डॉक्टरों के लिए सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई का शासनादेश जारी:10 साल सरकारी अस्पतालों में देनी होगी सेवा, शर्त तोड़ने पर एक करोड़ का बांड
यूपी के प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (PMHS) संवर्ग के डॉक्टर अब सुपर स्पेशियलिटी समेत उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नियम और शर्तें तय कर दी हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया। इसके तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को 10 साल तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी। शर्त पूरी नहीं करने पर एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा। डिप्टी सीएम ने बताया कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। पीजी डिग्री और डिप्लोमा कर चुके डॉक्टर NEET या समकक्ष प्रवेश परीक्षा के जरिए उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकेंगे। इसके लिए विभाग की अनुमति जरूरी होगी। डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए। प्रोबेशन पूरा होने के साथ स्थायीकरण आदेश जारी होना भी जरूरी है। सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक होना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में स्थायीकरण आदेश के बिना भी छूट दी जा सकेगी। दाखिले के लिए अधिकतम उम्र 45 साल उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष तय की गई है। इसकी गणना आवेदन वर्ष से पहले के वर्ष की 31 दिसंबर के आधार पर होगी। पहले पीजी डिप्लोमा कर चुके डॉक्टर उसी विशेषज्ञता में डिग्री या दूसरी विशेषज्ञता में NMC से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा कर सकेंगे। वहीं, पीजी डिग्री वाले डॉक्टर दूसरे विषय में पीजी डिग्री की पढ़ाई कर सकेंगे। डिग्रियां जमा होंगी, पढ़ाई बीच में छोड़ी तो पांच साल रोक पढ़ाई के लिए जाने वाले डॉक्टरों की MBBS और पीजी डिग्री महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय में जमा रहेंगी। पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने पर अगले पांच साल तक किसी अन्य उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में दाखिले की अनुमति नहीं मिलेगी। तीन से अधिक बार परीक्षा में असफल होने पर दोबारा परीक्षा देने के लिए शासन की मंजूरी लेनी होगी। पढ़ाई पूरी होते ही डॉक्टरों को अपनी पुरानी तैनाती पर वापस कार्यभार संभालना होगा। दो साल अध्ययन अवकाश, एक साल बिना वेतन छुट्टी पहली बार अनुमति लेकर उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम करने वाले डॉक्टरों को दो साल का अध्ययन अवकाश और एक साल का बिना वेतन असाधारण अवकाश मिलेगा। पहले अनुमति लेकर पीजी कर चुके डॉक्टरों को दोबारा पढ़ाई के दौरान बिना वेतन असाधारण अवकाश दिया जाएगा। अवकाश स्वीकृत होने के बाद ही उनकी सेवा नियमित और निरंतर मानी जाएगी। पहले पीजी कर चुके डॉक्टरों को 15 साल सेवा करनी होगी पहले पीजी की पढ़ाई कर चुके डॉक्टरों को दोबारा उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम की अनुमति तभी मिलेगी, जब वे पिछली पढ़ाई के बाद तय 10 साल की अनिवार्य सेवा में कम से कम पांच साल पूरे कर चुके हों। दूसरी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें पहले की बची सेवा और नई सेवा मिलाकर कुल 15 साल सरकारी अस्पतालों में काम करना होगा। पहले की सेवा शर्त तोड़ने पर एक करोड़ रुपये और नई पढ़ाई की शर्त तोड़ने पर अतिरिक्त एक करोड़ रुपये का बांड भरना होगा। इस तरह बांड की कुल राशि दो करोड़ रुपये तक हो सकती है। शासनादेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

