यमुना का जलस्तर घटा, मथुरा में राहत:प्रशासन अलर्ट, बाढ़ से निपटने की तैयारी पूरी
मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर घटने लगा है, जिससे जिला प्रशासन को राहत मिली है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि जिस तेजी से जलस्तर बढ़ा था, उसी गति से अब उसमें कमी आ रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है और प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जिलाधिकारी ने विभिन्न बैराजों से पानी के डिस्चार्ज की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हथनीकुंड और ताजेवाला बैराज से लगभग 15 हजार क्यूसेक, ओखला बैराज से 14 हजार क्यूसेक और मथुरा के गोकुल बैराज से करीब 44 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन यमुना के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। जिलाधिकारी ने पिछले वर्ष आई बाढ़ का जिक्र किया, जो मथुरा के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी बाढ़ थी। उन्होंने बताया कि उस अनुभव के आधार पर इस बार भी व्यापक तैयारियां की गई हैं। प्रशासन ने नाविकों और गोताखोरों से अनुबंध किया है। आवश्यकता पड़ने पर भोजन, पेयजल, राहत किट और शेल्टर होम की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी ने नाविकों से अपील की है कि वे अपनी नावों का पंजीकरण कराएं और नाव में सवार प्रत्येक व्यक्ति को लाइफ जैकेट पहनाना सुनिश्चित करें। यमुना में बढ़ते जलस्तर और जलकुंभी की मौजूदगी के कारण एहतियातन नावों का संचालन फिलहाल रोक दिया गया है। जलस्तर स्थिर होने या घटने के बाद ही स्थिति के अनुसार नाव संचालन फिर से शुरू किया जाएगा। जिलाधिकारी ने एसएसपी के साथ केशी घाट समेत विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन दिनों से छाता, मांट, सदर और महावन के उपजिलाधिकारी निचले इलाकों का स्थलीय जायजा ले रहे हैं। नगला आकोस क्षेत्र पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। केशी घाट पर परिक्रमा के संबंध में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पानी के बीच से नीचे उतरकर परिक्रमा करना पारंपरिक मार्ग नहीं है। ऐसे लोगों को तुरंत रोका गया। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करना प्रशासन के साथ-साथ मीडिया की भी जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने ब्रजवासियों से अपील की है कि वे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखें।

