BJP-MLC हरी सिंह ढिल्लों: अखिलेश के मुंगेरी लाल के सपने:संभल में बोले- बनारस में सीटें पहले भी सपा पर थीं, योगी का शासन-योजनाएं अंगद का पैर साबित होंगी, कांग्रेस नेताओं की भाषा सड़क छाप
संभल में नवनिर्वाचित MLC डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने चुनाव में साथ देने वाले पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। कार्यक्रम सोमवार शाम 4 बजे बीजेपी जिला कार्यालय में शुरू हुआ और शाम 5:20 बजे तक चला। इस दौरान जिला प्रभारी डॉ. चंद्रमोहन और जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह रिंकू मौजूद रहे। बनारस में हार को लेकर ढिल्लों ने कहा कि वहां पहले भी सीटें विपक्ष के पास थीं। शिक्षकों के प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह नीतिगत फैसला है और सरकार इस पर निर्णय लेगी। MLC डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार ने 14.61 लाख शिक्षकों को 5 लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी है। मुरादाबाद मंडल के लिए गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में यह सुविधा देना सौभाग्य की बात है। एमएलसी चुनाव में सपा और कांग्रेस की पांच सीटें आने पर ढिल्लों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के आदेश का स्वागत करना चाहिए। उन्होंने माना कि कुछ चीजें समय रहते ठीक हो जातीं, तो नतीजे और बेहतर हो सकते थे। अखिलेश यादव के पांच सीटें जीतने और आने वाले समय को समाजवादी पार्टी का बताने वाले बयान पर ढिल्लों ने कहा, “उनके सपने अच्छे हैं। मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखते रहें। जनता के सामने आने पर स्थिति साफ होगी।” अमित शाह के ‘अंगद का पैर’ वाले बयान पर अखिलेश यादव की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर ढिल्लों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का शासन और उनकी योजनाएं ‘अंगद का पैर’ साबित होंगी। उन्होंने कहा कि समय इसका जवाब देगा। कांग्रेस की रैली पर ढिल्लों ने कहा कि पार्टी के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस नेता चुनाव आयोग, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गाली देते हैं। ढिल्लों ने कहा कि नेताओं की भाषा किसी सामाजिक और राजनीतिक व्यक्ति के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से कहा कि ऐसी भाषा को कोई स्वीकार नहीं करता। कांग्रेस को पुरानी पार्टी बताते हुए उन्होंने उसके नेताओं की भाषा को ‘सड़क छाप’ कहा। सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल के जवाब में ढिल्लों ने कहा कि योगी सरकार ने प्रोजेक्ट अलंकार योजना लागू की है। इसके तहत स्कूल प्रबंधन 25% और सरकार 75% खर्च देगी। उन्होंने कहा कि योजना के लिए करोड़ों रुपए का बजट रखा गया है। सरकार ने सहायता प्राप्त स्कूलों के पुराने विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाने का काम किया है।

