परमानंदपुर मिनी-स्टेडियम में दीपोत्सव: खिलाड़ियों ने जलाए 25 हजार दीये:राष्ट्रीय एकता और अखंडता का दिया संदेश, जमकर हुई आतिशबाजी
खेल के मैदान अक्सर जीत और हार के गवाह बनते हैं, लेकिन शनिवार को वाराणसी का एक खेल मैदान राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक एकता और अटूट उत्साह का गवाह बना। वाराणसी के परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में शनिवार शाम को देशभक्ति और आस्था का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला। जिसने हर किसी को भावविभोर कर दिया। यहां विभिन्न खेलों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ियों ने एकजुट होकर ‘राष्ट्र के नाम’ एक भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया। खेल मैदानों पर सजे हजारों दीयों की रोशनी ने ऐसा समां बांधा, मानो आसमान के सारे सितारे परमानंदपुर की धरती पर उतर आए हों। 25 हजार दीपों से जगमगा उठा मिनी स्टेडियम
कार्यक्रम के आयोजक उत्तर प्रदेश हैंडबॉल संघ के उपाध्यक्ष डॉ एके सिंह ने बताया – इस अद्भुत और अनूठे दीपोत्सव कार्यक्रम में हॉकी, हैंडबॉल, रग्बी, टेबल टेनिस, मिक्स्ड मार्शल आर्ट (MMA), जूडो और एथलेटिक्स जैसे विभिन्न खेल विधाओं के लगभग 410 खिलाड़ियों ने शिरकत की। इन युवा खिलाड़ियों ने मिलकर मिनी स्टेडियम के अलग-अलग खेल मैदानों और ट्रैकों को करीब 25 हजार मिट्टी के दीपों और मोमबत्तियों से पूरी तरह रोशन कर दिया। खिलाड़ियों ने बेहद अनुशासित तरीके से दीयों की कतारें सजाईं, जिससे पूरा खेल परिसर रोशनी की चादर में लिपट गया। चारों तरफ फैली इस अलौकिक रोशनी ने उपस्थित जनसमूह के दिलों में राष्ट्रप्रेम का उजियारा भर दिया। आतिशबाजी और आकाशदीपों ने बांधा समां
मैदान पर दीप प्रज्वलित करने के बाद समारोह का रोमांच और बढ़ गया, जब आसमान सतरंगी रोशनी से नहा उठा। खिलाड़ियों और आयोजकों द्वारा की गई भव्य आतिशबाजी ने रात के अंधेरे को रंग-बिरंगे नजारों में बदल दिया। इसके बाद, खिलाड़ियों ने एक साथ सैकड़ों आकाशदीप (लालटेन) को हवा में छोड़ा। जमीन पर दीपों की कतार और आसमान में तैरते आकाशदीपों की बहार ने एक ऐसा जादुई दृश्य पैदा किया, जिसे देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो गए। यह आयोजन केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि खेल की भावना के माध्यम से देश को एक सूत्र में पिरोने का संदेश था। राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सद्भाव का बड़ा संदेश
संयोजक उत्तर प्रदेश हैंडबॉल संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने कहा – इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और खिलाड़ियों के माध्यम से समाज में राष्ट्रप्रेम, अखंडता, एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना को और अधिक मजबूत करना है। खेल हमेशा से लोगों को जोड़ता आया है, और आज देश के इन उभरते खिलाड़ियों ने अपनी खेल भावना को राष्ट्रभक्ति के साथ जोड़कर पूरे देश को एकता का एक अनूठा और मजबूत संदेश दिया है। इस अनोखे दीपोत्सव की चर्चा अब पूरे खेल जगत और स्थानीय क्षेत्र में खूब हो रही है।

