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एसटीएफ ने नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले दबोचे:फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर हो जाते थे फरार, ट्रेनिंग कराकर वसूलते थे 10 लाख रूपए

मेरठ एसटीएफ ने विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती कराने का लालच देकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले दो आरोपियों को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की माने तो गिरोह के कई और सदस्य रडार पर हैं जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। एसटीएफ काफी समय से इन्हें ट्रेस कर रही थी। एएसपी एसटीएफ बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि हाल ही में एसटीएफ को सूचना मिली कि मुरादाबाद के थाना डिलारी अंतर्गत स्थित ग्राम ढकिया पीरु निवासी अशरफ अली पुत्र सलीम अहमद युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने ठगी का शिकार बना रहा है। अब तक काफी युवाओं को वह शिकार बना चुका है। उनका एक अंतर्राजयीय गिरोह है जो इस अनैतिक काम में लिप्त है। इसके बाद एसटीएफ ने सूचना पर काम करना शुरू कर दिया। मुरादाबाद आने की मिली थी सूचना
एसटीएफ लगातार अशरफ अली की तलाश कर रही थी। सूचना मिली कि बुधवार को अशरफ अली अपने एक साथी के साथ मुरादाबाद में मौजूद है। एसटीएफ ने घेराबंदी की और अशरफ अली के अलावा उसके साथी विवेक पुत्र राधेश्याम निवासी ग्राम जरगांव थाना बिलारी जनपद मुरादाबाद हाल निवासी चंदौसी जनपद संभल आवास विकास कॉलोनी को भी गिरफ्तार कर लिया। रकम लेकर थमा देते थे फर्जी कागजात
एएसपी ने बताया कि कई पीड़ितों से बातचीत के दौरान पता चला था कि यह गिरोह युवाओं को पहले अपने जाल में फांसता है और उन्हें नकली जॉइनिंग लेटर, आई कार्ड थमाकर उनसे मोटी रकम वसूलते हुए गायब हो जाता है। फोन पर सारी डीलिंग होती है। रकम मिलने के बाद उस सिम को भी तोड़कर फेंक देता है। प्रति कैंडिडेट वसूलते थे 10 लाख रुपए
बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि इन लोगों का एक गिरोह है जो ऐसे लोगों की तलाश में घूमता रहता है, जिनका सरकारी नौकरी पाने का सपना होता है। वह उसे बातों में फसाते हैं और भारतीय रेलवे, भारतीय सेना, भारतीय डाक विभाग, वनरक्षक, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली पावर कॉरपोरेशन जैसे सरकारी विभागों में नौकरी का सपना दिखाकर प्रति कैंडिडेट 10 लाख रुपए तक वसूलते हैं। ईमेल पर भेजते थे जॉइनिंग का लेटर
एसटीएफ की माने तो यह गिरोह बेहद शातिर है। कैंडिडेट को पूरी तरह भरोसा दिलाने के बाद पहले उनसे रकम वसूलता है और फिर ईमेल पर उन्हें उनके विभाग का फर्जी जॉइनिंग लेटर भेज देता है। वह जॉइनिंग लेटर फर्जी है, इस बात का पता उस वक्त चलता है, जब वह कैंडिडेट उस विभाग में पहुंचता है। भरोसा दिलाने के लिए घुमाते थे विभागों में
यह गिरोह कितना शातिर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कैंडिडेट को पूरी तरह भरोसा दिलाने के बाद दिल्ली उस विभाग में बुलाते थे, जिसका वह फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार करते थे। दो-तीन बार उस विभाग में बुलाकर यह एहसास करा देते थे कि प्रक्रिया जारी है। कई जगह तो यह मिलीभगत कर इंटर्नशिप की आड़ में ट्रेनिंग भी करा देते थे। करीब 2 वर्ष में यह गिरोह 20 से 25 युवाओं को अपना शिकार बना चुका है।

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