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विनीत जोशी समिति की सिफारिशों से स्कूली शिक्षा होगी मजबूत

विकसित भारत का होगा रास्ता प्रशस्त : डॉ. सुशील गुप्ता
बाबा न्यूज
आगरा। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विनीत जोशी समिति की ओर से कोचिंग संस्कृति और डमी स्कूलों पर प्रस्तुत की गई सिफारिशों का राष्ट्रीय इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस (निसा) ने स्वागत किया है। निसा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि समिति की रिपोर्ट ने उन चिंताओं को स्वीकार किया है जिन्हें संगठन कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है। यह रिपोर्ट स्कूली शिक्षा को पुन: शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि निसा लंबे समय से डमी स्कूलों, अत्यधिक कोचिंग निर्भरता, अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ तथा विद्यार्थियों पर पड़ रहे दोहरे शैक्षणिक दबाव के खिलाफ संघर्ष करती रही है। इन मुद्दों को लेकर संगठन ने विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन दिए, जनजागरण अभियान चलाए तथा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन भी किए। निसा ने विनीत जोशी समिति को भी विस्तृत सुझाव और सिफारिशें भेजकर इस विषय पर अपना पक्ष मजबूती से रखा था।
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा यह स्वीकार किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कोचिंग संस्कृति की समस्या का समाधान केवल कोचिंग संस्थानों को दंडित करने से नहीं होगा। वास्तविक समाधान स्कूली शिक्षा को इतना सक्षम और प्रासंगिक बनाना है कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए स्कूल से बाहर वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े।

समिति ने स्कूल पाठ्यक्रम को जेईई, नीट और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के अनुरूप बनाने, कोचिंग कक्षाओं की अवधि को प्रतिदिन 2 से 3 घंटे तक सीमित करने, उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा को अधिक महत्व देने तथा परीक्षा आधारित दबाव को कम करने के लिए मूल्यांकन प्रणाली में सुधार जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। यदि इन सिफारिशों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो डमी स्कूलों की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और विद्यालय पुन: शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित होंगे।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि आज देश के लाखों विद्यार्थी स्कूल और कोचिंग के दोहरे दबाव में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके कारण न केवल उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी पीछे छूटता जा रहा है। शिक्षा केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच, रचनात्मकता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का साधन है।

उन्होंने कहा कि कोचिंग-प्रधान व्यवस्था ने शिक्षा को बड़े पैमाने पर व्यवसाय में बदल दिया है, जिससे अनेक अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। समिति की सिफारिशों के लागू होने से अभिभावकों को राहत मिलेगी, शिक्षा में समान अवसर बढ़ेंगे तथा विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

निसा का मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की स्कूली शिक्षा मजबूत होगी। एक सशक्त विद्यालय व्यवस्था ही स्वतंत्र चिंतन करने वाले, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले और नवाचार में विश्वास करने वाले नागरिक तैयार कर सकती है। इससे रटंत शिक्षा की संस्कृति कमजोर होगी और बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या-समाधान तथा नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।
राष्ट्रीय इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस (निसा) प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा भारत सरकार से आग्रह करता है कि विनीत जोशी समिति की सिफारिशों को शीघ्र लागू कर उन्हें आवश्यक कानूनी स्वरूप प्रदान किया जाए। इससे करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत मिलेगी, शिक्षा व्यवस्था में संतुलन स्थापित होगा तथा विकसित भारत के निर्माण का मार्ग और अधिक सुगम एवं मजबूत बनेगा।

 

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