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हवा का रुख बदला तो टूटने लगीं ‘शाखाएं’…:राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति के इस्तीफे पर अखिलेश का तंज

राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम के अचानक इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कार्यकाल पूरा होने से ठीक एक साल पहले हुई इस विदाई पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर करारा प्रहार किया है। अखिलेश यादव ने अपनी शैली में तंज कसते हुए लिखा- “हवा का रुख़ बदला तो रूठने लगीं… अब तो ‘शाखा’ से टहनियाँ टूटने लगीं… अब आपस की बात है हम क्या बोलें…” दीक्षांत समारोह से शुरू हुई थी ‘उल्टी गिनती’ प्रोफेसर सत्यकाम ने 7 जून 2024 को विश्वविद्यालय के 16वें कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था। हालांकि, राजभवन के साथ उनके रिश्ते पिछले कुछ महीनों से तनावपूर्ण चल रहे थे। 17 जुलाई को आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शामिल होने पहुंची थीं। समारोह से पहले उन्होंने कई केंद्रों की जांच कराई थी, जिसमें मानक के विपरीत शिक्षण व्यवस्था पाई गई। इसी नाराजगी के चलते राज्यपाल ने मंच पर कुलपति को अपनी बगल की कुर्सी से हटाकर मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के पास बैठा दिया था। तभी से तय माना जा रहा था कि उनकी कुर्सी कभी भी जा सकती है। 12 अगस्त को हो गया इस्तीफा बुधवार (12 अगस्त) को अचानक राजभवन से बुलावा आने पर वह लखनऊ पहुंचे, जहाँ उनसे इस्तीफा ले लिया गया। गुरुवार (13 अगस्त) दोपहर को उनका इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने शिक्षकों के साथ अंतिम बैठक की और शुक्रवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए। अब राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सीबीआई जांच का असर इस सियासी और प्रशासनिक उथल-पुथल के पीछे व्यापक वित्तीय गड़बड़ियों के चर्चे भी जोरों पर हैं। विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों पर 7.37 करोड़ रुपये की अनियमितता का गंभीर आरोप है। इसकी सीबीआई जांच चल रही है। आरोप है कि संदिग्ध लोगों को ही महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया गया था और राजभवन के निर्देशों के बाद भी उन्हें हटाया नहीं गया।

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