प्रयागराज में रेलवे ने सैकड़ों आशियाने गिराए:बस्ती उजड़ी नहीं जले चूल्हे, सड़कों पर रहने को मजबूर, सैकड़ो लोग हुए बेघर
सैकड़ों साल से यहां पर रह रहे थे। बचपन से लेकर आज तक बच्चे बड़े हुआ। यही शादी ब्याह किया। आधे से ज्यादा जीवन यहीं बिताया है। अब हम लोगों को यहां से हटा दिया गया। कच्चे मकान गिरा दिए गए। अब कहां जाएं। की रहने की जगह नहीं है। सड़क और नदी के किनारे किसी तरह से रात गुजारने को मजबूर है। बस्ती उजड़ जाने के बाद से चूल्हा नहीं जला। यह बातें बस्ती के लोगों ने कही। दरअसल, प्रयागराज के गऊघाट मे पुराने यमुना पुल के समीप बसी मलिन बस्ती पर शनिवार को रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर चलवा दिया। उस दौरान लोगों ने विरोध भी किया। आरपीएफ और पुलिस ने लोगों को खदेड़ कर भगाया भी। पूरी बस्ती खाली कराने के बाद सारे मकानों और झोपड़पट्टी को गिरा दिया गया। इसके बाद बस्ती में रहने वाले लोग सड़क और नदी के किनारे अपना बसेरा बना लिए है। बस्ती उजड़ने के बाद से लोग अपने समानों को समेटने में लगे हुए है। रेल प्रशासन से लोगों ने अपने रहने की व्यवस्था के लिए गुहार लगाई है। बस्ती उजड़ने के पेड़ की छांव का सहारा बस्ती उजड़ने के बाद लोगों का मोह इस बस्ती से नहीं छूट पा रहा है। रहने के लिए घर नहीं बचा तो पेड़ की छांव को सहारा बना लिया। पेड़ के नीचे खुद लेटी महिला ने अपने बच्चे को भी लिटा दिया। घर। जेल उजड़ गया है लेकिन बस्ती में लोग अभी भी अपना डेरा बनाने की कोशिश में लगे हुए है। बस्ती में रहने वाले मुन्ना ने बताया कि 40 से 50 साल हो गए इस बस्ती में रहते हुए। कोई हटाने नहीं आया। मुन्ना ने बताया कि यहां पर एक हजार से अधिक झोपड़ी और कच्चे मकान बने थे।जिन्हें गिरा दिया गया। अब सब बेसहारा हो गए है। सड़क के किनारे और नदी के किनारे रहने के लिए व्यवस्था कर रहे है। बस्ती में रहने वाली 80 साल की किनकी देवी ने बताया कि इसी बस्ती में बच्चे छोटे छोटे थे, बड़े हुए। मकान गिराने के पहले कोई बताया भी नहीं। अचानक से गिरा दिया गया। अब गिरा दिया तो क्या करे।

