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गलत बिल पर उपभोक्ता आयोग सख्त, विभाग को फटकार:औरैया में 3000 हर्जाना और संशोधित बिल जारी करने का आदेश

बिजली विभाग की लापरवाही और गलत मीटर रीडिंग से परेशान एक उपभोक्ता को जिला उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। आयोग ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को फटकार लगाते हुए उपभोक्ता को 3,000 रुपये का हर्जाना देने और वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर संशोधित बिल जारी करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र, सदस्य अमिता निगम और जितेंद्र सिंह कुशवाह की पीठ ने यह आदेश पारित किया। विभाग को 45 दिनों के भीतर वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर नया संशोधित बिजली बिल जारी करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, विभाग को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 1,500 रुपये क्षतिपूर्ति और 1,500 रुपये वाद व्यय, कुल 3,000 रुपये का भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला गांव मधुपुर निवासी शांति देवी (59) पत्नी रामगोपाल से जुड़ा है, जिनके नाम पर एक किलोवाट का घरेलू बिजली कनेक्शन है। परिवादिनी की ओर से अधिवक्ता संजीव पांडेय ने आयोग के समक्ष बताया कि जून 2023 तक का समस्त बिजली बिल नियमित रूप से जमा किया जा चुका था। इसके बावजूद, संविदा मीटर रीडर द्वारा गलत डेटा फीड किए जाने के कारण उपभोक्ता का बिल लगातार बढ़ता गया। जून 2024 में मीटर में इंटरनल फॉल्ट आने के कारण 8.08 किलोवाट का लोड प्रदर्शित होने लगा। इसी आधार पर विभाग ने 38,891 रुपये का भारी-भरकम बिल जारी कर बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी थी। अधिवक्ता ने दस्तावेजों के माध्यम से यह भी सिद्ध किया कि शांति देवी ने बिजली बिल राहत योजना के तहत 3 दिसंबर 2025 को 30,175 रुपये जमा कर पूरा बकाया चुकता कर दिया था। इसके बावजूद विभाग ने 3 दिसंबर 2025 से 25 जुलाई 2026 के बीच वास्तविक 90 यूनिट खपत के स्थान पर 6,542 यूनिट जोड़कर त्रुटिपूर्ण बिल जारी कर दिया। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर लापरवाही मानते हुए निर्देश दिया कि 3 दिसंबर 2025 के बाद का बिल केवल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बिना किसी ब्याज, दंड या अधिभार के जारी किया जाए। विभाग चाहे तो 3,000 रुपये की क्षतिपूर्ति को संशोधित बिल में समायोजित कर सकता है। निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के मध्यस्थता प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अधिवक्ता संजीव पांडेय ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है और गलत बिलिंग और प्रशासनिक लापरवाही से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल साबित होगा।

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