खेत में मिला विशाल अजगर, मंदिर में दिखा सैंड बोआ

वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा आगरा में दो सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू
बाबा न्यूज
आगरा। वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने लगभग 12 फीट लंबे अजगर और एक कॉमन सैंड बोआ का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से आगरा के दो अलग-अलग स्थानों पर दो सांपों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। लगभग 12 फीट लंबे भारतीय अजगर (Python molurus) को मिधाकुर गांव के एक खेत से रेस्क्यू किया गया, जबकि एक कॉमन सैंड बोआ (Eryx conicus) का रेस्क्यू किरावली वन क्षेत्र स्थित एक मंदिर परिसर से किया गया। दोनों सांप पूरी तरह सुरक्षित थे और उन्हें उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
भारतीय अजगर ज्वार (चरी) के घने खेत में छिपा हुआ था, जहां करीब 10 से 12 फीट ऊंची खड़ी फसल उसे छिपने के लिए पर्याप्त आड़ प्रदान कर रही थी। उत्तर प्रदेश वन विभाग से सूचना मिलने के बाद वाइल्डलाइफ एसओएस की रेस्क्यू टीम सावधानीपूर्वक खेत के भीतर पहुंची और बिना अजगर को किसी अनावश्यक तनाव में डाले उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।
एक अन्य घटना में आगरा के किरावली वन क्षेत्र स्थित एक मंदिर परिसर में एक कॉमन सैंड बोआ दिखाई दिया। सूचना मिलने पर टीम तुरंत मौके पर पहुंची, सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के बाद उसे उपयुक्त वन क्षेत्र में छोड़ दिया l
भारतीय अजगर को आईयूसीएन रेड लिस्ट में निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) श्रेणी में रखा गया है, और इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। जबकि कॉमन सैंड बोआ, जो एक विषहीन और ज़मीन के भीतर बिल बनाकर रहने वाला सांप है, अंधविश्वासों और अवैध पालतू वन्यजीव व्यापार की मांग के कारण भारत में सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाले सांपों में से एक है। ये दोनों रेस्क्यू इस बात को दर्शाते हैं कि भारत के देशज सांपों के संरक्षण के लिए जन जागरूकता और समय पर की गई कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।
*वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा*, “अजगर अपने आसपास के वातावरण में बहुत आसानी से छिप जाते हैं, इसलिए घने खेतों में उनका रेस्क्यू करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। यह रेस्क्यू इस बात को भी दर्शाता है कि वन्यजीव और खेती वाले इलाके कितनी नज़दीकी से एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। हम उत्तर प्रदेश वन विभाग के त्वरित सहयोग के लिए उनके आभारी हैं, जिसकी बदौलत दोनों रेस्क्यू सुरक्षित तरीके से किए जा सके।”
*वाइल्डलाइफ़ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा*, “चाहे खेत हो या मंदिर, वन्यजीव अक्सर खुद को इंसानी बस्तियों के बीच पाते हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे कभी भी खुद सांपों को पकड़ने की कोशिश न करें, बल्कि सांप दिखाई देने पर तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दें ।”
*वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक, बैजूराज एम.वी. ने कहा*, “कॉमन सैंड बोआ भारत में सबसे अधिक अवैध रूप से तस्करी किए जाने वाले सांपों में से एक है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं, जहां सांप के दिखाई देने पर लोग जिम्मेदारी के साथ इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को देते हैं, यह दिखाती हैं कि लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है।”
वाइल्डलाइफ एसओएस आगरा-मथुरा क्षेत्र के लिए अपनी आपातकालीन हेल्पलाइन +91 9917109666 का संचालन लगातार कर रहा है और लोगों से अपील करता है कि वन्यजीव दिखाई देने पर उन्हें पकड़ने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित विशेषज्ञों को इसकी सूचना दें।

