लखनऊ के केजीएमयू में ब्रोंकोस्कोपी वर्कशॉप:बोले डॉक्टर खांसी में खून आना सिर्फ टीबी नहीं, कैंसर भी हो सकता है कारण

स्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओर से रविवार को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में बेसिक ब्रोंकोस्कोपी सर्टिफिकेशन कोर्स और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित की गई। इसमें देशभर से आए करीब 250 डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और मेडिकल छात्रों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों को ब्रोंकोस्कोपी की नई तकनीकों की जानकारी देना और उसका व्यावहारिक प्रशिक्षण कराना था। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को ब्रोंकोस्कोपी की प्रक्रिया का लाइव और हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया। डॉक्टरों ने बताया कि सांस की नली को ब्रोंकस कहा जाता है और दूरबीन जैसी मशीन से उसकी जांच करने की प्रक्रिया को ब्रोंकोस्कोपी कहते हैं। यह जांच फेफड़ों और सांस की नली की बीमारियों का पता लगाने में काफी मददगार होती है। कार्यशाला के निदेशक मुंबई से आईएबी की सचिव डॉ. अमिता नेने और केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त रहे। वहीं कार्यक्रम का समन्वय डॉ. ज्योति बाजपेयी और मेदांता अस्पताल के डॉ. अभिषेक टंडन ने किया। कार्यशाला का सबसे अहम सत्र ब्रोंकोस्कोपिक मैनेजमेंट ऑफ हेमोप्टाइसिस यानी खांसी में खून आने की समस्या पर रहा। इस विषय पर डॉ सूर्यकान्त ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग और कई बार डॉक्टर भी खांसी में खून आने का कारण सिर्फ टीबी मान लेते हैं, जबकि फेफड़ों का कैंसर, ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकिइक्टेसिस, निमोनिया और पोस्ट-टीबी जैसी बीमारियां भी इसकी वजह हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मरीज सही समय पर जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में ब्रोंकोस्कोपी जांच बीमारी की सही वजह पता करने में बेहद उपयोगी साबित होती है। यह जांच गंभीर और जानलेवा स्थिति में मरीज की जान बचाने में भी मदद करती है। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट भी मौजूद रहे। इनमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. के. बी. गुप्ता, डॉ. एस. एन. गुप्ता, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. हूडा शमीम और डॉ. रचित शर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।

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