गुरु के मार्गदर्शन से ही शिष्य का व्यक्तित्व निखरता है: प्रो. पूनम सिंह


गुरु के ज्ञान और संस्कारों से ही शिष्य का जीवन सार्थक होता है: प्रो. अनुपम शैरी
बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज पर व्यास जयंती पर गुरू-शिष्य परंपरा की विरासत का किया स्मरण
बाबा न्यूज
आगरा। भारतीय संस्कृति में गुरू केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि शिष्य के जीवन को दिशा देने वाला प्रकाश-पुंज है। गुरु के ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से ही शिष्य का व्यक्तित्व निखरता है। यह विचार श्रीमती बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. पूनम सिंह ने व्यास जयंती के अवसर पर व्यक्त किए।
श्रीमती बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग, भारतीय शिक्षण संस्थान एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में गुरू-शिष्य परंपरा विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना अग्रवाल, मुख्य अतिथि प्रो. पूनम सिंह, डॉ. युधिष्ठिर एवं डॉ. रश्मि तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। मुख्य वक्ता प्रो. पूनम सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा में गुरू-शिष्य संबंध केवल अध्ययन-अध्यापन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह श्रद्धा, अनुशासन, समर्पण और संस्कारों पर आधारित जीवन-परंपरा रही है। महर्षि वेदव्यास ने भारतीय ज्ञान-विज्ञान और साहित्य को समृद्ध करने में अद्वितीय योगदान दिया। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से आज की युवा पीढ़ी को ज्ञान के प्रति समर्पण और जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. अनुपम शैरी ने गुरू-शिष्य परंपरा की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यास जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और गुरु के प्रति श्रद्धा को जीवन में उतारने पर्व है। गुरु के ज्ञान
और संस्कारों से ही शिष्य का जीवन सार्थक होता है।
डॉ. युधिष्ठिर सिंह ने भारतीय शिक्षण मण्डल के ध्येय वाक्य, प्रार्थना आदि पर संस्कृत में प्रकाश डाला। आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. शुभलेश कुमारी ने महाविद्यालय के ध्येय वाक्य से अवगत कराया। बीकॉम की डायरेक्टर डॉ. संतोष गाबा ने आगन्तुकों का स्वागत किया एवं गुरू-शिष्य के सम्बन्ध पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में डॉ. संतोष गाबा, प्रो. शुभलेश कुमारी, प्रो. अनीता रानी, प्रो. किरन सिंह, प्रो. शिखा श्रीधर, प्रो. अनुराधा गुप्ता सहित महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएँ छात्राएँ प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। छात्राओं ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अल्शिफा और चंचल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम ने छात्राओं को भारतीय गुरू-शिष्य परंपरा की समृद्ध विरासत से जुड़ने तथा ज्ञान, संस्कार और अनुशासन को अपने जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।


