भारतीय रेल द्वारा लगभग 30. हजार पदों के समर्पण के विरुद कर्मचारियों में आक्रोश

 

उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ, भारतीय मजदूर संघ उत्तर मध्य रेलवे में 21 से 29 मई तक विरोध पखवाड़ा मनाएगा
बाबा न्यूज
आगरा। उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ, भारतीय मजदूर संघ / भारतीय रेलवे मजदूर संघ से संबद्ध ने रेलवे बोर्ड द्वारा संदर्भित पत्र के माध्यम से जारी निर्देशों के विरुद्ध अपनी गहरी चिंता और तीव्र विरोध व्यक्त किया है। इस पत्र में जोनल रेलवे/प्रोडक्शन यूनिट तथा अन्य इकाइयों को एक अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार स्वीकृत क्षमता का 2% पद वर्ष 2026-27 के लिए लक्ष्य के रूप में समर्पित करने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में UMRKS ने उत्तर मध्य रेलवे में 21 से 29 मई, 2026 तक विरोध पखवाड़े का आंदोलन कार्यक्रम आयोजित किया है। यह उल्लेखनीय है कि पदों के समर्पण के ऐसे निर्देश अब वार्षिक नियमित अभ्यास बन गए हैं, जिससे रेलवे कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश और आशंका पैदा हो रही है। पहले से ही रेलवे में बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के बावजूद स्वीकृत जनशक्ति को लगातार कम करना परिचालन क्षमता, कर्मचारियों के मनोबल और ट्रेन परिचालन की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
संघ उपरोक्त रेलवे बोर्ड द्वारा लिए इस निर्णय का दृढ़ता से विरोध करता है। इसके आधार यह हैं कि सुरक्षा और परिचालन क्षमता। सुरक्षा और परिचालन श्रेणियों के पदों के समर्पण से पहले से ही गंभीर जनशक्ति की कमी और बढ़ जाएगी। जिससे सुरक्षित ट्रेन परिचालन प्रभावित हो सकता है।
भारतीय रेलवे का विद्युतीकरण, लाइन दोहरीकरण/त्रिहरीकरण, नई ट्रेनों का संचालन, स्टेशन पुनर्विकास, तकनीकी उन्नयन आदि के माध्यम से लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण हो रहा है। ऐसे विस्तार के लिए जनशक्ति को कम करने के बजाय रिक्तियां को तत्काल भरने की आवश्यकता है।
अत्यधिक कार्यभार और मानसिक तनाव। मौजूदा कर्मचारी पहले ही बड़ी रिक्तियों के कारण भारी दबाव में काम कर रहे हैं। स्वीकृत क्षमता में और कमी से कार्यभार अत्यधिक बढ़ जाएगा, थकान, तनाव बढ़ेगा और उत्पादकता तथा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा। पदोन्नति और करियर प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव। प्रोत्रति वाले पदों के समर्पण से कर्मचारियों की पदोन्नति में लंबी स्थिरता हो जाएगी और उनके वैध करियर अवसरों से वंचित रहना पड़ेगा।
कर्मचारी पहले ही cadre restructuring और vacancy management की कमी के कारण पदोन्नति में देरी का सामना कर रहे हैं।

आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी का बढ़ता चलन
नियमित पदों को समाप्त करते हुए आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की संख्या बढ़ाना अप्रत्यक्ष निजीकरण की भावना पैदा करता है। इससे संस्थागत विशेषज्ञता, जवाबदेही और दीर्घकालिक कार्यबल स्थिरता कमजोर होती है।
तत्काल भर्ती की आवश्यकता। पदों को समाप्त करने के बजाय सभी श्रेणियों में मौजूद रिक्तियों को तुरंत भरने की जरूरत है। समय पर भर्ती परिचालन दक्षता, कर्मचारी मनोबल और यात्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है।
भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक रूप से स्वस्थ और सामंजस्यपूर्ण औद्योगिक संबंध रहे हैं। किंतु कर्मचारियों की वास्तविक चिंताओं को दूर किए बिना बार-बार जनशक्ति घटाने के उपायों से असंतोष बढ़ेगा और औद्योगिक संबंधों का माहौल प्रभावित होगा। अतः संघ दृढ़ता से मांग करता है कि
पद समर्पण की प्रक्रिया की तुरंत समीक्षा की जाए और इसे रोका जाए। किसी भी स्थिति में सुरक्षा श्रेणी के पदों को समर्पित न किया जाए। मौजूदा रिक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। किसी भी जनशक्ति (manpower) संबंधी नीतिगत निर्णय से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों/महासंघों से उचित परामर्श किया जाए।
यह भी अनुरोध है कि इस रेलवे के कर्मचारियों की भावनाओं और चिंताओं को रेलवे बोर्ड तक पहुंचाया जाए तथा सुरक्षा, परिचालन दक्षता, कर्मचारी कल्याण और औद्योगिक सद्भाव के व्यापक हित में इस मामले पर पुनर्विचार किया जाए।
यदि अनुकूल समीक्षा नहीं हुई तो रेलवे कर्मचारियों में बढ़ते आक्रोश के कारण संगठन को कर्मचारियों के हितों और रेलवे परिचालन की सुरक्षा की रक्षा के लिए उचित संगठनात्मक कार्रवाई पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
रेलवे द्वारा 30 हजार पद सरेंडर करने के निर्णय के विरोध में BRMS द्वारा राष्ट्रव्यापी विरोध पखवाड़ा कार्यक्रम 15 से 29 मई मनाया जाएगा। मण्डल रेल प्रबंधक गगन गोयल को ज्ञापन दिया गया।

ज्ञापन देते समय जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश भगोर, जिला मंत्री मुकेश चाहर, मण्डल अध्यक्ष हरि बल्लभ दीक्षित, मण्डल मंत्री बंशी बदन झा, राहुल कुमार, आर के गौतम, राजन सिंह, राजीव कुमार , राकेश मीणा, संतोष कुमार एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *