं सौंदर्य पर मुग्ध हो गईं। मोरवी को आभास हुआ कि यह कोई साधारण पुरुष नहीं है, फिर भी उसने परीक्षा लेने की ठानी। घटोत्कच ने अपने विवेक और बल से मोरवी को परास्त किया। अपनी पराजय स्वीकार करते हुए घटोत्कच से विवाह की हामी भर दी। श्री कृष्ण एवं पांडवो की उपस्थिति में घटोत्कच का विवाह मोरवी के साथ विधि-विधान से हुआ।
मानव का जीवन पुष्प की तरह महकना चाहिए
मानव का जीवन पुष्प की माला की तरह महकता हुआ होना चाहिए। हमे अपनी जड़ो से उखाड़ना नहीं चाहिए, जड़ो से जुड़े रहने पर सफलता शीश चूमती है। अपने धन और रूप का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए होना चाहिए। कथा स्थल में श्याम तेरी बंसी की दुनिया दीवानी हैङ्घ, तेरी बीती रे उम्ररिया मनवा श्याम श्याम बोल रहे हमेशा हम भक्तों के सिर पर हाथ हमेशा श्याम घणीङ्घ आदि भजनों से पर महिलायें अपने को नृत्य करने से रोक ना सकी।
सर्वप्रथम शक्ति स्वरूपा के हो रहे दर्शन
भक्तो के आराध्य श्याम बाबा के साथ सर्वप्रथम दरबार में राजस्थान की शक्ति स्वरूपा राणी सती दादी, राधा-कृष्ण, गणेश जी, महादेव, वीर हनुमान और अंत में सालासर बालाजी के दर्शन कर भक्त निहाल हो रहे है। व्यासपीठ से नर्वदा शंकरपुरी जी महाराज ने भक्तों से पाँच प्रश्नों के माध्यम से कथा में आ रही रुचि और ध्यान को भी परखा ।
कथा में आज
मीडिया प्रभारी विमल कुमार ने बताया कि सोमवार को कथा में बर्बरीक जन्म, बाल क्रीड़ाये और असुर संहार की कथा का वर्णन होगा। इस अवसर पर अध्यक्ष राम अग्रवाल, महामंत्री अमित अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मुरारीलाल गोयल, अभिषेक बरसाना, शिव सिंह बघेल, जीतू चौधरी, अजित संत, लब्बी भगत, ब्रजेश भारद्वाज, अतुल अग्रवाल, अमित सिंघल, अशोक शर्मा, किशोर गुरु, अरुण मित्तल, न्याय दत्त शर्मा, गोविन्द अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, रवि प्रधान, सौरभ अछनेरा आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।