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लाइसेंस-निरस्त होने के बाद भी चल रही नकली पनीर फैक्ट्री:बुलंदशहर में छापे में 10 क्विंटल पनीर बरामद, 200 किलो मावा सीज

बुलंदशहर की खुर्जा तहसील के गांव डाबर में बृहस्पतिवार शाम करीब 5 बजे खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने मिलावटी पनीर बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारा। मेरठ मंडल समेत चार जिलों की टीमों ने अचानक कार्रवाई की। मौके से 10 क्विंटल नकली पनीर, 200 किलो नकली मावा और बड़ी मात्रा में देसी घी व मिल्क क्रीम बरामद की गई। टीम ने पनीर और मावा बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी जब्त कर लिया। 175 टिन रिफाइंड और 38 बोरी मिल्क पाउडर सीज छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने 175 टिन रिफाइंड और 38 बोरी मिल्क पाउडर भी सीज किया। खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इसी कच्चे माल का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर नकली पनीर और मावा तैयार किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री में मौजूद खाद्य सामग्री और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को कब्जे में लिया गया। रिफाइंड और मिल्क पाउडर से बना रहे थे पनीर-मावा मेरठ खाद्य विभाग के एडिशनल कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि फैक्ट्री में रिफाइंड और मिल्क पाउडर के मिश्रण से नकली पनीर और मावा तैयार किया जा रहा था। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा था। विभाग की टीम ने समय रहते कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में मिलावटी खाद्य सामग्री बरामद की है। पहले जांच में नमूने मिले थे असुरक्षित एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि संबंधित दोनों फैक्ट्रियों पर विभाग पहले भी छापेमारी कर चुका है। उस दौरान लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट असुरक्षित (अनसेफ) आई थी। इसके बाद विभाग ने दोनों फैक्ट्रियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। इसके बावजूद कारोबार संचालित होने का मामला सामने आया है। दोबारा जांच के लिए भेजे नमूने लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी फैक्ट्री में उत्पादन कैसे जारी रहा, इसकी भी जांच की जा रही है। खाद्य विभाग ने बरामद खाद्य सामग्री के नमूने दोबारा जांच के लिए भेजे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आलू की बोरी के नीचे दबकर किसान की मौत:संभल में ट्रैक्टर-ट्रिपलर से खेत पर बुवाई के दौरान हादसा हुआ

संभल के बहरामपुर बुजुर्ग गांव में गुरुवार को आलू की बोरी के नीचे दबने से किसान ओमप्रकाश सिंह (45) की मौत हो गई। उन्हें संभल शहर के निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां शाम 5 बजे मृत घोषित कर दिया गया। ट्रैक्टर-ट्रिपलर में आलू की बोरियां लेकर खेत गए थे ओमप्रकाश सिंह, कूड़े सिंह के बेटे थे। उनकी पत्नी रीना देवी ने बताया कि गुरुवार दोपहर 12 बजे वे ट्रैक्टर-ट्रिपलर में आलू की बोरियां लेकर खेत पर बुवाई करने गए थे। करीब 1-2 घंटे बाद परिवार को सूचना मिली कि वे बोरी के नीचे दब गए हैं और गंभीर रूप से घायल हैं। परिजन और ग्रामीण खेत पहुंचे। उन्होंने ओमप्रकाश को बोरी के नीचे से निकाला और संभल शहर के निजी अस्पताल ले गए। उन्हें 3-4 अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार के लोग शव को गांव ले आए।
पोस्टमॉर्टम कराने से परिजनों ने किया मना यह घटना तहसील संभल के नखासा थाना क्षेत्र की है। शाम 5:15 बजे मौत की सूचना मिलने पर हिसामपुर पुलिस चौकी प्रभारी अरुण कुमार पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और जांच की। परिजनों ने कार्रवाई से मना कर दिया। थाना प्रभारी संजय शर्मा ने शाम 6 बजे बताया कि खेत पर संदिग्ध हालात में एक ग्रामीण की मौत की सूचना मिली थी। हिसामपुर चौकी पुलिस को गांव भेजा गया है। पुलिस परिजनों से पोस्टमार्टम कराने को लेकर बात कर रही है, लेकिन परिवार फिलहाल मना कर रहा है। ओमप्रकाश के परिवार में चार बेटियां और दो बेटे हैं। इनमें से दो बेटियों की शादी हो चुकी है।

बाराबंकी में नशामुक्ति जागरूकता बैठक:नुक्कड़ नाटक से किया जागरूक, लोगों को दिलाई नशामुक्ति की शपथ

बाराबंकी में विकासखंड देवा के प्राथमिक विद्यालय पवैया वीरान में पारख महासंघ और मदर फाउंडेशन की ओर से नशामुक्ति जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। इसमें लोगों को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देकर इससे दूर रहने के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान नशे के खिलाफ नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया और उपस्थित लोगों को नशा न करने का संकल्प दिलाया गया। बैठक में वीरांगना ऊदा देवी पासी के शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर 15 नवंबर को लखनऊ के हजरतगंज में आयोजित होने वाली आत्मसम्मान दीप पदयात्रा की जानकारी भी दी गई। लोगों से गांधी प्रतिमा से ऊदा देवी पासी की प्रतिमा तक प्रस्तावित पदयात्रा में अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान राजेंद्र प्रसाद यादव रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अवधेश कुमार वर्मा, प्रीती मिश्रा, रामपाल रावत, अमरीश रावत, शिवराज रावत, हंसराज रावत, रंजीत कुमार, अंकुल कुमार, सूरज यादव, अमित सिंह, अजय कुमार, दीपक रावत, उमेश चंद्र और मनीष राज सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

बदायूं में 11 करोड़ से बने बिजलीघर का लोकार्पण:केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा बोले- सरकार गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम कर रही

बदायूं विधानसभा क्षेत्र के ग्राम अनुगुइया सल्लन नगर में गुरुवार दोपहर करीब 11 करोड़ रुपए की लागत से बने 33/11 केवी बिजलीघर का लोकार्पण किया गया। केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा और सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने फीता काटकर बिजलीघर का उद्घाटन किया। इसके शुरू होने से आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बेहतर होने और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। इस बिजलीघर की क्षमता 2×5 एमवीए है। इसके निर्माण के साथ 33 केवी और 11 केवी की बिजली लाइनें भी बिछाई गई हैं। परियोजना का निर्माण मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की बिजनेस प्लान 2024-25 योजना के तहत कराया गया है। बिजलीघर शुरू होने से मौजूदा बिजली व्यवस्था पर लोड कम होगा। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ किसानों और व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा। केंद्रीय राज्यमंत्री बोले- बिजली किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत है लोकार्पण समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि बिजली किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत है। बेहतर बिजली आपूर्ति से किसानों को खेती, युवाओं को पढ़ाई और व्यापारियों को कारोबार करने में सहूलियत मिलती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए काम कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि बदायूं विधानसभा क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता है। बिजली, सड़क, जल निकासी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बिजलीघर निर्माण के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार जताया। कार्यक्रम में ये लोग मौजूद रहे इस मौके पर जिला महामंत्री एमपी सिंह राजपूत, सोबरन सिंह राजपूत, विश्वजीत गुप्ता, वीरेंद्र राजपूत, अनेकपाल सिंह, अरविंद रावत और नौरंग पाल राजपूत समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

डॉक्टरों के लिए सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई का शासनादेश जारी:10 साल सरकारी अस्पतालों में देनी होगी सेवा, शर्त तोड़ने पर एक करोड़ का बांड

यूपी के प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (PMHS) संवर्ग के डॉक्टर अब सुपर स्पेशियलिटी समेत उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नियम और शर्तें तय कर दी हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया। इसके तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी। शर्त पूरी नहीं करने पर एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा। डिप्टी सीएम ने बताया कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। पीजी डिग्री और डिप्लोमा कर चुके डॉक्टर NEET या समकक्ष प्रवेश परीक्षा के जरिए उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकेंगे। इसके लिए विभाग की अनुमति जरूरी होगी। डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। प्रोबेशन पूरा होने के साथ स्थायीकरण आदेश जारी होना भी जरूरी है। सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक होना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में स्थायीकरण आदेश के बिना भी छूट दी जा सकेगी। दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 45 साल उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय की गई है। इसकी गणना आवेदन वर्ष से पहले के वर्ष की 31 दिसंबर के आधार पर होगी। पहले पीजी डिप्लोमा कर चुके डॉक्टर उसी विशेषज्ञता में डिग्री या दूसरी विशेषज्ञता में NMC से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कर सकेंगे। वहीं, पीजी डिग्री वाले डॉक्टर दूसरे विषय में पीजी डिग्री की पढ़ाई कर सकेंगे। डिग्रियां जमा होंगी, पढ़ाई बीच में छोड़ी तो पांच साल रोक पढ़ाई के लिए जाने वाले डॉक्टरों की MBBS और पीजी डिग्री महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय में जमा रहेंगी। पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने पर अगले पांच साल तक किसी अन्य उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में दाखिले की अनुमति नहीं मिलेगी। तीन से अधिक बार परीक्षा में असफल होने पर दोबारा परीक्षा देने के लिए शासन की मंजूरी लेनी होगी। पढ़ाई पूरी होते ही डॉक्टरों को अपनी पुरानी तैनाती पर वापस कार्यभार संभालना होगा। दो साल अध्ययन अवकाश, एक साल बिना वेतन छुट्टी पहली बार अनुमति लेकर उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम करने वाले डॉक्टरों को दो साल का अध्ययन अवकाश और एक साल का बिना वेतन असाधारण अवकाश मिलेगा। पहले अनुमति लेकर पीजी कर चुके डॉक्टरों को दोबारा पढ़ाई के दौरान बिना वेतन असाधारण अवकाश दिया जाएगा। अवकाश स्वीकृत होने के बाद ही उनकी सेवा नियमित और निरंतर मानी जाएगी। पहले पीजी कर चुके डॉक्टरों को 15 साल सेवा करनी होगी पहले पीजी की पढ़ाई कर चुके डॉक्टरों को दोबारा उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम की अनुमति तभी मिलेगी, जब वे पिछली पढ़ाई के बाद तय 10 साल की अनिवार्य सेवा में कम से कम पांच साल पूरे कर चुके हों। दूसरी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें पहले की बची सेवा और नई सेवा मिलाकर कुल 15 साल सरकारी अस्पतालों में काम करना होगा। पहले की सेवा शर्त तोड़ने पर एक करोड़ रुपये और नई पढ़ाई की शर्त तोड़ने पर अतिरिक्त एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा। इस तरह बांड की कुल राशि दो करोड़ रुपये तक हो सकती है। शासनादेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।