झांसी में बैक पेपर छूटा तो रो दीं छात्राएं:बोलीं-यूनिवर्सिटी ने बिना बताए बदला समय, कॉलेज में प्रदर्शन कर कहा-“अब घरवालों को क्या जवाब देंगे”
झांसी की बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में स्पेशल बैक पेपर देने पहुंचे करीब 50 छात्र-छात्राओं की परीक्षा छूट गई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने पहले जारी टाइम टेबल में बदलाव कर दिया, लेकिन इसकी सूचना उन्हें नहीं दी गई। तय समय के अनुसार जब छात्र परीक्षा देने पहुंचे तो पता चला कि उनका पेपर पहले ही हो चुका है। इसके बाद नाराज छात्र-छात्राओं ने बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जानकारी के मुताबिक बीकेडी कॉलेज से एमए समेत अन्य कोर्स कर रहे कई छात्र-छात्राओं की फाइनल ईयर समेत दूसरे सेमेस्टर में बैक आ गई थी। सेशन पूरा होने के बाद छात्र अपने-अपने घर चले गए थे। बाद में यूनिवर्सिटी ने स्पेशल बैक परीक्षा के लिए आवेदन मांगे, जिस पर विद्यार्थियों ने फॉर्म भर दिए और परीक्षा का इंतजार करने लगे। स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी की ओर से जारी पहले टाइम टेबल में उनका पेपर सोमवार 11 मई को तीसरी पाली में दोपहर 3 बजे से निर्धारित था। लेकिन बाद में परीक्षा का समय बदलकर दूसरी पाली में सुबह 11 बजे से कर दिया गया। आरोप है कि इस बदलाव की जानकारी अधिकतर विद्यार्थियों तक पहुंची ही नहीं। ऐसे में स्टूडेंट्स पुराने टाइम टेबल के अनुसार दोपहर में परीक्षा देने यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि परीक्षा पहले ही समाप्त हो चुकी है। यह सुनते ही कई छात्र-छात्राएं भावुक हो गए। विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की, लेकिन उन्हें जवाब मिला कि परीक्षा दोबारा आयोजित नहीं की जा सकती। कॉलेज पहुंचकर धरने पर बैठे स्टूडेंट
यूनिवर्सिटी से निराश होकर छात्र-छात्राएं बीकेडी कॉलेज पहुंचे और शिक्षकों से मदद की गुहार लगाई। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने साफ कहा कि परीक्षा कराने का फैसला यूनिवर्सिटी स्तर पर ही होगा। इसके बाद नाराज छात्र कॉलेज परिसर में ही धरने पर बैठ गए। “उधार लेकर फीस भरी, अब भविष्य संकट में”
भोजला गांव की एमए छात्रा शशि प्रजापति पेपर छूटने के बाद रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि वह प्राइवेट नौकरी करके अपनी पढ़ाई का खर्च उठाती हैं। स्पेशल बैक परीक्षा की फीस भरने के लिए भी 750 रुपए उधार लेने पड़े थे।
शशि ने कहा, “हमारे पास जो टाइम टेबल था, उसी के हिसाब से पेपर देने आए थे। अगर समय बदला था तो हमें सूचना क्यों नहीं दी गई? अब हमारा भविष्य खतरे में पड़ गया है।” गरौठा क्षेत्र से आने वाली छात्रा अंकिता ठाकुर ने बताया कि वह लोकल जॉब कर पढ़ाई का खर्च निकालती हैं। उन्होंने कहा कि गांव में उनके घर अखबार नहीं आता, ऐसे में समय परिवर्तन की जानकारी कैसे मिलती। “घर वालों को क्या जवाब देंगे”
गुरसरांय से आई छात्रा अंकिता ने कहा कि वह नौकरी से छुट्टी लेकर परीक्षा देने आई थीं। घर वालों को भी यही बताया था कि पेपर देने झांसी जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “अब घर जाकर क्या बताएंगे कि पेपर ही नहीं हुआ। परिवार वाले पढ़े-लिखे नहीं हैं, उन्हें लगेगा कि हम बहाना बनाकर घूमने गए थे।”
वहीं छात्र अमान खान ने बताया कि उनके सेकेंड सेमेस्टर बैक पेपर का समय पहले दोपहर 3 बजे था। इसी हिसाब से वह यूनिवर्सिटी पहुंचे थे, लेकिन वहां पता चला कि परीक्षा सुबह 11 बजे ही हो चुकी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है। प्राचार्य बोले-यूनिवर्सिटी से करेंगे बात
कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर एसके राय ने छात्रों को मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन से बात की जाएगी। साथ ही छात्रों से लिखित आवेदन भी लिया गया है।
प्रो. राय ने बताया कि परीक्षा समय में बदलाव की सूचना अखबारों के जरिए जारी की गई थी, लेकिन दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले कई विद्यार्थियों तक यह सूचना नहीं पहुंच सकी।

