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इटावा सफारी पार्क में वन्यजीव संरक्षण दिवस पर प्रतियोगिताएं:31 स्कूलों के छात्रों ने लिया हिस्सा, नेचर वॉक में प्रकृति प्रेमियों ने जाना वन्यजीवन

इटावा सफारी पार्क में वन्यजीव सप्ताह के तीसरे दिन रविवार को वन्यजीव संरक्षण दिवस के रूप में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे आयोजित कार्यक्रम में इटावा जनपद के 31 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने फोटोग्राफी, वीडियो-रील और संरक्षण संदेश प्रस्तुति के जरिए वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। प्रकृति प्रेमियों ने की नेचर वॉक
रविवार सुबह सफारी पार्क में नेचर वॉक का आयोजन किया गया। सोसायटी फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के महासचिव डॉ. राजीव चौहान के नेतृत्व में इटावा के प्रकृति प्रेमियों ने इसमें हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने सफारी क्षेत्र में प्रकृति और वन्यजीवों को करीब से देखा। सारस संरक्षण पर हुई चर्चा
नेचर वॉक के बाद सफारी की मुख्य बिल्डिंग में सारस संरक्षण गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें सारस के संरक्षण, उसके प्राकृतिक आवास और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। फोटोग्राफी में 44 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
वन्यजीव सप्ताह के तहत आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता का विषय ‘मेरी नजरों से प्रकृति’ रखा गया। इसमें 16 विद्यालयों के 44 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने अपने कैमरे के जरिए प्रकृति और वन्यजीवन को अलग-अलग नजरिए से प्रस्तुत किया। वीडियो-रील में दिया वन्यजीव बचाने का संदेश
वीडियो और रील प्रतियोगिता का विषय ‘वन्यजीव बचाएँ-भविष्य बचाएँ’ रखा गया। इसमें 12 विद्यालयों के 27 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने वीडियो और रील के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। संरक्षण संदेश प्रस्तुति में 18 छात्र शामिल
संरक्षण संदेश प्रस्तुति प्रतियोगिता में 7 विद्यालयों के 18 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। सभी प्रतियोगिताएं ओपन कैटेगरी में आयोजित की गईं। प्रतिभागियों को कराया गया सफारी भ्रमण
प्रतियोगिताओं में शामिल विद्यार्थियों के साथ सफारी पार्क पहुंचे अन्य छात्र-छात्राओं को भी सफारी का भ्रमण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वन्यजीवों और प्रकृति को करीब से समझने का अवसर पाया।

संजय निषाद बोले-अगर कोई आपके ऊपर हाथ उठाए:हमारी तरफ से है आदेश; हाथ तोड़कर काट कर फेंक दो, हम तुम्हें जमानत करवा देंगे

सुल्तानपुर में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने रविवार को विवादित बयान दिया। जनसभा में मंच से भाषण देते हुए लगभग 4 बजे डॉ. संजय निषाद ने समर्थकों से कहा, “अगर कोई आपके ऊपर हाथ उठाता है, तो आज के बाद हमारी तरफ से आदेश है… हाथ तोड़कर काट कर फेंक दो, हम तुम्हें जमानत करवा देंगे।” कूरेभार के पटना चौराहे के समीप मैदान में जनसभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा विपक्षी दलों (समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी) पर निशाना साधते हुए नौकरियों के आंकड़े और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अन्य दलों के चुनाव चिन्हों पर बटन दबाने से नौकरियों का लाभ दूसरों को मिला है। समर्थकों को निषाद पार्टी का झंडा घर-घर फहराने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह झंडा ही उनके बच्चों के भविष्य, शिक्षा, सम्मान और सुरक्षा की गारंटी है। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कोई दूसरी पार्टी का नेता उनके मोहल्ले में झंडा लेकर आता है, तो उसका स्वागत करने के बजाय उसे भगाया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक हम दूसरों का झंडा उठाते रहे, तब तक हमारे समाज का शोषण होता रहा और युवाओं की नौकरियों की लूट होती रही। उन्होंने अपने समर्थकों से ‘जय निषाद राज’ का मोटा झंडा उठाने और बेईमानों का झंडा बुलंद न करने की अपील की। हाल ही में गोरखपुर में निषाद समाज के व्यक्ति के साथ हुई मारपीट/अभद्रता के वीडियो का जिक्र करते हुए डॉ. संजय निषाद ने कहा कि सामंती सोच रखने वाले लोग समाज के लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने समाज के मान-सम्मान के लिए हमेशा आगे खड़े रहेंगे और ऐसे गुंडों की जगह केवल जेल की सलाखों के पीछे है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैजाबाद/अयोध्या की घटना में निषाद समाज की बेटी के साथ अत्याचार करने वालों पर विधानसभा में आवाज उठाने के बाद ही सख्त कार्रवाई और बुलडोजर एक्शन हुआ था।

भारतीय सेना से रिटायर हुईं कर्नल सीमा सिंह:स्थायी कमीशन की कानूनी लड़ाई लड़ी, ऑपरेशन सिंदूर में पठानकोट में सेवा दी

यूपी के प्रयागराज की रहने वाली कर्नल सीमा सिंह 1 अक्टूबर 2026 को सैन्य जीवन को अलविदा कह दिया। सैन्य सफर की एक खास बात उनका वह संघर्ष भी रहा, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2006 में हुई थी। कर्नल सीमा सिंह के मुताबिक, उनका यह संघर्ष कभी भी भारतीय सेना या अपने साथी अधिकारियों के खिलाफ नहीं था। कर्नल सीमा सिंह का उद्देश्य उन नीतियों और व्यवस्थाओं में बदलाव की मांग करना था, जिनकी वजह से महिला अधिकारियों को अपने पुरुष समकक्षों के मुकाबले भेदभाव और असमान अवसरों का सामना करना पड़ता था। उनका मानना था कि महिला अधिकारियों को उनकी योग्यता और क्षमता के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि काबिलियत जेंडर की मोहताज नहीं होती। यही सोच उनके लंबे कानूनी संघर्ष का आधार बनी और आगे चलकर महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन तथा कमान से जुड़े अवसरों की बहस में भी महत्वपूर्ण संदर्भ बनी। भारतीय सेना में वर्षों तक सेवा देने के बाद कर्नल सीमा सिंह ने उनकी विदाई केवल एक सैन्य अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्ति नहीं है, बल्कि यह उस लंबे सफर का पड़ाव भी है, जिसमें उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने के साथ महिला अधिकारियों के लिए समान अवसर और स्थायी कमीशन की लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब वर्दी के साथ अधिकारों की लड़ाई भी बनी मिशन कर्नल सीमा सिंह उन महिला अधिकारियों में शामिल रही हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में महिलाओं के करियर से जुड़े अवसरों और स्थायी कमीशन के मुद्दे को लेकर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष की शुरुआत उस दौर में हुई, जब महिला अधिकारियों के लिए करियर की संभावनाएं आज की तुलना में कहीं अधिक सीमित थीं। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने 11 शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को बहाल करने का निर्देश दिया था। इनमें उस समय मेजर रैंक पर रहीं सीमा सिंह भी शामिल थीं। यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के 2010 के स्थायी कमीशन से जुड़े फैसले के खिलाफ सेना की अपील के बीच आगे बढ़ा। सालों की लड़ाई पहुंची सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तक सीमा सिंह और अन्य महिला अधिकारियों ने इस मुद्दे को आगे भी उठाया। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव फरवरी 2020 में आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन और कमान से जुड़े अवसरों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। उस समय की रिपोर्टों में लेफ्टिनेंट कर्नल सीमा सिंह का नाम इस लंबे समय से चल रहे मामले की याचिकाकर्ताओं में शामिल था। फैसले के बाद सीमा सिंह ने इसे सेना में लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन शाखाओं में पात्र महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन के अवसर का रास्ता स्पष्ट किया, जहां महिलाएं पहले से सेवा दे रही थीं। इसके साथ ही महिला अधिकारियों को कमान की जिम्मेदारियों के लिए विचार किए जाने का रास्ता भी मजबूत हुआ। कोर्टरूम से कमांड तक, नेतृत्व की दूसरी तस्वीर सीमा सिंह की भूमिका केवल कानूनी लड़ाई तक सीमित नहीं रही। सेना में अपनी जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने ऑर्डनेंस यूनिट की कमांडिंग ऑफिसर के रूप में सैनिकों और कर्मचारियों का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में यूनिट के प्रदर्शन को लेकर सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में भी उल्लेख किया गया। विदाई श्रद्धांजलि के अनुसार उनकी कमान के दौरान यूनिट को दो प्रशस्तियां मिलीं। इस तरह उनकी सैन्य यात्रा के दो महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं, एक ओर संगठन के भीतर कमान संभालने वाली अधिकारी और दूसरी ओर ऐसी महिला अधिकारियों के समूह का हिस्सा, जिन्होंने संस्थागत बदलाव के लिए कानूनी रास्ता अपनाया। ‘समानता’ की मांग से बदलाव की कहानी तक 2020 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों में उस लंबे संघर्ष का जिक्र किया गया, जिसमें सीमा सिंह और उनकी साथी अधिकारियों ने अपने मामले को आगे बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अपनी सैन्य और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को भी जारी रखा। सीमा सिंह ने यह स्पष्ट किया था कि उनकी मांग पुरुष अधिकारियों के मुकाबले समान अवसर और समानता की थी, न कि संस्था या अपने पुरुष सहकर्मियों के खिलाफ किसी टकराव की। मेजर सीमा सिंह के रूप में स्थायी कमीशन की शुरुआती कानूनी लड़ाई से लेकर कर्नल के पद तक पहुंचने और एक ऑर्डनेंस यूनिट की कमान संभालने तक का उनका सफर उस दौर में महिला अधिकारियों के लिए बदलते अवसरों की भी कहानी कहता है। वर्दी उतरी, लेकिन विरासत कायम रही सेवानिवृत्ति के साथ कर्नल सीमा सिंह अब सेना की सक्रिय सेवा से बाहर हो गई हैं। उनके विदाई संदेशों में साहस, दृढ़ विश्वास, संवेदनशीलता और अपने विचारों के लिए खड़े होने जैसे गुणों का उल्लेख किया गया। उनकी विरासत केवल उन सैनिकों और यूनिट तक सीमित नहीं रहेगी, जिनका उन्होंने नेतृत्व किया, बल्कि भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों और अवसरों से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय के साथ भी उनका नाम जुड़ा रहेगा। उनकी कहानी यह दिखाती है कि सैन्य सेवा की भूमिका केवल मैदान या कमान तक सीमित नहीं होती। कभी नेतृत्व सैनिकों के बीच दिखाई देता है और कभी किसी व्यवस्था में बदलाव के लिए संस्थागत रास्ते पर लगातार आगे बढ़ने के रूप में। कर्नल सीमा सिंह की यात्रा इसी व्यापक नेतृत्व की एक मिसाल के तौर पर याद की जाएगी।

नाले के कीचड़ में मिला प्राइवेट गार्ड का शव:14 दिन पहले छुट्टी पर घर आया था, परिजन ने खेत जाने की बात कही

औरैया के अयाना थाना क्षेत्र में रविवार दोपहर नाले के कीचड़ में 18 साल के गार्ड का शव मिला। शव रहटौली अड्डा के पास मिला। उसके पास मोबाइल और चप्पल पड़ी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर जांच की और साक्ष्य जुटाए। 14 दिन पहले छुट्टी पर आया था घर रहटौली निवासी विनय गुर्जर ने बताया कि उसका छोटा भाई अर्पित उर्फ छोटू पुत्र देवेंद्र सिंह उर्फ गुलु हरियाणा में प्राइवेट गार्ड था। वह करीब 14 दिन पहले छुट्टी पर घर आया था। खेत में जाने की बात कहकर निकला था शनिवार सुबह करीब 11 बजे अर्पित घर से खेत में बाजरे की फसल देखने जाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। रविवार दोपहर करीब तीन बजे विनय मवेशियों को पानी पिलाने नाले पर पहुंचा। वहां उसे कीचड़ में अर्पित का शव पड़ा मिला। परिजन पहुंचे तो पुलिस को दी सूचना विनय ने घर पहुंचकर परिजन को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मां सीतेश, भाई आर्यन, विनय और रिषभ समेत अन्य परिजन मौके पर पहुंचे। सूचना पर अयाना पुलिस भी पहुंच गई और जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह अयाना थाना प्रभारी जयप्रकाश पाल ने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। जांच और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

संभल में मदरसे में निर्माण को लेकर विवाद:धार्मिक स्थल का स्वरूप बदलने का आरोप, पुलिस ने काम रुकवाया

संभल में मदरसे में निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि मदरसे में मस्जिद के रूप में निर्माण कराया जा रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। मामले में मुस्लिम पक्ष के पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। रविवार को सभी का शांतिभंग की आशंका में चालान कर उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय भेज दिया गया। फिलहाल मदरसे/मस्जिद के आसपास दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है चामुंडा और मदरसे की मरम्मत पर बनी थी सहमति
मामला संभल तहसील के ऐंचौड़ा कंबोह थाना क्षेत्र के कुतुबपुर सक्ता गांव का है। गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र कुमार ने बताया कि चामुंडा मंदिर और मदरसे की छत की मरम्मत को लेकर दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनी थी। शुक्रवार को चामुंडा मंदिर का लेंटर डाल दिया गया। इसके बाद शनिवार को मदरसे में निर्माण कार्य शुरू हुआ। आरोप है कि बाउंड्री वॉल की मरम्मत के दौरान वहां मस्जिद के स्वरूप में निर्माण कराया जा रहा था। इसकी जानकारी होने पर विरोध शुरू हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस, निर्माण कार्य रुकवाया
मामले की सूचना शनिवार शाम करीब 7 बजे डायल-112 और थाना पुलिस को दी गई। गांव में बिना अनुमति निर्माण कार्य होने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस ने रात करीब 11 बजे तक पांच लोगों को हिरासत में लेते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। 5 लोगों का शांतिभंग में चालान
थाना प्रभारी मौ. शाह फैसल के अनुसार, नफीस अहमद पुत्र हिद्दन खां, आसकार पुत्र अहमद शाह, रहीश पुत्र शब्बीर शाह, फुरकान पुत्र ताहिर हुसैन और मौ. इरशाद पुत्र सत्तार अहमद को हिरासत में लिया गया था। सभी का शांतिभंग की आशंका में चालान कर उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय संभल भेजा गया है। प्रशासनिक जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
सीओ अमन सिंह ने बताया कि बिना अनुमति धार्मिक स्थल के निर्माण की सूचना मिली थी। पुलिस और राजस्व प्रशासन की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पांच लोगों का न्यायालय के लिए चालान किया गया है। गांव में स्थिति पर नजर रखने के लिए मदरसे/मस्जिद के आसपास दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।