



आयोग की ओर से भेजे गए दल ने प्रत्याशियों के सामने उठाए सवाल
बहुत से प्रत्याशियों ने अपने खर्चे में चाय पानी को भी नहीं दिखाया है
मनीष मिश्रा (बाबा न्यूज)
आगरा। विधानसभा चुनाव में इस बार बहुत कुछ बदलाव नजर आ रहा है इससे चुनाव में उतरे पहलवान भी परेशान हो उठे है। आयोग की टीम के सवालोंं का हिसाब किताब देनेे वाले कोई जवाब नहीं देेे पा रहे हैं । प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की लिस्ट में पहली बार रोटी, दाल, चावल, सब्जी से सजे भोजन थाली को भी शामिल किया गया है। अभी तक पूड़ी-सब्जी एक मिठाई व चाय-समोसा ही चुनावी खाना माना जाता था। यही चुनावी खर्च में भी जुड़ता था।
कोरोना महामारी के साये में हो रहे लोकतंत्र के महापर्व में नेता जी के साथ दिन-रात जुटने वाले कार्यकतार्ओं के खान-पान में परिवर्तन आया है। अब केवल पूड़ी- सब्जी खाकर प्रचार नहीं हो रहा है। चुनावी दफ्तरों में कार्यकतार्ओं के लिए दाल, रोटी, सब्जी,चावल का इंतजाम भी किया जाता है। भोजन थाल के आर्डर दिए जाते हैं। इसे देखते चुनावी खर्च का हिसाब- किताब रखने वाली टीम ने पहली बार ताज नगरी की सीटों पर भोजन थाल को भी चुनावी खर्च में जोड़ा है।
अभी तक चुनावी खर्च की लिस्ट में खाने के नाम पर केवल पूड़ी-सब्जी व चाय- समोसा ही शामिल किया गया था। एक मिठाई के साथ चार पूड़ी-सब्जी की दर 37 रुपए तय की गई है। जोकि 2017 चुनाव से पांच रुपए अधिक है। जबकि चाय व समोसा की दरें छह-छह रुपए प्रति पीस रखी गई हैं।
चुनावी खर्च का रेट चार्ट जारी होने के बाद राजनैतिक दलों की ओर से खाने में रोटी, दाल , चावल के भोजन थाल का अनुरोध किया गया। इसके बाद विधानसभा चुनाव के लिए भोजन थाल की दर व वस्तुओं का निर्धारण किया गया। सहायक नोडल व्यय अनुरीक्षण बताते हैं कि भोजन थाल में चार तवा रोटी, एक दाल, एक सूखी सब्जी, पनीर सब्जी, रायता, चावल, सलाद व एक मिठाई को रखा गया है। पिछले दिनों चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक ने प्रत्याशियों की ओर से दिए गए खर्चे के ब्योरे पर भी सवाल उठाए थे। परयवेक्षको का कहना था आपके कार्यालय में कोई व्यक्ति आता है तो क्या वह बिना चाय पानी पिए ही चला जाता है । बहुत से प्रत्याशियों ने तो खाने का कोई चर्चा ही नहीं दिख रहा है। खानेेे के खर्चे का बहुत सेे प्रत्याशी जवाब नहीं दे सके थे।