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आधुनिक तकनीक का उपयोग विवेकपूर्ण,  रचनात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाए : प्रो.एसपी सिंह

 

सेंट जॉन्स कॉलेज में एआई और युवाओं का भविष्य: वरदान या अभिशाप’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित

बाबा न्यूज

आगरा। सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा के वाणिज्य संकाय की कॉमर्स एसोसिएशन द्वारा  “AI for the Future of Youth: A Boon or a Bane” (युवाओं का भविष्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: वरदान या अभिशाप) विषय पर एक विचारोत्तेजक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों में समसामयिक तकनीकी विषयों के प्रति जागरूकता विकसित करने के साथ-साथ उनकी तार्किक क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन, अभिव्यक्ति कौशल एवं आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एस. पी. सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव, उसकी संभावनाओं तथा उससे जुड़ी चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक तकनीक का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब उसका उपयोग विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और रचनात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाए।

कार्यक्रम में वाणिज्य संकाय के वरिष्ठ शिक्षकों एवं विभागाध्यक्षों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर  अखिल गुप्ता (डीन, वाणिज्य संकाय), प्रो. संजीव शर्मा (विभागाध्यक्ष, लेखा एवं विधि), डॉ. रोहित सिन्हा (विभागाध्यक्ष, व्यवसाय प्रशासन), प्रो. राजू थॉमस (विभागाध्यक्ष, अनुप्रयुक्त व्यावसायिक अर्थशास्त्र), डॉ. रचिता शर्मा, डॉ. मैथ्यू बी. सिंह, डॉ. वात्सल्य उपाध्याय तथा डॉ. मीनाक्षी चावला उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया।

प्रतियोगिता के मूल्यांकन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. नीरज ई. यूसेबियस (विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग) तथा डॉ. मधुलिका दास (अंग्रेजी विभाग) ने निर्णायक मंडल के सदस्यों के रूप में निभाई। दोनों निर्णायकों ने प्रतिभागियों के तर्कों, विषयवस्तु की प्रासंगिकता, भाषा एवं संप्रेषण कौशल तथा विचारों की प्रभावशाली प्रस्तुति के आधार पर उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। उनकी शैक्षणिक विशेषज्ञता और निष्पक्ष मूल्यांकन ने प्रतियोगिता की गरिमा को बढ़ाया।

प्रतियोगिता में वाणिज्य संकाय के विभिन्न सेमेस्टरों के लगभग 15 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। उनके तर्कों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, नवाचार, उत्पादकता और व्यावसायिक कार्यप्रणाली में आने वाले सकारात्मक परिवर्तनों के साथ-साथ मानवीय रचनात्मकता, रोजगार की संभावनाओं, नैतिकता तथा तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से संबंधित चिंताएँ भी प्रमुखता से उभरकर सामने आईं।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान, तार्किक विश्लेषण, प्रभावशाली वक्तृत्व कला और विषय की गहरी समझ का परिचय दिया। प्रतिभागियों के विचारों से यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष उभरकर सामने आया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपने आप में न तो पूर्णतः वरदान है और न ही अभिशाप; उसका प्रभाव मुख्यतः इस बात पर निर्भर करता है कि मनुष्य उसका उपयोग किस प्रकार और किन उद्देश्यों के लिए करता है। यदि AI का प्रयोग मानवीय क्षमताओं को सशक्त बनाने, ज्ञान अर्जित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए किया जाए, तो यह युवाओं के भविष्य को नई दिशा प्रदान कर सकता है। वहीं, इसका अनियंत्रित अथवा अनुचित उपयोग अनेक चुनौतियों को जन्म दे सकता है। इस प्रकार प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को तकनीकी प्रगति और मानवीय विवेक के बीच संतुलन स्थापित करने का सार्थक संदेश दिया।

प्रतियोगिता के परिणामों में आकाशत जैन, बी.कॉम. (मेन), तृतीय सेमेस्टर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सुश्री वान्या जैन, बी.कॉम. वोकेशनल, प्रथम सेमेस्टर ने द्वितीय स्थान हासिल किया, जबकि अनुभव सिंह, बी.कॉम. वोकेशनल ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। तीनों विजेताओं ने अपने उत्कृष्ट तर्कों, विषय की समझ तथा प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से प्रतियोगिता में सराहनीय प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर यह रेखांकित किया गया कि वाद-विवाद जैसी शैक्षणिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये गतिविधियाँ न केवल विद्यार्थियों को अपने विचार स्पष्टता एवं आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का अवसर देती हैं, बल्कि उनमें तार्किक दृष्टिकोण, स्वतंत्र चिंतन, दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान, संवाद कौशल और निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास करती हैं। विशेष रूप से वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए ऐसी गतिविधियाँ भविष्य की व्यावसायिक एवं प्रबंधकीय चुनौतियों का सामना करने हेतु आवश्यक विश्लेषणात्मक और संप्रेषण संबंधी दक्षताओं को विकसित करने में सहायक हैं।

कॉमर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा-अध्ययन से आगे बढ़कर समकालीन मुद्दों पर विचार करने, अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने तथा जिम्मेदार और जागरूक नागरिक के रूप में विकसित होने का अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भविष्य की सफलता केवल तकनीक के ज्ञान पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने, मानवीय मूल्यों को बनाए रखने और स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता पर भी आधारित होगी।

कॉमर्स एसोसिएशन, वाणिज्य संकाय, सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा की यह पहल विद्यार्थियों में अकादमिक उत्कृष्टता, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और समग्र व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता का परिचायक रही। कार्यक्रम शिक्षकों के मार्गदर्शन, निर्णायकों के निष्पक्ष मूल्यांकन और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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