मैनपुरी में श्रुत पंचमी पर जिनवाणी यात्रा, महामंडल विधान:श्रद्धालुओं ने अर्घ्य चढ़ाए, मां जिनवाणी को नवीन पालने में विराजमान किया

मैनपुरी के कुरावली नगर स्थित जैन मंदिर में शुक्रवार को श्रुत पंचमी पर्व मनाया गया। इस अवसर पर जिनवाणी यात्रा और श्रुत पंचमी महामंडल विधान का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों की संख्या में जैन समाज के महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। नगर में जिनवाणी के जयकारे और धार्मिक भजन गूंजते रहे। कार्यक्रम की शुरुआत जिनवाणी यात्रा से हुई। श्रद्धालु सिर पर जिनवाणी को विराजमान कर चल रहे थे और जैन धर्म के जयघोष कर रहे थे। यह यात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार, जीटी रोड और विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई राठौर धर्मशाला के निकट स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ मां जिनवाणी को स्थापित किया। इसके बाद संगीतमय श्रुत स्कंध महामंडल विधान का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने जिनवाणी को अर्घ्य समर्पित किए। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा। जैन धर्म में श्रुत पंचमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन आचार्य भूतबलि और आचार्य पुष्पदंत ने जैन धर्म के महत्वपूर्ण षट्खंडागम ग्रंथ को पहली बार लिपिबद्ध किया था। इस कारण यह दिन जैन समाज में ‘जिनवाणी दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है। महामंडल विधान के दौरान महिलाओं ने मंडप पर चार मंगल कलश और एक मुख्य कलश की स्थापना की। इसके बाद द्वादशांग जिनवाणी को नवनिर्मित पालने में विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस आयोजन में जैन शिक्षण शिविर में अध्ययनरत बच्चों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम में संजय जैन, वीरेंद्र जैन, संदीप जैन, विश्व प्रकाश जैन, सुधांशु जैन, रूपेश जैन, मधु जैन, सीमा जैन, ललित जैन, नीलम जैन, ज्योति जैन, निधि जैन, प्रियंका जैन, आरोही जैन सहित सैकड़ों महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।

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