कांवड़ यात्रा और उर्स-ए-रजवी एक साथ:बरेली में सुरक्षा-यातायात व्यवस्था बनी चुनौती
बरेली में अगस्त के दूसरे सप्ताह में दो बड़े धार्मिक आयोजनों के एक साथ होने से प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं। सावन माह में कांवड़ यात्रा के कारण हजारों शिवभक्त शहर से गुजरेंगे, वहीं आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के 108वें उर्स-ए-रजवी में देश-विदेश से लाखों जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। उर्स-ए-रजवी 7 से 9 अगस्त तक आयोजित होगा, जिसमें 9 अगस्त को कुल की रस्म अदा की जाएगी। इसी अवधि में कांवड़ यात्राएं भी चरम पर होंगी। इसके अतिरिक्त, 10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार होने के कारण शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। लगातार इन धार्मिक गतिविधियों के चलते शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ जाएगा। उर्स के दौरान इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान, चौपुला, कुतुबखाना, नावल्टी और दरगाह क्षेत्र में बड़ी संख्या में जायरीन एकत्रित होते हैं। सीबीगंज के मथुरापुर स्थित जामियातुर्रजा में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। चूंकि इन क्षेत्रों से कांवड़ियों की आवाजाही भी होती है, प्रशासन रूट प्लान और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष रणनीति तैयार कर रहा है। दरगाह से जुड़े प्रवक्ता नासिर कुरैशी ने बताया है कि देश-विदेश से आने वाले जायरीन पहले ही अपनी यात्रा की तैयारी कर चुके हैं। कई लोगों ने ट्रेन और हवाई टिकट बुक करा लिए हैं, जबकि विदेशी जायरीन वीजा प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। शहर के होटलों में भी बड़ी संख्या में बुकिंग हो चुकी है। इस बीच, उर्स की अंतिम तारीखों को लेकर दरगाह से जुड़े जिम्मेदारों ने वरिष्ठ उलमा की एक समिति गठित की है। यह समिति अपनी राय दरगाह प्रमुखों को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया है कि दोनों आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात डायवर्जन, पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

