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श्री सोमनाथ धाम में  59 वे  गुरु महोत्सव का शुभारंभ

 

22 बच्चों का वैदिक जनेऊ संस्कार संपन्न, भजन संध्या में भक्ति रस की बही अविरल धारा

बाबा न्यूज 

आगरा। गुरु गोरक्षनाथ परंपरा के महान संत श्री सिद्ध ठाकुरनाथ योगेश्वर जी के 59वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को शाहगंज स्थित श्री सोमनाथ धाम में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ हुआ। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु गुरु दरबार में पहुंचकर माथा टेका और गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच जयघोष गूंजता रहा।
कार्यक्रम के प्रथम दिन वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ 22 बच्चों का निःशुल्क जनेऊ संस्कार संपन्न कराया गया। विद्वान आचार्यों ने धार्मिक परंपराओं के अनुरूप यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराते हुए बच्चों को सनातन संस्कृति, सदाचार और संस्कारों के महत्व का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर अभिभावकों और श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता की।
रात्रि में आयोजित विशाल भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। गुजरात के प्रसिद्ध सिंधी भजन गायक परमानंद प्यासी एवं पिंटू सोनी, कानपुर से बब्बी भाई तथा आगरा के एम.एस. ग्रुप ने गुरु महिमा और ईश्वर भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। देर रात तक श्रद्धालु भजनों पर झूमते रहे और पूरा परिसर गुरु भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
मठाधीश पीर डॉ. योगी शंकरनाथ के सान्निध्य में आयोजित दो दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन भव्य शोभायात्रा, श्रीमद् देवी भागवत पुराण पाठ का पूर्णाहुति समारोह, विशाल भंडारा तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के व्यापक प्रबंध किए हैं।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वासदेव ज्ञामलानी चंद्र प्रकाश सोनी योगी जहाजनाथ, योगी विश्वनाथ,मनीष नाथ,हेमंत भोजवानी,श्याम भोजवानी, भरत मंगलानी, घनश्याम खियानी,टीकम लालवानी, जगदीश तोरानी, जयप्रकाश धर्मानी, नरेश लखवानी, लाल मोटवानी, कन्हैया सोनी, चंद्रप्रकाश नाथवाणी, राजेश धनकानी, वासुदेव चंदानी, गुलाब भाई, जय कलवानी, प्रकाश लालवानी, रूपचंद चंदानी, सुरेश, जीतू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

वाइल्डलाइफ एसओएस ने अभी तक 5 लाख से अधिक देशी पौधे लगाकर रचा नया कीर्तिमान

बाबा न्यूज
वाइल्डलाइफ एसओएस ने भारत के विभिन्न पुनर्स्थापना स्थलों पर पिछले 5 वर्षों में 5 लाख से अधिक देशी पौधे रोपित कर संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि संस्था की पारिस्थितिक पुनर्स्थापना, जलवायु संरक्षण तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। देशभर में मनाए जा रहे वन महोत्सव के अवसर पर संस्था इस उपलब्धि के साथ-साथ वृक्षारोपण के माध्यम से क्षतिग्रस्त प्राकृतिक जंगलों के पुनर्जीवन से हो रहे सकारात्मक एवं दीर्घकालिक प्रभावों को रेखांकित कर रही है।

इसके अंतर्गत इसी वर्ष मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में 2,000 से अधिक देशी पौधों का रोपण किया गया। इस अभियान के दौरान जामुन, अनार, अमरूद, शहतूत, इमली, नीम, गूलर तथा कटहल जैसे फलदार एवं देशी वृक्ष लगाए गए, जिन्हें स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करने की क्षमता के आधार पर चुना गया।

यह व्यापक पहल उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एलिफेंट प्रोजेक्ट, कर्नाटक के बनेरघट्टा भालू बचाव केंद्र तथा रामदुर्गा वैली हैबिटेट कंजर्वेशन प्रोजेक्ट जैसे प्रमुख पुनर्स्थापना स्थलों तक फैली हुई है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र स्थित लेपर्ड प्रोजेक्ट तथा जम्मू-कश्मीर में वाइल्डलाइफ एसओएस के विभिन्न परियोजना स्थलों पर भी वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापना के कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य देशी वनस्पतियों के रोपण के माध्यम से क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्जीवित करना है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो, मृदा अपरदन को रोका जा सके, कार्बन अवशोषण को बढ़ावा मिले तथा वन्यजीवों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ प्राकृतिक आवास विकसित किए जा सकें।

इन प्रयासों का सबसे उल्लेखनीय परिणाम कर्नाटक की रामदुर्गा घाटी में देखने को मिला, जहाँ खनन एवं वनों की कटाई से प्रभावित एक बंजर क्षेत्र को व्यापक वृक्षारोपण एवं जंगल पुनर्स्थापना के माध्यम से एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित किया गया। इन प्रयासों से भूजल पुनर्भरण में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे अब गर्मियों के दौरान भी बोरवेल के माध्यम से खेती संभव हो पाई है तथा ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन में कमी आई है।

इसी प्रकार मथुरा स्थित एलिफेंट प्रोजेक्ट के आसपास बड़े पैमाने पर किए गए वृक्षारोपण ने देशी हरित क्षेत्र का विस्तार किया है और जैव विविधता के अनुकूल वातावरण तैयार किया है। इसके परिणामस्वरूप यहाँ जकोबियन कुक्कू, काला तीतर, येलो फुट ग्रीन पिजन, इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, किंगफिशर जैसी अनेक पक्षी प्रजातियों की वापसी देखी गई है। पक्षियों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ इस क्षेत्र में बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड की उपस्थिति भी दर्ज की गई है, जो एक स्वस्थ एवं संतुलित तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा “5 लाख से अधिक पौधे लगाना केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन पारिस्थितिक तंत्रों को पुनर्जीवित करने की हमारी वर्षों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिन पर वन्यजीवों और मानव समुदायों दोनों का भविष्य निर्भर करता है। वर्षों के दौरान हमने क्षतिग्रस्त वनों को पुनर्जीवित होते, वन्यजीव आवासों को फिर से जुड़ते तथा स्थानीय समुदायों को संरक्षण के सक्रिय भागीदार बनते देखा है। लगाया गया प्रत्येक पौधा जैव विविधता और पृथ्वी के अधिक सुरक्षित एवं सुदृढ़ भविष्य में किया गया एक निवेश है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, सफल संरक्षण तभी संभव है जब उससे वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिले। वनों को पुनर्स्थापना और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से हमने वनों पर बढ़ते दबाव को कम करने के साथ-साथ स्थानीय आजीविका को भी सशक्त बनाने का कार्य किया है।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजू राज एम.वी, ने कहा*, देशी वृक्ष केवल हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि वे सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र का पुनर्निर्माण करते हैं। ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, भूजल स्तर को पुनर्भरित करने तथा वन्यजीवों के लिए भोजन और आश्रय उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में पक्षियों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ इस क्षेत्र में बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड की उपस्थिति इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारे संरक्षण प्रयास दीर्घकालिक और सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

वाइल्ड लाइफ एसओएस को प्रतिष्ठित टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड से किया सम्मानित

बाबा न्यूज
आगरा। वाइल्डलाइफ एसओएस को वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग पहलों तथा भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने में उत्कृष्ट योगदान के लिए 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 में सम्मानित किया गया।
रणथंभौर में आयोजित 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 के दौरान वाइल्डलाइफ एसओएस को प्रतिष्ठित टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगठन को वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग पहलों तथा भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में उसके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने संगठन की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया तथा वाइल्डलाइफ एसओएस के एंटी-पोचिंग प्रयासों पर एक प्रस्तुति दी।
5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 में देश-विदेश के प्रमुख संरक्षणविदों, नीति-निमार्ताओं, वन अधिकारियों, शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों तथा वन्यजीव प्रेमियों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की बाघ संरक्षण में उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ अब भी विद्यमान चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने किया। इंटरनेशनल टाइगर वीक कंजर्वेशन अवॉर्ड्स 2026 के अंतर्गत वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग प्रयासों, संरक्षण नेतृत्व, पत्रकारिता, फोटोग्राफी तथा संरक्षण के क्षेत्र में आजीवन योगदान सहित विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित किया गया।
पिछले तीन दशकों से अधिक समय से वाइल्डलाइफ एसओएस अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने तथा बाघ सहित भारत के संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। संगठन की एंटी-पोचिंग इकाई फॉरेस्ट वॉच वन विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वन्यजीव तस्करों तथा अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने, उनके कब्जे से वन्यजीवों की खाल, शरीर के अंग, हाथीदांत तथा और कई मामलों में जीवित वन्यजीवों को भी सुरक्षित बरामद करने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करती है। हमारे प्रयासों से प्रवर्तन एजेंसियों को संगठित शिकार गिरोहों का पदार्फाश करने, घातक जॉ ट्रैप, फंदों तथा अन्य शिकार उपकरणों को बरामद करने और संरक्षित क्षेत्रों में फंदों की तलाश के अभियान संचालित करने में सहायता मिली है। साथ ही, इन प्रयासों ने वन्यजीव अपराधियों के सफल अभियोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें लगभग दो वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद तमिलनाडु में बाघ के शिकार में संलिप्त एक गिरोह को दोषसिद्ध किए जाने जैसा ऐतिहासिक मामला भी शामिल है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित बाघ संरक्षण मंचों में से एक पर प्राप्त यह सम्मान बाघों और उनके प्राकृतिक आवास के दीर्घकालिक संरक्षण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को पुन: स्थापित करता है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा,यह सम्मान हमारी पूरी टीम, वन विभाग में हमारे सहयोगियों तथा उन समुदायों के सामूहिक प्रयासों की पहचान है, जो भारत के बाघों की रक्षा में हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। एंटी-पोचिंग कार्य अक्सर लोगों की नजरों से दूर रहता है। यह दूरस्थ क्षेत्रों में, अंधेरे में और उन लोगों के सहयोग से किया जाता है, जो वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक का जोखिम उठाते हैं। हम यह सम्मान उन सभी की ओर से स्वीकार करते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने कहा, कार्तिक सत्यनारायण द्वारा एंटी-पोचिंग प्रयासों और बाघ संरक्षण पर दिया गया व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक था। इस सत्र ने वन्यजीव अपराधों से जुड़ी जटिल चुनौतियों तथा जन-जागरूकता और संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। इस प्रकार की पहलें वन्यजीव संरक्षण के प्रति व्यापक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। न्यायपालिका भी वन्यजीव अपराधों में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध सशक्त और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई तथा सफल अभियोजन को समर्थन देकर निवारक प्रभाव उत्पन्न करने में योगदान दे सकती है। मैं वाइल्डलाइफ एसओएस और इंटरनेशनल टाइगर वीक के सराहनीय कार्यों की प्रशंसा करता हूँ तथा उनके संरक्षण प्रयासों की निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने आगे कहा,भारत ने संसार चंद और भीमा बावरिया जैसे कुख्यात अपराधियों के नेतृत्व में संचालित संगठित शिकार गिरोहों के कारण बाघों, तेंदुओं, ऊदबिलावों तथा अन्य वन्यजीवों की बड़ी संख्या खोई है। इन अपराधियों का संबंध सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघों और तेंदुओं के गायब होने सहित कई बड़े वन्यजीव अपराधों से रहा है। वाइल्डलाइफ एसओएस की एंटी-पोचिंग इकाई ने समन्वित प्रवर्तन अभियानों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है। इनमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), हरियाणा पुलिस और हरियाणा वन विभाग के साथ संयुक्त रूप से की गई छापेमारी भी शामिल है, जिसके दौरान गुरुग्राम (दिल्ली एनसीआर) में भीमा बावरिया को बाघ के कंकाल, बाघ की खाल, दो कछुओं तथा अन्य अवैध वन्यजीव सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया था। अनेक राज्यों में दोषसिद्ध होने के बावजूद भीमा को लगातार जमानत मिलती रही है और वह आज भी बाघों के अवैध शिकार तथा उनके शरीर के अंगों की तस्करी में संलिप्त है। यह स्थिति खुफिया जानकारी आधारित सतत प्रवर्तन, गैर-सरकारी संगठनों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय, अभियोजन की निरंतर प्रक्रिया तथा जनसामान्य की अधिक सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। भारत के बाघों की सुरक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है और वाइल्डलाइफ एसओएस इस उद्देश्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, भारत में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन यह उपलब्धि अभी भी नाजुक है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अवैध शिकार आज भी बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए अटूट प्रतिबद्धता आवश्यक है। इस सम्मान से हम अत्यंत गौरवान्वित हैं और भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करते रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

विनीत जोशी समिति की सिफारिशों से स्कूली शिक्षा होगी मजबूत

विकसित भारत का होगा रास्ता प्रशस्त : डॉ. सुशील गुप्ता
बाबा न्यूज
आगरा। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विनीत जोशी समिति की ओर से कोचिंग संस्कृति और डमी स्कूलों पर प्रस्तुत की गई सिफारिशों का राष्ट्रीय इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस (निसा) ने स्वागत किया है। निसा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि समिति की रिपोर्ट ने उन चिंताओं को स्वीकार किया है जिन्हें संगठन कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है। यह रिपोर्ट स्कूली शिक्षा को पुन: शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि निसा लंबे समय से डमी स्कूलों, अत्यधिक कोचिंग निर्भरता, अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ तथा विद्यार्थियों पर पड़ रहे दोहरे शैक्षणिक दबाव के खिलाफ संघर्ष करती रही है। इन मुद्दों को लेकर संगठन ने विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन दिए, जनजागरण अभियान चलाए तथा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन भी किए। निसा ने विनीत जोशी समिति को भी विस्तृत सुझाव और सिफारिशें भेजकर इस विषय पर अपना पक्ष मजबूती से रखा था।
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा यह स्वीकार किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कोचिंग संस्कृति की समस्या का समाधान केवल कोचिंग संस्थानों को दंडित करने से नहीं होगा। वास्तविक समाधान स्कूली शिक्षा को इतना सक्षम और प्रासंगिक बनाना है कि विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के लिए स्कूल से बाहर वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े।

समिति ने स्कूल पाठ्यक्रम को जेईई, नीट और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के अनुरूप बनाने, कोचिंग कक्षाओं की अवधि को प्रतिदिन 2 से 3 घंटे तक सीमित करने, उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा को अधिक महत्व देने तथा परीक्षा आधारित दबाव को कम करने के लिए मूल्यांकन प्रणाली में सुधार जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। यदि इन सिफारिशों को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है तो डमी स्कूलों की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और विद्यालय पुन: शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित होंगे।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि आज देश के लाखों विद्यार्थी स्कूल और कोचिंग के दोहरे दबाव में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके कारण न केवल उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी पीछे छूटता जा रहा है। शिक्षा केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच, रचनात्मकता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का साधन है।

उन्होंने कहा कि कोचिंग-प्रधान व्यवस्था ने शिक्षा को बड़े पैमाने पर व्यवसाय में बदल दिया है, जिससे अनेक अभिभावकों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। समिति की सिफारिशों के लागू होने से अभिभावकों को राहत मिलेगी, शिक्षा में समान अवसर बढ़ेंगे तथा विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

निसा का मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की स्कूली शिक्षा मजबूत होगी। एक सशक्त विद्यालय व्यवस्था ही स्वतंत्र चिंतन करने वाले, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले और नवाचार में विश्वास करने वाले नागरिक तैयार कर सकती है। इससे रटंत शिक्षा की संस्कृति कमजोर होगी और बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या-समाधान तथा नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।
राष्ट्रीय इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस (निसा) प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा भारत सरकार से आग्रह करता है कि विनीत जोशी समिति की सिफारिशों को शीघ्र लागू कर उन्हें आवश्यक कानूनी स्वरूप प्रदान किया जाए। इससे करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत मिलेगी, शिक्षा व्यवस्था में संतुलन स्थापित होगा तथा विकसित भारत के निर्माण का मार्ग और अधिक सुगम एवं मजबूत बनेगा।

 

सीए छात्र-छात्राओं ने समारोह में मचाया धमाल

 

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया
बाबा न्यूज
आगरा। सिकासा की ओर से 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के उपलक्ष्य में फतेहाबाद रोड स्थित सिग्नेचर्स रिसॉर्ट में दोपहर में स्थापना दिवस समारोह का आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के सदस्य अजीत सिंह और विशिष्ट अतिथि स्टोनमैन क्राफ्ट इंडिया के प्रबंध निदेशक ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
सिकासा अध्यक्ष सीए अंकित मित्तल ने बताया कि स्थापना दिवस पर नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का सम्मान किया गया। पिछले एक माह में आयोजित प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा पर आधारित हास्य नाटिका रही। इस अवसर पर आगरा शाखा अध्यक्ष सौरभ नारायण सक्सेना, सचिव सीए सचिन बुबना, सचिव, सीए गौरव सिंघल, तनिष्क, प्रियांशी, ईशिका, वैभव, अभिषेक, देव, नमन, आर्यन, हिमांशी, अंशिका आदि मौजूद रही।