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गणपति भक्तों ने नम आँखों से दी सिद्धि विनायक को विदाई

बाबा न्यूज़ 
आगरा । गोकुलपुरा स्थित प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर में 66वें गणेश महोत्सव का समापन शुक्रवार को गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ… के जयकारों के बीच कैलाश घाट पर गणपति प्रतिमा के विसर्जन से हुआ। इससे पूर्व सिद्धिविनायक मंदिर पर गणेश जी का लड्डू व दुर्वा के साथ सहस्त्रर्चन और हवन किया गया। इस अवसर पर मंदिर में आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शाम को विसर्जन यात्रा से पूर्व गणपति प्रतिमा की 1008 दीपकों से महाआरती की गई। इसके उपरांत ढोल नगाड़ो की थाप पर विसर्जन यात्रा कैलाश घाट तक निकाली गई। जहां महंत पंडित मनीष शर्मा के सानिध्य में विधिवत पूजन कर भक्तो ने गणेश प्रतिमा का यमुना नदी में नम आँखों से विसर्जन किया। इस मौके पर गणेश महोत्सव सवारी मेला कमेटी के लोग रजत अस्थान, शरद अस्थाना, वैभव शर्मा, यश पंडित, अतुल गौतम,कुणाल गौतम आशु अग्रवाल विजय यादव, शत्रुजीत, समर, समीर साहित सैकड़ो गणपति भक्त मौजूद रहे।

लक्ष्मी नारायण मंदिर बंबई वाली बगीची में बही राम भक्ति रस की अमृतधारा

पावन सुंदरकांड के संगीतमय गायन और राम काव्य रस वर्षा से पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ ने किया भाव-विभोर

रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूज़िक फाउंडेशन एवं श्री श्री आनंदमयी माँ मानस परिवार ने किया दिव्य आयोजन

संस्कार भारती, ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया, अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल और माधुर्य सहित एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने रामायणी सम्मान से विभूषित रामचरित मानस मर्मज्ञ एवं वरिष्ठ कवि-साहित्यकार पंडित योगेश चंद शर्मा ‘योगी’ का किया नागरिक अभिनंदन

योगेश जी रामचरितमानस को गाते ही नहीं अपितु उसके शब्द-शब्द की अर्थच्छवि को उद्भासित करते चलते हैं: मिथिलेशशरण नंदिनी

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आगरा। रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूज़िक फाउंडेशन एवं श्री श्री आनंदमयी माँ मानस परिवार के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार शाम बंबई वाली बगीची-खंदारी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में भक्ति गीत-संगीत और सम्मान की ऐसी त्रिवेणी बही कि राम भक्त-श्रद्धालु और साहित्य अनुरागी भाव-विभोर हो गए।
*आचार्य गौरव शुक्ला (कानपुर)* द्वारा व्यास पूजन के बाद रामचरितमानस को विभिन्न रागों और तालों में निबद्ध करके जन-जन का कंठहार बनाने वाले रामचरितमानस की वर्तमान गायन परंपरा के जनक, रामायणी सम्मान से विभूषित रामचरितमानस मर्मज्ञ वरिष्ठ कवि-साहित्यकार *पंडित योगेश चंद्र शर्मा योगी और उनके मानस परिवार के अभिन्न अंग आगरा से अजय पाठक और कानपुर से योगेश भसीन और विनय तिवारी* ने रामचरितमानस के पावन सुंदरकांड का संगीतमय गायन कर समाँ बाँध दिया।
श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम के साथ श्री श्री आनंदमई माँ के संकीर्तन के बाद ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की सुमधुर धुन से आरंभ हुआ संगीतमय सुंदरकांड जब ‘रामकाज कीने बिना मोहि कहाँ विश्राम’ पर पहुँचा तो पूरा मंदिर परिसर जय श्री राम के उद्घोष से गूँज उठा।
*समारोह-अध्यक्ष अयोध्या धाम से पधारे संत प्रवर मिथिलेशशरण नंदिनी जी महाराज ने कहा* कि श्री रामचरित भारत की आत्मा का स्वर है। प्रतिकूल परिस्थितियों में रामचरित मनुष्य का संबल बनता आया है। योगेश शर्मा जी श्रीराम चरित मानस को गाते ही नहीं, अपितु उसके शब्द-शब्द की अर्थच्छवि को उद्भासित करते चलते हैं।
*अति विशिष्ट अतिथि मनकामेश्वर धाम के महंत योगेश पुरी और बल्केश्वर धाम के महंत कपिल नागर* ने भी राम नाम का महत्व बताते हुए योगेश जी को शुभाशीष प्रदान किया।
रामायण रिसर्च काउंसिल और निर्मल लिटरेचर एंड म्यूज़िक फाउंडेशन के साथ-साथ अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, संस्कार भारती जिला आगरा, संस्कार भारती पश्चिम प्रताप शाखा, ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया-आगरा चैप्टर, रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल, आगरा बार एसोसिएशन, ब्रजभाषा काव्य मंच, माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, साहित्य निधि ओपन कला मंच, समानांतर, सारंग फाउंडेशन, ऑड ईवन फिल्म्स और जयवी सा ग्रुप प्रॉपर्टी वाला सहित एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान के लिए योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ जी का नागरिक अभिनंदन कर सम्मानित किया।
इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. गिरीश गुप्ता, श्रीमती रमा वर्मा, आचार्य पंडित दाऊ दयाल शास्त्री, राज बहादुर सिंह राज* विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे।

निर्मल लिटरेचर एंड म्यूज़िक फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश निर्मल ने समारोह का संचालन किया। रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी सेवानिवृत्त आईएएस देवदत्त शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
यतेंद्र सोलंकी, निशिराज, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, सूरज तिवारी, डॉ. ज्योत्सना शर्मा, श्रुति सिन्हा, डॉ. राजीव शर्मा निष्पृह, संजय गुप्त, प्रभु दत्त उपाध्याय, आचार्य उमाशंकर पाराशर, मोहित सक्सेना, अंकित सारस्वत, राजकुमार जैन, अशोक गोयल, सुधा वर्मा, यशोधरा यादव, देवेंद्र धाकरे, अतुल कुमार, मयंक शर्मा और कुमार ललित* भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

रघुनंदन मोहि निकरियो ना..

समारोह के दौरान राम काव्य रस वर्षा करते हुए अपने कविता संग्रह श्री राम चरणामृत में से कंटक करुण कथा सुनाते हुए पंडित योगेश चंद्र शर्मा योगी ने इन पंक्तियों से सभी का मर्म छू लिया। कंटक प्रभु से कहता है- “तुम हो रक्षक प्रभु पतितन्ह के, निज नीति की रीति बिगारियो ना। सब छाँडि के रावरे पाँव लगे, शरणागत जानि निवरियो ना। पद लागि सरोज भए हमहूँ, अब कंटक नाम पुकारियो ना। कसको जो करूँ, सहि लीजो व्यथा, रघुनंदन मोहि निकारियो ना..”

श्रद्धा भक्ति से हुआ रामेश्वरनाथ महादेव का पौष पत्री भंडारा

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आगरा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामेश्वरनाथ महादेव, मनसा देवी, गोकुलपुरा का पौष पत्री भंडारा सोमवार को श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित हुआ। प्रात: बाबा का विधिवत शृंगार, पूजन, अभिषेक, भजन एवं हवन किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज कुमार शर्मा, गोपाल शर्मा एवं रामेश्वर शर्मा ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।
दोपहर में नाद प्रसादी के बाद ब्राह्मण भोजन कराया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर बाबा रामेश्वरनाथ महादेव का आशीर्वाद लिया। आयोजन में श्रद्धालुओं एवं सहयोगीजनों ने सेवा और सहभागिता कर भंडारे को सफल बनाया।
आयोजक नितिन अग्रवाल ने कहा कि रामेश्वरनाथ महादेव का पौष पत्री भंडारा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, आस्था और आपसी सहयोग की परंपरा है। बाबा की कृपा से प्रतिवर्ष श्रद्धालुजन मिलकर इस आयोजन को सफल बनाते हैं। भक्तों की सेवा करना और उन्हें प्रसादी कराना सौभाग्य की बात है। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं सेवाभावीजनों का आभार व्यक्त किया।
आयोजन के मुख्य कर्ता के रूप में प्रतिवर्ष जितेंद्र कुमार अग्रवाल एवं नितिन कुमार अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर सभी ने बाबा रामेश्वरनाथ महादेव से समाज में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।

 

पंचम गणेश महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बना101 किलो का मेवा मोदक

पीत वस्त्रों में सजे महागणपति, विजय तिलक से दमका मुख-मंडल
आठवें दिवस स्वणार्भूषणों से अलंकृत भगवान ने दिए दिव्य दर्शन, नवीन अग्रवाल ने की वस्त्र श्रृंगार सेवा
बाबा न्यूज
आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के आठवें दिवस सोमवार को भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को पीत रंग के आकर्षक वस्त्र धारण कराए गए। स्वर्ण मुकुट एवं स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत महागणपति के मस्तिष्क पर विजय तिलक उनकी दिव्य आभा को और निखार रहा था। फूल बंगले में विराजमान भगवान के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हुए।
भगवान की वस्त्र श्रृंगार सेवा नवीन अग्रवाल द्वारा की गई। उन्होंने विधि-विधान से भगवान का वस्त्र श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने गणपति महाराज के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने कहा कि गणेश महोत्सव के प्रत्येक दिवस भगवान के अलग-अलग स्वरूप का श्रृंगार भक्तों को नई आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा है। पीत वस्त्रों में सजे महागणपति का विजय तिलक युक्त स्वरूप भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित ने कहा कि भगवान का श्रृंगार केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि भक्त की भावना और समर्पण का माध्यम है। प्रत्येक दिन भगवान को अलग स्वरूप में सजाते समय शास्त्रीय परंपराओं और पूजा-विधि का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन के साथ श्रद्धालु यदि मन में सकारात्मकता और श्रद्धा लेकर लौटता है, तो यही महोत्सव की सार्थकता है।
मंदिर के प्रबंधक नितिन शर्मा ने कहा कि महोत्सव के प्रत्येक दिवस श्रद्धालुओं की सहभागिता बढ़ रही है। नित्य पूजा, अभिषेक, हवन, श्रृंगार और आरती की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है, ताकि मंदिर आने वाले प्रत्येक भक्त को सहजता से दर्शन और पूजा का अवसर मिल सके।

 

जिसने राम नाम पकड़ लिया, उसे अपनी अस्मिता नहीं गिरानी : मोरारी बापू

राम-सीता विवाह प्रसंग पर भावविभोर हुआ कथा पंडाल
बाबा न्यूज
आगरा। करुणानिधान परिवार द्वारा जेपी वेडिंग ग्राउंड, फतेहाबाद रोड पर आयोजित मोरारी बापू की रामकथा के सातवें दिवस साधु के स्वरूप, त्याग, गुरु-कृपा, रामनाम, स्वाध्याय और श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन हुआ। कथा में श्रीराम के जनकपुर पहुंचने से लेकर सीता स्वयंवर, धनुष भंग, परशुराम संवाद और चारों भाइयों के विवाह तक के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आनंद से भर दिया।
कथा का आरंभ करते हुए मोरारी बापू ने साधु के स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि साधु कोई पद नहीं है, कोई क्रिया नहीं है। साधु तो एक स्वभाव है। साधु का स्वभाव सरल होता है, उसमें कुटिलता नहीं होती और वह सदा संतोष में रहता है।

कथा का कोई मूल्य नहीं, यह अमूल्य है
बापू ने खुले मंच से कथा आयोजन को लेकर चल रही भ्रांति पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह भ्रम है कि बापू की कथा करवाने के लिए इतने हजार या इतने लाख रुपये देने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि मानस अमूल्य है, उसका कोई मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सकता और कथा को किसी मूल्य के बंधन में नहीं बांधा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ह्लमेरा मानस कहता है जिसमें कोई लोभ नहीं वह रघुनाथ हैं।ह्व बापू ने कहा कि जिसे सत्य की साधना नहीं मिली, वह ऋषित्व की ओर नहीं पहुंचा है।

आपातकाल में होती है विवेक और धैर्य की परीक्षा
बापू ने कहा कि विवेक और धैर्य की असली कसौटी सामान्य परिस्थितियां नहीं, बल्कि आपातकाल होता है। कठिन समय में जो व्यक्ति अपने विवेक और धैर्य को बनाए रखता है, वही वास्तव में साधना के मार्ग पर आगे बढ़ता है।महाप्रभु वल्लभाचार्य का स्मरण भी भजन के माध्यम से किया गया। इसी दौरान 2003 में आगरा की धरती पर कही गई ह्यमानस तेजो महलह्ण कथा की स्मृतियों को भी संजोया गया। बापू की उस कथा से जुड़ी पुस्तक ह्यमानस तेजो महलह्ण का विमोचन किया गया।
बापू ने कहा कि भीतर के तेजो महल का सृजन तभी होता है, जब मनुष्य त्याग को स्वीकार करता है। श्रेष्ठता को प्राप्त किए बिना त्याग की वास्तविकता समझ में नहीं आती। जिसने रामनाम को पकड़ लिया, उसे अपनी अस्मिता को गिरने नहीं देना चाहिए।

रिश्वत लेने और देने वाले दोनों पर पाप
बापू ने सामाजिक जीवन में ईमानदारी का संदेश देते हुए रिश्वत लेने और देने, दोनों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पाप केवल लेने वाले पर नहीं, देने वाले पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस पर राम की अति कृपा होगी, वही रामकथा तक पहुंचेगा।
शायर परवीना के एक शेर का उल्लेख करते हुए उन्होंने भाव रखा कि जीवन की ऐसी राह नहीं चुननी चाहिए जो मनुष्य को प्रभु से दूर कर दे।

मंदिर में दर्शन करो, लेकिन घर में धर्म जियो
बापू ने कहा कि मंदिर में दर्शन करना आवश्यक है, लेकिन धर्म का वास्तविक परीक्षण घर के व्यवहार में होता है। उन्होंने परिवार और सामाजिक जीवन में प्रेम, सद्भाव और संयम को प्राथमिकता देने की बात कही।

फिल्मी गीतों में भी छिपा हो सकता है ईश्वर का भाव
कथा के दौरान बापू ने कुछ फिल्मी गीतों की पंक्तियां भी गाईं और कहा कि हर गीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं होता। कुछ गीत सीधे ईश्वर साधना, भक्ति और आस्था की ओर ले जाते हैं। लो आ गई उनकी याद, प्रभु नहीं आए से लेकर ह्य चंदन सा बदन चंचल चितवन और ह्यदीवानों से मत पूछो, दीवानों पर क्या गुजरी है जैसे गीतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनके मूल में भी आध्यात्मिक भाव खोजा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गीत हो या कथा, यदि वह मनुष्य को भीतर से प्रभु की ओर ले जाए तो वह साधना का माध्यम बन जाता है।
कथा की महफिल समझदारों की नहीं, प्रेम में डूबने वालों की है
बापू ने स्वाध्याय और कथा वाचन को बिना आलस्य नियमित रूप से करने की सीख दी।
उन्होंने कहा कि कलियुग की विशेषता है कि यदि मनुष्य मानसिक रूप से भी किसी का भला सोचता है तो उसका फल मिलता है। उन्होंने कहा कि जिसका हृदय मानस से भरा है, वह पाप नहीं कर सकता।
निंदा और ईर्ष्या के स्वभाव से बचने की सीख देते हुए बापू ने कहा कि जिसका स्वभाव ही निंदा और ईर्ष्या करना है, वह अपने माता-पिता तक की निंदा और ईर्ष्या कर सकता है। मनुष्य को अपने भीतर प्रेम और सद्भाव विकसित करना चाहिए।

ऋषियों की परंपरा और पितरों के प्रति श्रद्धा
प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए बापू ने भारद्वाज, कपिल, आचार्य चरक, कश्यप और मनु आदि ऋषियों का स्मरण किया। मनुस्मृति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी ग्रंथ की कोई बात पसंद न आए तो उसे छोड़ सकते हैं, लेकिन उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए।
पितृपक्ष के निकट आने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे पितरों के प्रति तर्पण की परंपरा है, वैसे ही रामकथा के माध्यम से हम अपने ऋषियों की ज्ञान परंपरा को स्मरण और सम्मान का तर्पण कर रहे हैं।

राम जन्म पर सूर्य भी ठहर गया—बापू ने सुनाया भावपूर्ण प्रसंग
राम प्रकटीकरण की कथा को आगे बढ़ाते हुए बापू ने भगवान श्रीराम के जन्म की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम जन्म के आनंद में मानो सूर्य भी अपनी गति भूल गया। राम के जन्म को उन्होंने पूरे ब्रह्मांड के लिए आनंद और मंगल का क्षण बताया।
भगवान शंकर और कागभुशुंडि जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बापू ने भगवान राम के बाल स्वरूप और माता कौशल्या की गोद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राम वह आनंद-सिंधु और सुख-राशि हैं, जिनका नाम आदि-अनादि है।

चार पुत्र नहीं, चार वेदों के सूत्र हैं
बापू ने दशरथ पुत्रों के नामकरण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रामनाम त्रेता से बंधा हुआ नहीं है। भगवान शिव सदैव रामनाम का जाप करते हैं। इसी रामनाम की परंपरा में प्रभु का नाम राम हुआ।भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के नामों की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाया कि तुम्हारे लिए ये केवल चार पुत्र नहीं, बल्कि चार वेदों के सूत्र हैं।कुमार अवस्था का वर्णन करते हुए बापू ने कहा कि गुरु से ज्ञान प्राप्त करने के बाद श्रीराम ने अपनी दिनचर्या में माता-पिता, गुरु और अतिथि के चरण स्पर्श को स्थान दिया। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को बचपन से ही घर से निकलने से पहले माता-पिता और बड़ों को प्रणाम करने की सीख देनी चाहिए।

ताड़का वध से अहल्या उद्धार तक पहुंची कथा
बापू ने कहा कि संत कहते हैं—जिसका चरित्र होता है, कथा उसी की सुनाई जाती है। यही कारण है कि रामचरितमानस केवल एक कथा नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अनेक गीत कुछ दशकों बाद भुला दिए जाते हैं, लेकिन रामचरितमानस और भागवत कथा की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
भगवान राम के अवतार कार्य में आई बाधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने ताड़का वध का प्रसंग सुनाया। इसके बाद विश्वामित्र के साथ आगे बढ़ते हुए श्रीराम के गौतम ऋषि के आश्रम पहुंचने और अहल्या उद्धार का वर्णन किया। बापू ने कहा कि गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या का प्रसंग यह सिखाता है कि भूल करने वाला हर व्यक्ति पापी नहीं होता।

जनक ने राम को देखा तो वैराग्य अनुराग में बदल गया
जनकपुर पहुंचने पर राजा जनक द्वारा श्रीराम के दर्शन का प्रसंग सुनाते हुए बापू ने कहा कि जनक परम वैरागी थे, लेकिन राम के दर्शन होते ही उनके भीतर अनुराग उमड़ पड़ा। उन्होंने राम को देखते ही उन्हें पहचान लिया और उनका मन राममय हो गया।
श्रीराम और सीता के प्रथम दर्शन, सीता की पार्वती आराधना, जनक की प्रतिज्ञा और शिवधनुष भंग का प्रसंग आगे बढ़ा। धनुष टूटने के बाद परशुराम के आगमन और श्रीराम के साथ उनके संवाद का वर्णन किया।

सीता-राम विवाह के साथ चारों भाइयों का मंगल मिलन
इसके बाद अयोध्या में विवाह का निमंत्रण भेजा गया। बारात जनकपुर पहुंची और श्रीराम सहित चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ। विवाह पंचमी के मंगल प्रसंग के बीच जनकपुर आनंद से भर उठा। विदाई की बेला में राजा जनक की व्याकुलता और प्रेम का भाव भी बापू ने भावपूर्ण ढंग से सुनाया। इसके बाद चारों भाइयों और नववधुओं का अयोध्या में स्वागत हुआ और बालकांड का यह मंगलमय प्रसंग पूर्ण हुआ।
राम-सीता विवाह की महिमा बताते हुए मानस की यह पंक्ति भी कथा पंडाल में विशेष भाव लेकर आई—सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु॥ अर्थात श्रीसीता और श्रीरघुनाथजी के विवाह प्रसंग को जो प्रेमपूर्वक गाते और सुनते हैं, उनके जीवन में सदा उत्साह और मंगल बना रहता है।

छोटू महाराज सिनेमा में दिखाई जा रही रामकथा की भी सराहना
कथा के दौरान मोरारी बापू ने एत्मादपुर स्थित छोटू महाराज सिनेमा, बैम्बू वाटर पार्क परिसर में राम कथा के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया और इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि कथा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के प्रयास भी अपने आप में सेवा का माध्यम हैं।

251 कुंडीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

16 जिलों के गायत्री परिजन जुटे, 16 से 19 दिसंबर तक सेक्टर-11 मैदान में होगा भव्य महायज्ञ
बाबा न्यूज
आगरा। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शान्तिकुंज के तत्त्वावधान में आगामी 16 से 19 दिसंबर तक आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-11 मैदान में आयोजित होने वाले 251 कुंडीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ की तैयारियों को लेकर रविवार को शास्त्रीपुरम स्थित गायत्री पब्लिक स्कूल के सभागार में महत्वपूर्ण व्यवस्था बैठक हुई। बैठक में आगरा सहित 16 जिलों के गायत्री परिजनों एवं कार्यकतार्ओं ने भाग लिया। इसमें कार्यकर्ता नियोजन, जिम्मेदारियों के वितरण और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यकर्ताओं के नियोजन और जिम्मेदारियों पर मंथन
बैठक की शुरूआत आंवलखेड़ा जोन के समन्वयक जगदीश कुशवाहा एवं उपजोन समन्वयक सुरेश यादव के मार्गदर्शन में हुई। इसके बाद जन्मभूमि आंवलखेड़ा के व्यवस्थापक जीतेंद्र द्विवेदी ने आगामी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यकतार्ओं के कुशल नियोजन और जिम्मेदारियों के प्रभावी वितरण पर जोर देते हुए सभी व्यवस्थाओं को पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
अश्वमेध का रूप ले रहा है राष्ट्र शौर्य समृद्धि महायज्ञ
गोष्ठी को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए उत्तर जोन के प्रभारी श्री परमानंद द्विवेदी जी ने कहा कि यह हम सभी का परम सौभाग्य है कि आगरा की धरती पर 16 से 19 दिसंबर तक सेक्टर 11 मैदान, आवास विकास कॉलोनी में 251 कुण्डीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है। यह भव्य महायज्ञ अब धीरे-धीरे ह्यअश्वमेध यज्ञह्ण का विराट रूप लेता जा रहा है। उन्होंने सभी परिजनों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी क्षमता के अनुसार एक क्षेत्र या कुछ गाँवों को चुनकर उन्हें गायत्री-मय बनाने के लिए आज से ही जुट जाएं।
जाति-धर्म से ऊपर उठकर घर-घर दें आमंत्रण
परमानंद द्विवेदी जी ने साधक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मंत्र लेखन और मंत्र जप पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उपस्थित कार्यकतार्ओं, युवाओं, वरिष्ठों और बहनों को प्रचार-प्रसार में जुटने का आह्वान करते हुए कहा कि वे परम पूज्य गुरुदेव और वंदनीया माताजी के सच्चे प्रतिनिधि बनकर घर-घर जाएं। जाति, वंश, धर्म, संप्रदाय और लिंगभेद की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग को इस महायज्ञ के लिए सादर आमंत्रित करें, क्योंकि ऋषि-युग्म (गुरुसत्ता) हमें कुछ न कुछ देने के लिए ही इस यज्ञ में बुला रहे हैं।
स्वस्तिवाचन मंत्र की व्याख्या और यज्ञ के लाभ
बैठक के दौरान उन्होंने ऊँ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे… के संपूर्ण मंत्र का पाठ कर वैदिक स्वस्तिवाचन मंत्र की अत्यंत मार्मिक और विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समझदार, सुसंस्ड्डत और जागरूक बनाने के लिए गायत्री महामंत्र की परम आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही, यज्ञ के माध्यम से होने वाले व्यक्तिगत, मानसिक, सामाजिक, पारिवारिक और वैश्विक हितों व लाभों के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
16 जिलों के कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प
बैठक के समापन पर उपस्थित सभी 16 जिलों के कार्यकर्ताओं ने आगामी दिसंबर में होने वाले इस राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ को ऐतिहासिक और वैचारिक क्रांति का माध्यम बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
इन्होनें संभाली व्यवस्थाएं
कार्यक्रम में जिला समन्वयक सुरेश चन्द्र सक्सेना, डॉ. रवि सोनी, अरविन्द श्रीवास्तव, गिरधर गोपाल, डॉ. अजय यादव, शिवांक उपाध्याय, सुधीर शर्मा, उमेश कुशवाह, गौरीश सक्सेना, पूजा तिवारी सहित अन्य युवाओं ने व्यवस्था संभाली।

सुन ले ओ सांवरिया, मुझे तेरा ही सहारा है … पर झूमे सांवरिया भक्त

 

श्री सांवरिया सेठ सेवा समिति ट्रस्ट के परिचय सम्मेलन में सजी भजन संध्या,
अखंड ज्योति के समक्ष भक्तों ने लगाई हाजिरी, दाल-बाटी महाप्रसाद में उमड़ा उत्साह
बाबा न्यूज
आगरा। श्री सांवरिया सेठ सेवा समिति ट्रस्ट (रजि.) की ओर से रविवार को जीवनी मंडी स्थित खाटू श्याम जी मंदिर (एसी हॉल) में परिचय सम्मेलन, ह्यएक शाम सांवरिया सेठ जी के नामह्ण भजन संध्या एवं दाल-बाटी महाप्रसाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अखंड ज्योति के समक्ष भव्य दरबार सजाया गया। सांवरिया सेठ के जयकारों और भजनों से मंदिर परिसर देर रात तक भक्तिमय बना रहा।
भजन संध्या में कलाकार विकास वर्मा, प्रीति शर्मा और सूर्यांश गहलोत ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। जैसे ही भजन ह्यमेरा बंगला, मेरी गाड़ी, सब कुछ है तेरा सरकार, मेरा तो कुछ भी नहीं… की स्वर लहरियां गूंजीं, भक्तों ने हाथ उठाकर सांवरिया सेठ के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इसके बाद सांवरिया है सेठ, मेरी राधा जी सेठानी है… और ह्यसुन ले ओ सांवरिया, मुझे तेरा ही सहारा है… जैसे भजनों पर भक्त झूम उठे। ह्यसांवरिया ले चल पल्ली पार… और सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया… ने वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।
भजन संध्या का विशेष आकर्षण रहा मन चल वृंदावन… भजन। इसकी धुन पर सांवरिया भक्त देर तक झूमते रहे और पूरा मंदिर परिसर जय श्री श्याम के जयघोष से गूंज उठा। भजनों के बीच भक्तों ने सांवरिया सेठ के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना की।
संस्थापक विकास मित्तल ने बताया कि सांवरिया सेठ की भक्ति मन को जोड़ने और परिवारों को एक सूत्र में बांधने वाली है। संस्था की स्थापना के साथ परिचय सम्मेलन का उद्देश्य भी यही है कि समिति के परिवार एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें और सेवा एवं भक्ति की भावना को आगे बढ़ाएं।
अध्यक्ष सियाराम पवन कुमार ने कहा कि एक शाम सांवरिया सेठ जी के नाम केवल भजन संध्या नहीं, बल्कि भक्तों के आपसी स्नेह और सामाजिक एकता का उत्सव है।
महामंत्री नीरज वर्मा ने बताया कि समिति आगामी समय में धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक सेवा के कार्यों को भी विस्तार देगी। इसके तहत निर्धन एवं जरूरतमंद कन्याओं के विवाह, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सांवरिया सेठ की भक्ति तभी सार्थक है, जब उसके साथ सेवा की भावना भी जुड़ी हो।
कार्यवाहक अध्यक्ष अविनाश राणा ने कहा कि सांवरिया सेठ के दरबार में आने वाला हर भक्त अपनेपन का अनुभव करता है। भजन, दर्शन और महाप्रसाद के इस आयोजन का उद्देश्य भक्तों को एक साथ जोड़ना और उनमें सेवा व भक्ति की भावना को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में समिति के पारिवारिक सदस्यों एवं अतिथियों के लिए परिचय सम्मेलन भी आयोजित किया गया। सम्मेलन के माध्यम से सदस्यों ने एक-दूसरे से परिचय प्राप्त किया और सामाजिक एवं पारिवारिक जुड़ाव को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने दाल-बाटी महाप्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक विकास मित्तल, अध्यक्ष सियाराम पवन कुमार, कार्यवाहक अध्यक्ष अविनाश राणा, महामंत्री नीरज वर्मा, कोषाध्यक्ष अमित गुप्ता, सह कोषाध्यक्ष वाईपी गुप्ता, संरक्षक मोहन गर्ग, अभय गुप्ता, आशीष सक्सेना, उपाध्यक्ष रीतेश गुप्ता, अतुल अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मंत्री अमित अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल, उमेश यादव, डिंपू चौधरी आदि उपस्थित रहे।

 

हरित श्रृंगार में सजे महागणपति, हरित वाटिका फूल बंगला बना आकर्षण

भाद्र मास की अष्टमी पर हरे वस्त्र, श्वेत पुष्पमाला और त्रिशूल तिलक से सजा भगवान का मनोहारी स्वरूप

आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के अंतर्गत भाद्र मास की अष्टमी पर भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति का मनोहारी हरित श्रृंगार किया गया। भगवान को हरे रंग की आकर्षक पोशाक धारण कराई गई। श्वेत पुष्पों की माला, स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित स्वरूप और मस्तिष्क पर त्रिशूल तिलक भगवान की दिव्य आभा को और निखार रहा था।
इस अवसर पर मंदिर में हरित वाटिका फूल बंगला सजाया गया। हरे परिवेश और श्वेत पुष्पों से सजे फूल बंगले में विराजमान महागणपति के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। भक्तों ने भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना की।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित और प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान का वस्त्र श्रृंगार एवं फल सेवा होती है। विभिन्न भोग सेवाओं के साथ भोग आरती, दोपहर भोग और सायं भोग भी अर्पित किए जाते हैं।
महोत्सव में प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल महागणपति हवन, शाम 6 बजे सहस्रनाम अर्चना, 7 बजे महाआरती तथा रात्रि 9 बजे शयन आरती संपन्न हो रही है। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती से मंदिर परिसर भक्तिमय बना हुआ है।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने बताया कि पंचम गणेश महोत्सव में प्रत्येक दिवस भगवान का अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार किया जा रहा है। फूल बंगले भी उसी अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को प्रतिदिन महागणपति के नवीन और मनोहारी स्वरूप के दर्शन हो रहे हैं।

कमल पुष्पों से सजा मां महालक्ष्मी का दरबार, स्वर्ण आभूषणों से हुआ अलौकिक श्रृंगार

राधा अष्टमी पर श्री महालक्ष्मी मंदिर बल्केश्वर में छप्पन भोग, महाभिषेक और महाआरती
बाबा न्यूज
आगरा। राधा अष्टमी के पावन अवसर पर बल्केश्वर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में मां महालक्ष्मी का विशेष कमल पुष्प श्रृंगार किया गया। गुलाबी अलंकरण के बीच मां को स्वर्ण आभूषण धारण कराए गए। कमल पुष्पों से सजे दरबार में मां के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
मंदिर में विधि-विधान के साथ महाभिषेक किया गया। इसके बाद मां को छप्पन भोग अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।
मंदिर के पंडित रमाकांत पांडे ने बताया कि राधा अष्टमी पर मां महालक्ष्मी का सहस्त्र कमल पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। गुलाबी अलंकरण और स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित मां का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने मां की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रद्धा और भक्ति से की गई आराधना से भक्तों को सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है।
शाम को श्री देवी जी ट्रस्ट की ओर से भव्य महाआरती की गई। इसमें राम मोहन कपूर, सतीश गोपाल कपूर, अपिल कपूर और तुषार कपूर ने सहभागिता की। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर मां के जयकारों और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

 

जनकपुरी की महाआरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य, एमएलसी विजय शिवहरे और मशहूर उद्योगपति पूरन डावर ने की शिरकत

बाबा न्यूज़ 

आगरा । 149वीं जनकपुरी महोत्सव 2026 को लेकर भावना एस्टेट स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित की जा रही दैनिक महाआरती में विशेष आध्यात्मिक एवं सामाजिक गरिमा देखने को मिली । महाआरती में उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री एवं उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, विधान परिषद सदस्य श्री विजय शिवहरे तथा प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री पूरन डावर ने सहभागिता कर विधिवत आरती की और भगवान के श्रीचरणों में नमन किया ।

महाआरती के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं एवं आयोजन समिति के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने जनकपुरी महोत्सव को भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन बताया । उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं । उन्होंने जनकपुरी महोत्सव के सफल आयोजन के लिए आयोजनबसमिति को शुभकामनाएं दीं ।

विधान परिषद सदस्य श्री विजय शिवहरे ने कहा कि आगरा की जनकपुरी महोत्सव की परंपरा शहर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है । उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता के आदर्शों से जुड़े इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का परिचायक है । उन्होंने आयोजन समिति द्वारा की जा रही तैयारियों की सराहना करते हुए महोत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं ।

प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री पूरन डावर ने भी महाआरती में प्रमुख रूप से सहभागिता करते हुए जनकपुरी महोत्सव की तैयारियों और आयोजन समिति के प्रयासों की भरपूर सराहना की। उन्होंने कहा कि जनकपुरी महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का उत्सव है । उन्होंने महोत्सव की भव्यता एवं सुव्यवस्थित तैयारियों के लिए समिति को शुभकामनाएं प्रेषित कीं ।

इस अवसर पर जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री राजू यादव ने सभी अति विशिष्ट अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महाआरती में विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का उत्साह बढ़ा है । उन्होंने कहा कि जनकपुरी महोत्सव को भव्य, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं की भावनाओं के अनुरूप आयोजित करने के लिए पूरी आयोजन समिति समर्पित भाव से कार्य कर रही है ।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष जनकपुरी क्षेत्र में जिस स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, उससे महोत्सव की भव्यता और आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि होगी । जनक महल के निर्माण से लेकर विद्युत सजावट, मंच, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक प्रत्येक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है । इसी कड़ी में हाल ही में क्षेत्र में लगभग 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ है, जिससे जनकपुरी क्षेत्र को महोत्सव से पहले विकास की बड़ी सौगात मिलने जा रही है ।

अध्यक्ष राजू यादव ने महाआरती में पधारे सभी विशिष्ट अतिथियों, आयोजन समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों तथा श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि सभी के सहयोग एवं सहभागिता से जनकपुरी महोत्सव 2026 को ऐतिहासिक और स्मरणीय बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ।