संभल में दूध प्लांट और रास्ते की शिकायत पर जांच:पुराने रिकॉर्ड में 8 मीटर रास्ता, 2013 के नक्शे में 4 मीटर हुआ दर्ज
संभल के बहजोई में गुरवार को 4 बजे एक दूध प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट जल और रास्ते की चौड़ाई पर कथित अवैध कब्जे की शिकायत मिली थी। इस पर जिलाधिकारी के निर्देश पर एक टीम ने मौके पर जाकर जांच की। टीम ने रास्ते की स्थिति, राजस्व रिकॉर्ड और दूध प्लांट से जुड़े दस्तावेज भी देखे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी ने एक शिकायत के बाद यह टीम बनाई थी। इसमें बहजोई नगर पालिका के ईओ, चंदौसी के उपजिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट खुद शामिल थे। टीम ने मौके पर जाकर जांच की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि रास्ता आठ मीटर चौड़ा है, लेकिन उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। टीम ने इसी शिकायत की सच्चाई जानने के लिए मौके का मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान पुराने रिकॉर्ड में रास्ते की चौड़ाई आठ मीटर मिली। हालांकि, मौजूदा रिकॉर्ड और नक्शे की जांच करने पर पता चला कि साल 2013 में एक आदेश के बाद नक्शे में बदलाव किया गया था। बदले हुए नक्शे में रास्ते की चौड़ाई चार मीटर दर्ज है। अब प्रशासन साल 2013 के इस नक्शा दुरुस्ती आदेश की जांच करेगा। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि रिकॉर्ड रूम से मूल फाइल निकलवाई जाएगी। इससे यह देखा जाएगा कि साल 2013 में नक्शे में बदलाव किस आधार पर और किस आदेश के तहत हुआ था। सभी रिकॉर्ड की पूरी जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूध प्लांट के निरीक्षण को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने बताया कि प्लांट प्रबंधन से जरूरी कागजात मांगे गए हैं। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि प्लांट कैसे चलाया जा रहा है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि प्लांट चलाने के लिए संबंधित विभागों और सरकार से कौन-कौन सी अनुमतियां ली गई हैं। उन्होंने कहा कि प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था की भी जांच की जाएगी। पानी को नियमानुसार ट्रीट करने के बाद ही उसका निस्तारण किया जाना चाहिए। दस्तावेजों और मौके की व्यवस्थाओं की जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं क्षेत्र की जल निकासी समस्या के समाधान के लिए शहादत बाड़ी के पास स्थित बड़े तालाब तक पक्का नाला निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 15 से 20 दिनों में नाला निर्माण पूरा होने के बाद जलभराव की समस्या से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

