मेडिकल-कॉलेज में प्राइवेट कर्मी ने लिया मरीज का ब्लड सैंपल:DM ने लिया संज्ञान, प्रिंसिपल ने डॉक्टर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
कुशीनगर जिला मुख्यालय स्थित स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय के महिला विंग में मरीजों से प्राइवेट लैब के कर्मचारियों द्वारा ब्लड सैंपल लिए जाने का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कैमरे में डॉक्टर के कहने पर सैंपल लेने का दावा दैनिक भास्कर की टीम ने 4 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के महिला विंग एल-2 में मामले की पड़ताल की। स्टिंग के दौरान महिला विंग में तैनात डॉक्टर प्रभात अपने सरकारी कक्ष में मरीजों को देखने के बाद कथित तौर पर प्राइवेट लैब कर्मियों को ब्लड सैंपल लेने के लिए कहते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हुए। इसके बाद प्राइवेट लैब कर्मी ने मेडिकल कॉलेज परिसर में ही एक महिला मरीज का ब्लड सैंपल लिया और उसका शुल्क भी वसूला। स्टिंग के दौरान कर्मचारी ने अपना पता बताते हुए यह भी कहा कि डॉक्टर के कहने पर ही सैंपल लिया जा रहा है। DM बोले- स्वास्थ्य समिति की बैठक में होगी चर्चा मामला सामने आने के बाद सोमवार को जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर से इस संबंध में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। डीएम ने कहा कि इस महीने होने वाली जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मामले पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रिंसिपल ने डॉक्टर को जारी किया नोटिस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. केपी गोंड ने बताया कि मामले में संबंधित डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर से तय समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद साफ होगी जिम्मेदारी स्टिंग के बाद मेडिकल कॉलेज में मरीजों से प्राइवेट लैब के जरिए सैंपल लेने के मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल कॉलेज प्रशासन ने संबंधित डॉक्टर से जवाब मांगा है और जिला प्रशासन भी मामले को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखने की बात कह रहा है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मरीजों के सैंपल लेने की प्रक्रिया किसके निर्देश पर चल रही थी, प्राइवेट लैब कर्मियों को मेडिकल कॉलेज परिसर में सैंपल लेने की अनुमति थी या नहीं और मरीजों से वसूले गए शुल्क की क्या व्यवस्था थी। जांच के निष्कर्ष के बाद ही जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।

