डीईआई में मात्रात्मक डेटा विश्लेषण पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ
बाबा न्यूज
आगरा। एसोसिएशन आॅफ इंडियन यूनिवर्सिटीज-दयालबाग शिक्षण संस्थान- एकेडमिक एंड एडमिनिस्ट्रेटिव डेवलपमेंट सेंटर (एआईयू-डीईआई-एएडीसी) के तत्वावधान में मात्रात्मक डेटा विश्लेषण पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ दयालबाग शिक्षण संस्थान में हुआ। कार्यशाला में लगभग 119 शिक्षक एवं शोधकर्ता प्रतिभागिता कर रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को समकालीन मात्रात्मक शोध पद्धतियों की व्यापक समझ प्रदान करने के साथ-साथ उनके विश्लेषणात्मक एवं शोध कौशल को सुदृढ़ करना है। कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विभिन्न आधुनिक मात्रात्मक तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कार्यशाला का उद्घाटन प्रो. सी. पटवर्धन, निदेशक, डीईआई ने किया। उद्घाटन संबोधन में उन्होंने वर्तमान समय में उपलब्ध डेटा की प्रचुरता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज चुनौती केवल डेटा की उपलब्धता नहीं, बल्कि सार्थक निष्कर्षों और तकनीकी शब्दाडंबर के बीच अंतर करने की क्षमता विकसित करना है। डेटा की तीव्र वृद्धि, कम्प्यूटेशनल तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती क्षमताओं के संदर्भ में उन्होंने ऐसे विशेषज्ञों की आवश्यकता पर बल दिया, जो डेटा को सार्थक ज्ञान और प्रभावी कार्यवाही में परिवर्तित कर सकें। कार्यशाला की संयोजक डॉ. पूर्णिमा भटनागर ने कार्यशाला का परिचय देते हुए इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों एवं शोधकतार्ओं की विश्लेषणात्मक एवं शोध क्षमताओं को विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पमी दुआ, पूर्व निदेशक, दिल्ली स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स तथा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की अंशकालिक सदस्य ने ह्लमात्रात्मक डेटा विश्लेषण और अर्थमिति: अल्केमी या विज्ञान? विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने मात्रात्मक डेटा विश्लेषण एवं अर्थमिति में मॉडल निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। डेविड हेंड्री के अर्थमिति के तीन स्वर्णिम नियमों—परीक्षण करें, परीक्षण करें, परीक्षण करें —का उल्लेख करते हुए उन्होंने मॉडल निर्माण के विभिन्न चरणों में कठोर परीक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि स्वचालन को शोधकर्ता की अंतर्दृष्टि एवं विवेक का स्थान नहीं लेना चाहिए।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. रूपाली सत्संगी ने की। धन्यवाद ज्ञापन में डॉ. रेशम चोपड़ा, कार्यशाला सह-संयोजक, ने प्रतिभागियों से आगामी तकनीकी सत्रों में सक्रिय सहभागिता करने तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के अनुभव एवं विशेषज्ञता का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में डॉ. अनुराग मूर्ति नारदेला, मैनिटोबा यूनिवर्सिटी, कनाडा; प्रो. सी. गणेशकुमार, हैदराबाद यूनिवर्सिटी; प्रो. पुष्पेंद्र कुमार एवं डॉ. दिव्या तुटेजा, दिल्ली यूनिवर्सिटी; प्रो. विनीता सिंह, डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी तथा डॉ. अगम प्रसाद त्यागी, डीईआई अपने व्याख्यान एवं तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे।
प्रो. ज्योति गोगिया, नोडल आॅफिसर, (एआईयू-डीईआई-एएडीसी, ने कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को समकालीन मात्रात्मक विश्लेषण तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा तथा डेटा-आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए उनकी क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

