संतकबीरनगर में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर तिरंगा यात्रा:शिक्षकों-कर्मचारियों ने निजीकरण और टीईटी अनिवार्यता का भी किया विरोध
संतकबीरनगर में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों ने शुक्रवार को तिरंगा यात्रा निकाली। अटेवा (ऑल टीचर्स एम्प्लॉईज वेलफेयर एसोसिएशन) के बैनर तले यह यात्रा मेंहदावल बाईपास से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। यह यात्रा शाम 5:30 बजे जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद के प्रांगण से प्रारंभ हुई और जिलाधिकारी कार्यालय पर समाप्त हुई। इस दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, निजीकरण का विरोध करने और पुराने शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से मुक्त करने की प्रमुख मांगें उठाईं। तिरंगा यात्रा में शामिल शिक्षकों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अटेवा के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार चौहान ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली अटेवा का मुख्य संकल्प है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती, तब तक संगठन का संघर्ष जारी रहेगा। मंडलीय मंत्री डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि शिक्षक-कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली और अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए अटेवा एक मजबूत विकल्प है। उन्होंने उल्लेख किया कि अटेवा के संघर्षों के परिणामस्वरूप कई राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल की गई है और पूरे देश में इसके लागू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अटेवा के जिला महामंत्री ने निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में निजीकरण की व्यवस्था लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने तर्क दिया कि निजीकरण युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर प्रदान नहीं कर सकता, जिससे देश से प्रतिभा पलायन को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के निजीकरण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि जनता को ये सुविधाएं निजी संस्थानों से ही लेनी हैं, तो सरकार जनता से भारी-भरकम टैक्स क्यों वसूल रही है। उन्होंने पुराने शिक्षकों पर संवैधानिक तरीके से थोपी गई टीईटी की अनिवार्यता का भी विरोध किया। इस यात्रा में राजेश कुमार मौर्य, शबाना खान, अर्चना मौर्य, अजय सरकार, हिमांशु पांडेय, राकेश यादव, विवेकानंद, अमरेश चौधरी, नवीन त्रिपाठी, सूरज कुमार, मानसिंह यादव, उदयराज यादव, प्रवीन कुमार सिंह, प्रमोद कुमार यादव, राजेश पांडेय, संत कुमार चौधरी, केसरी लाल, कन्हैया लाल, संजय शर्मा और रेनू अग्रहरि सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी शामिल रहे।

