ताजगंज की जीवंत विरासत अब पहुंचेगी नई पीढ़ी तक

शिक्षकों ने नवाचारपूर्ण शिक्षण में विरासत संरक्षण का लिया संकल्प
यूनेस्को की दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन
बाबा न्यूज
आगरा। यूनेस्को की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम ताजमहल से ताजगंज तक, जीवंत विरासत के माध्यम से एक कबूतर की यात्रा कार्यक्रम का समापन दयालबाग स्थित एक पहल पाठशाला में किया गया। संस्कृति और कला शिक्षा सप्ताह 2026 के अंतर्गत लगभग 50 नगर निगम के स्कुल और निजी स्कुल के शिक्षकों को डीआईवाई. किट (डू इट योरसेल्फ) की कार्यशाला दी गयी।

यूनेस्को दक्षिण एशिया से प्रतिनिधि स्नेहा बोराटे ने बताया कि ताजगंज में ताज महल विश्व विरासत स्थल के चारों ओर फैला एक ऐतिहासिक इलाका है, कारीगरों, शिल्पकारों और स्थानीय परंपराओं की कई पीढ़ियों का घर है। इनमें पच्चीकारी संगमरमर जड़ाई शिल्प भी शामिल है। यूनेस्को का उद्देश्य है कि ताजगंज की जीवंत विरासत बच्चों की अगली पीढ़ी तक पहुँचे, क्योंकि वही इस विरासत के सबसे स्वाभाविक संरक्षक हैं। ताजगंज में यूनेस्को समुदायों को सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्थाओं के केंद्र को स्थापित कर रहा है।

प्रशिक्षक उषा छाबड़ा व पूजा रत्नाकर ने बताया कि दूसरे दिन का मुख्य जोर शिक्षकों के लिए एक परिचय और क्षमता-निर्माण कार्यशाला पर रहा। इसमें शिक्षकों को कक्षा और सामुदायिक परिवेश में विरासत-आधारित शिक्षण पद्धतियों को एकीकृत करने के तरीके सिखाना रहा। शिक्षकों ने कार्यशाला के व्यावहारिक सत्रों में समझा कि डीआईवाई. किट में शामिल गतिविधियाँ किस प्रकार स्थानीय इतिहास, शिल्प और पहचान से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बन सकती हैं। इस अवसर पर शांतनु जादौन, मनीष राय, अंकित खण्डेलवाल, मानस राय, अश्लेष मित्तल, नवीन कुमार, अश्लेष मित्तल, सुरभि कुमारी आदि मौजूद रहे।

 

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