कामिल-फाजिल के शिक्षकों की नहीं होगी जांच:लगा स्टे, दीवान साहबेजमान बोले- मदरसों को लेकर सरकारों की नियत ठीक नहीं
मानवाधिकार आयोग की नोटिस पर यूपी सरकार ने कामिल-फाजिल से साल 2024 के पहले नौकरी पाए मुदर्रिसों ( अध्यापकों) की जांच शुरू की थी। इस जांच के खिलाफ टीचर एसोसिएशन मदारिसे अरबिया यूपी के जनरल सेक्रेटरी दीवान साहेबजमा ने एक रिट हाईकोर्ट में डाली थी। जिसपर बुधवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार की सभी प्रोसिडिंग पर रोक लगा दी और अगले चार हफ्ते में इस प्रकरण में जवाब देने की नोटिस दी है। बता दें की UGC ने साल 2024 से किसी भी मदरसे को कामिल (ग्रेजुएशन) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) की पढ़ाई न कराने का नियम बनाया था क्योंकि यह पढ़ाई UGC की धारा 23 का उल्लंघन थी। लेकिन उसके पहले जिन्हे यह डिग्री मिली है। उसे कहीं भी रद्द करने या अवैध घोषित करने की बात नहीं है। इस ऑर्डर के बाद वाराणसी के मदरसे मदीनतुल उलूम में शिक्षकों ने खुशी जाहिर की और बैठक कर दीवान साहेबजामा का धन्यवाद दिया। जो सरकारी नौकरी में है उसकी भी हो जांच इस संबंध में दैनिक भस्कर से बातचीत करते हुए टीचर एसोसिएशन मदारिसे अरबिया यूपी के जनरल सेक्रेटरी दीवान साहेबजमा ने बताया – UGC के फरमान के बाद मदरसों ने कामिल और फाजिल की पढ़ाई बंद कर दी थी। लेकिन उसके बाद कुछ लोगों ने मानवाधिकार आयोग को लेटर लिखा की इस डिग्री के माध्यम से कई लोग नौकरियों में हैं जो की अवैधानिक है। ऐसे में इसकी जांच होनी चाहिये। मानवाधिकार ने राज्य सरकार को लिखा लेटर दीवान साहबेजामा ने बताया – इसपर मानवाधिकार आयोग ने सरकार को लेटर लिखा और जवाब मांगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ तो दोबारा मानवाधिकार आयोग ने सरकार को फटकार लगाईं। जिसके बाद जांच शुरू हो गई जबकि वो किसी भी प्रकार से अवैध नहीं है। कोर्ट में दायर की याचिका दीवान साहबेजामा ने बताया – इसके बाद हमने हाईकोर्ट में राज्य सरकार की जांच पर सवाल उठाते हुए एक याचिका सभी टीचर्स की तरफ से हाईकोर्ट में डाली। जिसपर बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने हमारे पक्ष को सुना और राज्य सरकार की जांच को तत्काल प्रभाव से रोक ते हुए स्टे दिया है। जो शिक्षकों की बहुत बड़ी जीत है। इसके अलावा हमसे दो सप्ताह में ज्वाइंडर और सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कामिल फाजिल को किसी विश्विद्यालय से दो जाए मान्यता दीवान साहेबजमा ने कहा – हमारी मांग है कि कामिल-फाजिल को किसी विश्वविद्यालय से मान्यता दे दी जाए। विश्वविद्यालय उन्हें पढ़ाये, परीक्षा ले और उन्हें डिग्री दे। उत्तर प्रदेश में ख्वाजा मोइनुद्दीन विश्वविद्यालय बन गया है ।उसी से एफिलिएशन करवा दे सरकार। अरबी फारसी के लिए ही वह विश्वविद्यालय बनाया गया है। वो हमें भी डिग्री दे। लेकिन सरकारों की नियत ठीक नहीं है। क्योंकि विश्वविद्यालय ने भी पत्राचार किया सरकार से की वो उत्तर प्रदेश के 50 हजार बच्चे जो कामिल फाजिल के लिए पढ़ रहे हैं उन्हें वो डिग्री देना चाहते हैं। लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। ऐसे में।उसके लिए अलग से हम लोगों से सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की हैं उसपर भी जल्द फैसला होगा। सरकार की नियत साफ नहीं दीवान ने कहा – सरकार की नियत साफनहीं है यह उसके कार्यों से पता चलता है। मदरसों को लेकर उनकी नियत नहीं साफ है। अगर कोई कमी है तो सरकार के हाथ में है वो दूर कर सकती है।हमारे मंत्री हैं ओमप्रकाश राजभर जी को एक मदरसे में नोट छपता हुआ पाया गया तो उन्होंने पूरे मदरसों को दोषी बता दिया जबकि वो रिकग्नाइज्ड मदरसा नहीं था। लेकिन मंत्री जी जहां जाते हैं इस बात से मदरसों का मखौल उड़ा रहे हैं। तो जब मंत्री ऐसा कह रहा है तो सरकार की नियत कहां साफ है।

