अयोध्या में हीट स्ट्रोक की लहर, बचाव के निर्देश:तापमान 37 डिग्री से ऊपर बढ़ने पर शरीर वातावरण की गर्मी को शोषित करने लगता

अयोध्या में ग्रीष्म ऋतु में लू (हीट स्ट्रोक) गर्म हवाओं से बचाव हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जनहित में किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या के द्वारा बताया गया कि लू (हीट स्ट्रोक) भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय मानकों के निम्नानुसार है। भारत मौसम विभाग के अनुसार जब किसी जगह का स्थानीय तापमान लगातार 03 दिन तक वहां के सामान्य तापमान से 03 डिग्री से० या अधिक बना रहे तो उसे लू या हीट वेव कहते है। किसी स्थान का तापमान लगातार 05 दिन तक सामान्य स्थानीय तापमान से 05 डिग्री० से० अधिक बना रहे अथवा लगातार 02 दिन तक 45 डिग्री से अधिक का तापमान बना रहे तो उसे हीट वेव या लू कहते है। जब वातावरणीय तापमान 37 डिग्री से० तक रहता तो मानव शरीर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। जैसे ही तापमान 37 डिग्री से० से ऊपर बढ़ता है तो हमारा शरीर वातावरणीय गर्मी को शोषित कर शरीर के तापमान को प्रभावित करने लगता है। गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है लू लगना। अंग्रेजी में इसे (हीट स्ट्रोक) या सन स्टोंक कहते है। गर्मी में उच्च तापमान में ज्यादा देर तक रहने या गर्म हवा के झोंको से सम्पर्क में आने पर लू लगती है।
कब लगती है लू
गर्मी में शरीर के द्रव्य बाडी फल्यूड सूखने लगती हैं। शरीर से पानी नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। इन स्थितियों में लोगों को लू लगने की संभावना अधिक रहती हैं।
* शराब की लत हृदय रोग पुरानी बीमारियों मोटापा, पार्किंसंस रोग अधिक उम्र अनियंत्रित मधुमेह।
* ऐसी कुछ औषधियों जैसे डाययूरेटिक एंटीहिस्टामिनिक मानसिक रोग की कुछ औषधियों।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
* गर्म लाल शुष्क त्वचा का होना पसीना न आना।
* तेज पल्स होना
* उथले श्वास गति में तेजी।
* व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति।
* सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी होना चक्कर आना।
* मूत्र न होना अथवा इसमें कमी।
इन लक्षणों के चलते मनुष्यो के शरीर में निम्नलिखित प्रभाव पडता है
* उच्च तापमान से शरीर के आंतरिक अंगों विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है तथा शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न करता हैं।
* मनुष्य के हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता हैं।
हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय और क्या करें क्या न करें
हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए निम्न तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या करना चाहिए
* प्रचार माध्यमों पर हीट वेव/लू की चेतावनी पर ध्यान दें।
* अधिक से अधिक पानी पियें यदि प्यास न लगी हो तब भी।
* हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें।
* धूप के चश्मे छाता टोपी व चप्पल का प्रयोग करें।
* अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर चेहरा हाथ पैरो को गीले कपड़े से ढके रहें तथा छाते का प्रयोग करें। तू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछे अथवा नहलाये तथा चिकित्सक से सम्पर्क करें।
* यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ ले जाए।
* ओ०आर०एस० घर में बने हुये पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी, माङ, नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें, जिससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके। *हीट स्ट्रोक हीट रैश, हीट कैम्प के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचानें।
* यदि मूर्छा या बीमारी अनुभव करते है तो तुरन्त चिकित्सीय सलाह लें।
* अपने घरों को ठंडा रखें. पर्दे दरवाजे आदि का उपयोग करें तथा शाम रात के समय घर तथा कमरों को ठंडा करने हेतु इसे खोल दें।
* पंखे, गीले कपड़ों का उपयोग करें।
* कार्यस्थल पर ठण्डे पीने का पानी रखें उपलब्ध करायें।
* कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें।
* श्रमसाध्य कार्यों को ठंडे समय में करने कराने का प्रयास करें।
* घर से बाहर होने की स्थिति में आराम करने की समयावधि तथा आवृत्ति को बढ़ायें।
* गर्भस्थ महिला कर्मियों तथा रोगग्रस्त कर्मियों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।
क्या न करें
* बच्चों को कभी भी बन्द/खड़ी गाडियों में अकेला न छोंडे।
* दोपहर 11 से 03 बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिये जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें।
* गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़ें न पहनें।
* जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें।
* बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें। अल्कोहल चाय व कॉफी पीने से परहेज करें।

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