कृषि विश्वविद्यालय में ई-ऑफिस की तैयारी तेज:अब एक क्लिक पर आगे बढ़ेंगी फाइलें; कुलपति ने अधिकारियों संग की बैठक
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज में प्रशासनिक व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में जल्द ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू की जाएगी। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ई-ऑफिस प्रणाली से फाइलों के निस्तारण में लगने वाला समय कम होगा और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ई-ऑफिस प्रणाली के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत सभी अनुभागों में फाइलों का आदान-प्रदान डिजिटल माध्यम से होगा। अधिकारी और कर्मचारी फाइलों का परीक्षण, अनुमोदन और अग्रसारण ऑनलाइन कर सकेंगे। इससे फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक पहुंचने में लगने वाले समय में कमी आएगी। ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक फाइल की स्थिति की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी। इससे फाइलों के लंबित रहने, गुम होने या अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह डिजिटल कार्यप्रणाली कागज की खपत कम करेगी और विश्वविद्यालय को पेपरलेस कार्यालय व्यवस्था की ओर अग्रसर करेगी। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार,9 जुलाई 2026 को शाम करीब चार बजे विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने ई-ऑफिस प्रणाली पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित प्रशासन वर्तमान समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय को आधुनिक और कुशल कार्यप्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से ई-ऑफिस लागू किया जा रहा है। कुलपति ने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि इस व्यवस्था का संचालन जल्द शुरू हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि ई-ऑफिस लागू होने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होगी और छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी। ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने के बाद कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। अब फाइलें एक क्लिक पर एक अनुभाग से दूसरे अनुभाग तक पहुंचेंगी। फाइलों की ऑनलाइन ट्रैकिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी। साथ ही, कागज की खपत कम होगी और विश्वविद्यालय पेपरलेस व्यवस्था की ओर अग्रसर होगा।

