श्री शिव महापुराण में गणेश जन्मोत्सव प्रसंग सुनाया

पांचवे दिन कार्तिक जी उत्त्पत्ति व ताड़कासुर का वध का किया वर्णन
बाबा न्यूज
आगरा। जब अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में पड़ जाता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में संसार का कल्याण करने के लिए अवतरित होते हैं। तारकासुर के अत्याचारों से देवता व्याकुल हो गए थे। तब भगवान शिव और माता पार्वती के तेज से भगवान कार्तिकेय का प्राकट्य हुआ। कार्तिकेय ने देवसेना के सेनापति बनकर तारकासुर का वध किया और धर्म की स्थापना की। ये उद्द्गार विश्व सनातन ट्रस्ट की ओर से कमला नगर स्थित सुभाष नगर चौराहे पर चल रही शिव पुराण कथा मे व्यास पीठासीन कार्ष्णि मयंक उपाध्याय महाराज का। पांचवे दिन शनिवार को कार्तिक जी उत्त्पत्ति, ताड़कासुर का वध, गणेश जन्मोत्सव और विवाह वर्णन किया गया।
कार्ष्णि मयंक उपाध्याय ने कहा कि माता पार्वती ने अपने प्रेम और शक्ति से गणेशजी को उत्पन्न किया। भगवान शिव द्वारा उन्हें गणों का अधिपति और प्रथम पूज्य बनने का वरदान मिला। इसी कारण किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है। गणेश विवाह की कथा जीवन में ज्ञान और बुद्धिमत्ता के महत्व को दशार्ती है। जब पृथ्वी की परिक्रमा की प्रतियोगिता हुई, तब गणेशजी ने माता-पिता को ही समस्त संसार मानकर उनकी परिक्रमा की। उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती ने उनका विवाह ऋद्धि और सिद्धि के साथ कराया। भगवान गणेश के जन्म प्रसंग के आते ही पूरा पंडाल ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारों से गूंज उठा। सुबह बाल संस्कार शिविर में 40 बच्चो को संस्कार की शिक्षा दी।
शिवपुराण में आज
अध्यक्ष आकाश शर्मा व सचिव रेखा शर्मा ने बताया कि बुधवार को हनुमान जन्मोत्सव, नंदी अवतार, तुलसी अवतार, 12 शिवलिंग उत्त्पति और महत्व और बेल पत्तो की महत्वता के दिव्य प्रसंग होंगे। शिव महापुराण का समापन 18 जून को किया जायेगा। इस अवसर पर कमलेश शर्मा, भारत उपाध्याय, राजीव गुप्ता, डॉ ज्योति गुप्ता, ऋषिकेश झा, कामना गोयल, नीलू मित्तल, रितु गर्ग, वंदना गुप्ता, नेहा गुप्ता, ललिता वर्मा, मिनी वर्मा, संतोष तनेजा, प्राश बत्रा आदि मौजूद रहे।

