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मन और शरीर का तालमेल ही सुखी जीवन का मंत्र:CSJMU में बोले एक्सपर्ट- शरीर सिर्फ साधन है, देखने और समझने वाली असली ताकत ‘मैं’ हूं

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में चल रहे आठ दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के चौथे दिन शनिवार को 2 बजे इंसानी जिंदगी के सबसे बड़े सच पर गहरा मंथन हुआ। यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू (UHV) प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस सत्र में एक्सपर्ट्स ने साफ किया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर स्वस्थ और सुखी रहना है, तो खुद के मन (Self) और शरीर के बीच तालमेल बिठाना सबसे जरूरी है। अक्सर लोग शरीर को ही सब कुछ मान लेते हैं, लेकिन असलियत यह है कि शरीर सिर्फ एक साधन है। देखने, समझने, फैसले लेने और सुख-दुख को महसूस करने वाली असली चैतन्य इकाई ‘मैं’ यानी हमारी आत्मा है। शरीर का ध्यान रखना आपकी जिम्मेदारी, ये हैं सेहत के 7 नियम सत्र के दौरान बताया गया कि चूंकि शरीर ‘मैं’ के इशारों पर काम करता है, इसलिए इसका सही पोषण, देखरेख और सही इस्तेमाल करना हर इंसान की जिम्मेदारी है। इसी आत्म-नियंत्रण को ‘संयम’ कहा गया है। एक स्वस्थ शरीर के लिए सात चीजें सबसे जरूरी बताई गई हैं: परिवार में दूर होगी कड़वाहट, इन 9 कड़ियों से मजबूत होंगे रिश्ते कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में पारिवारिक रिश्तों में आ रही दूरियों और उन्हें सुधारने के तरीकों पर बात हुई। एक्सपर्ट ने बताया कि परिवार इंसान की पहली पाठशाला है। वास्तविक रिश्ता दो शरीरों के बीच नहीं, बल्कि दो इंसानों की चेतना के बीच होता है। रिश्तों में ‘विश्वास’ को सबसे बड़ी नींव बताया गया। अक्सर हम सामने वाले की नीयत और उसकी काबिलियत में फर्क नहीं कर पाते, जिससे गलतफहमियां बढ़ती हैं। पारिवारिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए 9 मानवीय मूल्यों को आधारशिला बताया गया, जिसमें सम्मान, स्नेह, ममता, श्रद्धा, गौरव, कृतज्ञता और प्रेम शामिल हैं। अगर इन मूल्यों को जीवन में उतार लिया जाए, तो किसी भी परिवार में स्थायी तालमेल और अटूट विश्वास पैदा किया जा सकता है। इस दौरान डॉ. नेहा शुक्ला, डॉ. अनिल सिंह राठौड़, डॉ. अभिषेक कुमार और आरपी सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।

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