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जानवरों के शोषण में शामिल समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका सृजित हो : सत्यवीर सिंह  

 

वन्यजीव अपराध और ज़ब्ती पर वाइल्डलाइफ एसओएस में कार्यशाला का आयोजन 

बाबा न्यूज 

आगरा। वाइल्डलाइफ एसओएस ने न्यायपालिका, उत्तर प्रदेश वन विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से मथुरा स्थित हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में वन्यजीव अपराध और वन्यजीव अपराध से प्राप्त आय की जब्ती पर तीसरी कार्यशाला का आयोजन किया।

वन विभाग, न्यायपालिका, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के ज्ञान, जांच क्षमताओं और अंतर-एजेंसी समन्वय को बढ़ाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जो वन्यजीव अपराध से निपटने में लगे हुए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को खत्म करने और अभियोजन परिणामों में सुधार करने के लिए कानूनी और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना था।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह द्वारा आगरा और मथुरा मंडलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, आगरा जोन के जिला वन अधिकारी और मथुरा जोन के जिला वन अधिकारी की उपस्थिति में कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया गया।

इस कार्यशाला में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण द्वारा भारत भर में वाइल्डलाइफ एसओएस के क्षेत्रीय अभियानों से संबंधित प्रमुख केस स्टडी पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इनमें प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक दीपक चौहान, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार शुक्ला, चंडीगढ़ स्थित पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के विशेष अभियोजक करमबीर सिंह नलवा, ज्योति सागर एंड एसोसिएट के पार्टनर कुमार किसलय, नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के विशेष अभियोजक विनय कुमार ओझा और कानूनी पत्रकार तरुण नांगिया भी शामिल थे। कार्यशाला में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के  न्यायाधीश सत्यवीर सिंह  वन्यजीव संरक्षण के लिए तीन दशकों की समर्पित सेवा के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि पुनर्वास, जागरूकता और मार्गदर्शन अक्सर दंड की तुलना में अधिक सार्थक और स्थायी परिवर्तन लाते हैं। जानवरों के शोषण में शामिल समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका सृजित करते हुए उनको बचाने के संस्था के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच गहरे संबंध और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के दायित्व पर प्रकाश डाला। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को उद्धृत करते हुए, उन्होंने कहा कि “किसी राष्ट्र का न्याय उसके गरीबी में रहने वाले नागरिकों द्वारा महसूस की जाने वाली सुरक्षा की भावना में निहित है।” हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में एक नेत्रहीन हथनी की दयनीय स्थिति को याद करते हुए, उन्होंने जानवरों के प्रति सहानुभूति और करुणा की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. बी. आर. अंबेडकर और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों का आह्वान करते हुए, उन्होंने जाति और सामाजिक विभाजनों से मुक्त समाज का आह्वान किया और पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के इस कथन का हवाला दिया कि अधिकार तभी सार्थक होते हैं जब लोग उनके प्रति जागरूक हों। उन्होंने वाइल्डलाइफ एसओएस को करुणा, पुनर्वास, जागरूकता निर्माण और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के एक आदर्श के रूप में मान्यता देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “न्यायपालिका, प्रवर्तन एजेंसियों और संरक्षण एक्सपर्ट्स को एक साथ लाकर, इस कार्यशाला का उद्देश्य भारत की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा करते हुए वन्यजीव अपराधों की जांच, अभियोजन और रोकथाम के लिए आवश्यक सामूहिक क्षमता को मजबूत करना है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा*, “संरक्षण तभी सफल होता है जब संस्थाएं मिलकर काम करती हैं। इस कार्यशाला जैसी क्षमता निर्माण पहल वन्यजीव कानूनों, जांच प्रक्रियाओं और अभियोजन रणनीतियों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करती हैं, जिससे अंततः वन्यजीवों की अधिक प्रभावी सुरक्षा में योगदान मिलता है।”

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री सत्य नारायण वशिष्ठ ने समापन भाषण दिया और वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स श्री बैजू राज एम.वी. ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

शिक्षक, छात्र-छात्राएं प्रकृति संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं: प्रो.सीके गौतम 

 

विश्व पर्यावरण दिवस पर आगरा कॉलेज में विविध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया 

बाबा न्यूज 

आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आगरा कॉलेज, आगरा में संस्थान नवाचार परिषद (IIC) एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से विविध जागरूकता कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में एक विशेष “सिग्नेचर वॉल” स्थापित की गई, जिस पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम, उप-प्राचार्य प्रो. पी. बी. झा, शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। यह सिग्नेचर वॉल प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक जागरूकता एवं उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक बनी।

कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं द्वारा सीड बॉल (Seed Ball) निर्माण गतिविधि का आयोजन किया गया। इस अभिनव गतिविधि के माध्यम से हरित क्षेत्र में वृद्धि, जैव विविधता संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन का संदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया तथा स्वच्छता अभियान चलाकर परिसर की व्यापक सफाई की गई। इन गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण का संदेश समाज तक पहुंचाया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम एवं उप-प्राचार्य प्रो. पी. बी. झा ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों से प्रकृति संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान नवाचार परिषद (IIC) के संकाय एवं छात्र सदस्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) समिति के कार्यक्रम अधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना तथा समाज को स्वच्छ, हरित एवं सतत् विकास की दिशा में प्रेरित करना था।

 

विश्वविद्यालय में नहीं हो रही कर्मचारियों की मांगो पर कोई सुनवाई :अखिलेश चौधरी

 

विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ का धरना शुरू, लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी

बाबा न्यूज 

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर  धरना शुरू कर दिया है। कर्मचारी संघ का कहना है कि लंबे समय से कर्मचारियों की महत्वपूर्ण मांगों का समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए विवश होना पड़ा।

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने बताया कि धरने पर बैठे कर्मचारियों की प्रमुख मांगे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की प्रोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करना, पात्र तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को एसीपी का लाभ प्रदान करना, प्रोन्नत कर्मचारियों को एक वेतन वृद्धि देना, अवशेष संविदा कर्मचारियों को स्थायी करना, कर्मचारियों के हित में अधिक ब्याज दर उपलब्ध कराने वाले बैंक की स्थापना तथा शासनादेश के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पदनाम प्रदान करना शामिल है।

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने चेतावनी दी है कि मांगों के समाधान तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से वार्ता कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।

धरने में बैठने वालों में अध्यक्ष अखिलेश चौधरी, उपाध्यक्ष निखिल शर्मा, से मंत्री कुलदीप यादव, डॉ संतोष यादव, राजेश भटनागर, रीनेश शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, संजय चौहान सौरभ शर्मा आदि लोग थे।