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नगर निगम के कामों और खर्चों का हिसाब होगा ऑनलाइन:19 अक्टूबर को कार्यकारिणी की बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव, बनेगा ट्रांसपेरेंसी पोर्टल

कानपुर नगर निगम के कार्यों पर असंतोष जताते हुए अब एक-एक काम और खर्च का हिसाब ऑनलाइन करने की तैयारी है। सड़क-नाली निर्माण से लेकर टेंडर, ठेकेदार, बजट आवंटन और भुगतान तक की जानकारी जनता को एक क्लिक पर मिल सकेगी। इसके लिए वार्ड-66 के पार्षद और उपसभापति अभिनव शुक्ला ने कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ मिलकर पारदर्शिता पोर्टल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। 19 अक्टूबर को होने वाली नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्ताव रखा जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो नगर निगम के विकास कार्यों और खर्चों की निगरानी करना आम नागरिकों और पार्षदों के लिए आसान हो सकेगा। हर काम और खर्च का हिसाब वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव प्रस्ताव में कहा गया है कि नगर निगम की अलग-अलग निधियों से प्रस्तावित और स्वीकृत कार्यों, वित्तीय मंजूरी, कार्यादेश और वास्तविक खर्चो की जानकारी आम लोगों को आसानी से नहीं मिल पाती है। ऐसे में नगर निगम की वेबसाइट पर एक अलग ‘KNN Budget Works Transparency Portal’ विकसित किया जाना चाहिए। इस पोर्टल के जरिए वार्ड, जोन, विभाग और वित्तीय वर्ष के आधार पर विकास कार्यों की जानकारी देखी और डाउनलोड की जा सकेगी। टेंडर से भुगतान तक का ब्योरा होगा सार्वजनिक प्रस्ताव के मुताबिक, सभी विकास कार्यों को एक विशिष्ट सार्वजनिक ट्रैकिंग आईडी दी जाए। इसके जरिए कार्य की स्थिति, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति, अनुमानित लागत, संबंधित निधि, टेंडर की प्रक्रिया, ठेकेदार का नाम, कार्यादेश और निर्धारित समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही कार्य की वर्तमान प्रगति, स्वीकृत एवं संशोधित लागत, वास्तविक खर्च, भुगतान और लंबित देयकों का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। टेंडर के मामले में प्रकाशन की तारीख, बोली जमा करने की अंतिम तिथि, समय-विस्तार, स्वीकृत दर, सफल निविदादाता और अनुबंध मूल्य जैसी जानकारियां भी वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव है। ई-टेंडर पोर्टल और नगर निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी में किसी तरह का अंतर होने पर उसकी समीक्षा करने की व्यवस्था का भी सुझाव दिया गया है। पुराने कार्यों का हिसाब भी सामने लाने की मांग प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्यों का विवरण पहले चरण में 30 दिन के अंदर वेबसाइट पर प्रकाशित करने की बात कही गई है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कार्यों, टेंडर, कार्यादेश और खर्च का विवरण 60 दिन में सार्वजनिक करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा नगर आयुक्त की अध्यक्षता में अनुपालन निगरानी समिति गठित करने, विभागाध्यक्षों की जवाबदेही तय करने और हर तीन महीने में समीक्षा रिपोर्ट कार्यकारिणी के सामने प्रस्तुत करने का प्रस्ताव है। नागरिकों और पार्षदों के लिए गलत या अधूरी जानकारी की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि गोपनीय आंतरिक टिप्पणियों को सार्वजनिक करना उद्देश्य नहीं है। केवल वही स्वीकृतियां, आदेश और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, जिन्हें लागू कानूनों के तहत साझा किया जा सकता है।

हरदोई में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम:रेहड़ी और खोखे हटाए, दुकानदारों ने कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाया

हरदोई में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के त्योहारों को देखते हुए शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार को नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चले अभियान में नुमाइश चौराहे से डीएम चौराहे के बीच महात्मा गांधी मार्ग पर सड़क किनारे रखी रेहड़ियां और खोखे हटाए गए। कार्रवाई के दौरान हटाया गया सामान नगर पालिका के वाहनों में ले जाया गया। अभियान का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाना है। सड़क किनारे दुकानें लगाने और सामान रखकर रास्ता घेरने से वाहनों के आवागमन में परेशानी होती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाकर रास्ते खाली कराने की कार्रवाई की। दुकानदारों ने भेदभाव का आरोप लगाया कार्रवाई के दौरान स्थानीय दुकानदारों ने अभियान में भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नुमाइश चौराहे से करीब 100 मीटर अंदर एक खोखा हटाया गया। इसके बाद लगभग 10 मीटर की दूरी पर रखा दूसरा खोखा भी नगर पालिका की टीम ने उठा लिया। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि यदि अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, तो मार्ग के अन्य हिस्सों में भी एक समान कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर अतिक्रमण जैसी स्थिति बने रहने के बावजूद वहां कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन के पक्ष का इंतजार त्योहारों के दौरान शहर की प्रमुख सड़कों और बाजारों में यातायात सुचारु रखने के लिए प्रशासन अतिक्रमण हटाने पर जोर दे रहा है। सड़क और फुटपाथ पर रखे सामान को हटाकर आवागमन के लिए जगह खाली कराई जा रही है। वहीं, दुकानदारों ने कार्रवाई में निष्पक्षता बरतने की मांग की है। भेदभाव के आरोपों पर प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया है।

अमरोहा में ओवरलोड ई-रिक्शा देख डीएम रुके:4 स्कूली वाहनों पर 79 हजार का जुर्माना, FIR के निर्देश

अमरोहा में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने स्कूली बच्चों को ओवरलोड ले जा रहे वाहनों पर कार्रवाई की है। जोया मार्ग पर उन्होंने एक ई-रिक्शा में क्षमता से ज्यादा बच्चे देखकर अपना काफिला रुकवाया। मंगलवार दोपहर तीन बजे निरीक्षण से लौटते समय कचहरी मोड़ के पास यह घटना हुई। ई-रिक्शा में बच्चों को ज्यादा भरा देखकर डीएम ने नाराजगी जताई और मौके पर ही जांच शुरू कराई। डीएम ने वहां से गुजर रहे अन्य स्कूली वाहनों को भी चेक कराया। जांच में एक टाटा मैजिक, एक फोर्स क्रूजर और दो बैटरी ई-रिक्शा समेत कुल चार वाहनों में गड़बड़ी मिली। परिवहन विभाग ने इन चारों वाहनों पर 79 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जिलाधिकारी ने चारों वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्र, एसडीएम, एआरटीओ मनोज कुमार मिश्रा और यात्री/मालकर अधिकारी सुधीर कुमार सिंह भी मौजूद रहे। परिवहन विभाग ने बताया कि चेकिंग अभियान जारी रहेगा।

बदायूं में ग्राम प्रधान को दो गोलियां मारीं, हालत गंभीर:दुकान से घर लौटते समय हमलावरों ने की फायरिंग, बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती

बदायूं के वजीरगंज थाना क्षेत्र के उदयपुर गांव में मंगलवार शाम करीब 5 बजे ग्राम प्रधान इस्लामउद्दीन को बदमाशों ने गोली मार दी। उन्हें दो गोलियां लगी हैं। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। परिवार के लोग उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। फिलहाल, उनका बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस्लामउद्दीन की कस्बा बगरैन में बिल्डिंग मटेरियल की दुकान है। मंगलवार शाम वह दुकान से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में घात लगाकर बैठे अज्ञात हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। पुलिस कर रही जांच घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। एसएचओ अश्वनी कुमार ने बताया कि अभी तक मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस हमलावरों की पहचान करने और घटना के कारण का पता लगाने में जुटी है।

संभल में सरकारी जमीन की पैमाइश, हटाया गया कब्जा:छह लेखपालों की टीम ने की जांच, पुलिस बल की रही तैनाती

संभल के नखासा थाना क्षेत्र के कसेरूआ गांव में सरकारी जमीन को लेकर शिकायत मिलने के बाद मंगलवार शाम राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की। कानूनगो के नेतृत्व में छह लेखपालों की टीम ने मौके पर पहुंचकर गाटा संख्या 330, 119, 219, 220 और 221 की नापजोख की। इस दौरान गाटा संख्या 330 पर कब्जा मिलने के बाद संबंधित भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। जानकारी के अनुसार, गांव में सरकारी जमीन पर खाद के गड्ढों और अन्य भूमि को लेकर मुस्लिम पक्ष की ओर से संभल तहसील में शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ताओं में इस्लाम, इसरार और अनस मलिक समेत आठ लोगों के नाम बताए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग ने जांच और पैमाइश के लिए टीम गठित की। टीम ने संबंधित गाटा संख्याओं की जांच के साथ कुछ मकानों की भी नापजोख की। कुछ स्थान खाली पाए गए। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि गांव में मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया गया, जिसके बाद उन्होंने सरकारी जमीन से संबंधित शिकायत प्रशासन से की। वहीं, हिंदू पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मस्जिद निर्माण नहीं होने देने के मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की स्थिति की जांच की। कार्रवाई के दौरान नखासा थाना प्रभारी संजय शर्मा और हिसामपुर चौकी प्रभारी अरुण चौधरी सहित पुलिसकर्मी मौजूद रहे। गांव के प्रमुख चौराहों पर भी पुलिस तैनात की गई, ताकि किसी तरह का विवाद न हो और शांति व्यवस्था बनी रहे। राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश पूरी करने के बाद रिपोर्ट तैयार की है। इसे तहसील अधिकारियों को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरकारी जमीन से संबंधित शिकायत पर प्रशासन ने कार्रवाई पूरी कर ली है।