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कानपुर में जुटेंगे देश-दुनिया के 300 से ज्यादा हार्ट स्पेशलिस्ट:22-23 अगस्त को कार्डियोलॉजी समिट, नई तकनीक और इलाज पर होगा मंथन

कानपुर में दिल के मरीजों के इलाज को और बेहतर बनाने के लिए देश-दुनिया के 300 से ज्यादा हृदय रोग विशेषज्ञ जुटेंगे। 22 और 23 अगस्त को किंग्सटन रिसॉर्ट में ‘कानपुर कार्डियोलॉजी समिट 2026 (KCS 2.0)’ का आयोजन होगा। दो दिन तक विशेषज्ञ दिल की बीमारियों के नए इलाज, तकनीक और रिसर्च पर चर्चा करेंगे। आयोजन को लेकर आईएमए हॉल में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। कार्डियो मेटाबोलिक सोसाइटी के तत्वावधान में होने वाले इस समिट में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ, डॉ. नकुल सिन्हा और डॉ. पीके गोयल समेत देश-विदेश के कई विशेषज्ञ शामिल होंगे। नई रिसर्च और एडवांस इलाज पर चर्चा समिट के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि सम्मेलन में दिल की बीमारियों से जुड़े नवीनतम शोध, एडवांस ट्रीटमेंट और आधुनिक तकनीकों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ अपने अनुभव और नई मेडिकल तकनीकों की जानकारी साझा करेंगे। तकनीकी सत्रों में प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, क्लिनिकल कार्डियोलॉजी, कार्डियक इमेजिंग, हार्ट फेल्योर, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी और स्ट्रक्चरल व इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी जैसे विषयों पर मंथन होगा। स्थानीय डॉक्टरों को मिलेगी नई तकनीक की जानकारी डॉ. अमित कुमार ने बताया कि कार्डियोलॉजी में लगातार नई तकनीक और इलाज के तरीके सामने आ रहे हैं। ऐसे में कानपुर और आसपास के डॉक्टरों के लिए यह समिट काफी उपयोगी रहेगा। विशेषज्ञ जटिल केस, आधुनिक उपकरणों और इलाज की नई तकनीकों पर सीधे संवाद करेंगे। इससे स्थानीय डॉक्टरों को अपनी जानकारी अपडेट करने का मौका मिलेगा। इसका फायदा आगे मरीजों को बेहतर इलाज के रूप में मिलने की उम्मीद है। वैज्ञानिक चर्चा पर रहेगा जोर आयोजकों के मुताबिक दो दिन के सम्मेलन में ज्यादा समय वैज्ञानिक चर्चा और नई रिसर्च के आदान-प्रदान को दिया जाएगा। उद्देश्य स्थानीय स्तर पर हृदय रोगों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईएमए कानपुर अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, मानद सचिव डॉ. शालिनी मोहन, कॉन्फ्रेंस चेयरपर्सन डॉ. मोहम्मद अहमद, सेक्रेटरी डॉ. अमित कुमार और डॉ. अभिनीत गुप्ता मौजूद रहे।

मवेशियों की दवाओं से मरे करोड़ों गिद्ध:कानपुर में वाइल्डलाइफ साइंटिस्ट बोलीं-डाइक्लोफेनाक और एसीक्लोफेनाक घातक

कभी आसमान में करोड़ों की संख्या में नजर आने वाले गिद्ध यानी जटायु अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके हैं। मवेशियों को दी जाने वाली कुछ पेनकिलर दवाएं इनके लिए जानलेवा साबित हुईं। डाइक्लोफेनाक, एसीक्लोफेनाक और कीटोप्रोफेन जैसी दवाओं से दूषित मवेशियों के शव खाने के बाद गिद्धों की संख्या तेजी से घट गई। स्थिति यह है कि अब इन्हें ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ (अति गंभीर रूप से संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) की वाइल्डलाइफ साइंटिस्ट अलका दुबे के मुताबिक, गिद्धों के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। ब्रीडिंग सेंटरों में 700 से 800 गिद्धों का पालन-पोषण किया जा रहा है। इन्हें सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने के लिए 100 किलोमीटर के दायरे में वल्चर सेफ जोन (गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्र) तैयार किए जा रहे हैं। 100 किमी के दायरे में दवाओं पर रोक अलका दुबे पिछले 17 वर्षों से जटायु संरक्षण पर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ गिद्धों को ब्रीडिंग सेंटर में बचाना पर्याप्त नहीं है। जंगल में छोड़ने के बाद भी उन्हें सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है। इसके लिए 100 किलोमीटर के दायरे में प्रतिबंधित पेनकिलर दवाओं के इस्तेमाल पर रोक सुनिश्चित की जाएगी। गिद्धों के घोंसलों और प्राकृतिक आवास के आसपास मानवीय दखल भी कम किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध बेहद शर्मीले पक्षी हैं और इनके प्रजनन के लिए शांत वातावरण जरूरी है। तराई के 18 जिलों में बेहतर स्थिति देशभर में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई है। हालांकि उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के 18 जिलों में स्थिति कुछ बेहतर बताई जा रही है। बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, महाराजगंज और गोरखपुर समेत इन क्षेत्रों में ऊंचे पेड़ों के कारण गिद्धों का प्राकृतिक आवास अपेक्षाकृत सुरक्षित है। इन इलाकों में गिद्धों की सर्वाइवल रेट करीब 3 से 4 प्रतिशत तक देखी गई है। 5 सितंबर को कानपुर जू में जागरूकता अभियान जटायु संरक्षण को लेकर लोगों और युवाओं को जागरूक करने के लिए 5 सितंबर को कानपुर प्राणि उद्यान में विशेष अवेयरनेस कैंप लगाया जाएगा। इसमें पर्यटकों, कॉलेज छात्रों और फॉरेस्ट ट्रेनीज को शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम में पीपीटी प्रेजेंटेशन, रिसर्च मटेरियल और क्विज प्रतियोगिता के जरिए गिद्धों के संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्धों को बचाने के लिए दवाओं के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। सुरक्षित वातावरण मिलने पर ही जटायु की आबादी को दोबारा बढ़ाया जा सकेगा।

गोरखपुर भाजपा की नई टीम में बड़ा फेरबदल:17 नए चेहरों की एंट्री, 4 पुराने पर भरोसा जताया

गोरखपुर महानगर भाजपा की ओर से जारी नई जिला कार्यसमिति में इस बार बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। पिछली कार्यसमिति के मुकाबले नई टीम में करीब 81 प्रतिशत कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि केवल 19 प्रतिशत पुराने पदाधिकारी ही अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं। जिला अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता की ओर से जारी सूची में कुल 21 पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें 8 जिला उपाध्यक्ष, 3 जिला महामंत्री, 8 जिला मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और एक कार्यालय मंत्री शामिल हैं। पार्टी ने नई टीम में ऐसे कार्यकर्ताओं को भी जगह दी है, जो लंबे समय से संगठन के अलग-अलग स्तरों पर काम करते रहे हैं। माना जा रहा है कि नई टीम के जरिए भाजपा बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देने की कोशिश कर रही है। चार पुराने चेहरों पर फिर जताया भरोसा नई कार्यसमिति में पार्टी ने चार पुराने पदाधिकारियों को दोबारा जिम्मेदारी दी है। वहीं, 17 कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें कई ऐसे चेहरे हैं, जो पहले मंडल, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, महिला मोर्चा और अन्य संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। अब जानिए किसको क्या जिम्मेदारी मिली वरुण चौरसिया- जिला उपाध्यक्ष वरुण चौरसिया लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए हैं। पार्टी में लगातार सक्रिय रहने और संगठन के लिए काम करने के कारण उन्हें नई जिला कार्यसमिति में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने इस बार पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया है। रणविजय सिंह मुन्ना- जिला उपाध्यक्ष रणविजय सिंह मुन्ना को एक बार फिर जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वह लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और संगठन में काम करने का अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वह चिरगांव ब्लॉक के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि के तौर पर भी सक्रिय हैं। मनोज अग्रहरि- जिला महामंत्री मनोज अग्रहरि को पहले महानगर में मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी। अब पार्टी ने उन्हें आगे बढ़ाते हुए जिला महामंत्री बनाया है। संगठन में लंबे समय से सक्रिय मनोज अग्रहरि को नई टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। निखिल मोटानी – जिला मंत्री निखिल मोटानी व्यापारी संगठन से जुड़े नेता हैं। वह व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। लंबे समय से भाजपा से जुड़े होने के कारण पार्टी ने उन्हें नई जिला कार्यसमिति में जिला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है।
विक्की कुकरेजा- जिला कोषाध्यक्ष विक्की कुकरेजा को पार्टी ने जिला कोषाध्यक्ष बनाया है। वह सिंधी समाज के बीच भी सक्रिय माने जाते हैं और समाज का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारी दी है। जगनेंद्र सिंह नीतू- जिला मंत्री जगनेंद्र सिंह नीतू वर्तमान में पंजाबी अकादमी के सदस्य हैं। वह भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में शामिल हैं और मंदिर से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय माने जाते हैं। पार्टी ने उन्हें नई कार्यसमिति में जिला मंत्री की जिम्मेदारी दी है। सत्यम साहनी – जिला मंत्री सत्यम साहनी को जिला मंत्री बनाया गया है। इससे पहले वह पार्टी में मीडिया से जुड़े काम देखते रहे हैं। वर्तमान में वह निषाद समाज के बीच भी सक्रिय हैं। संगठन में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है। आनंद अग्रहरि- जिला मंत्री आनंद अग्रहरि इससे पहले मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह लंबे समय से भाजपा संगठन में काम कर रहे हैं। अब पार्टी ने उन्हें जिला स्तर पर जिम्मेदारी देते हुए जिला मंत्री बनाया है। सिद्धांत घोष— जिला मंत्री सिद्धांत घोष बंगाली समाज के बीच सक्रिय हैं और समाज का नेतृत्व करते रहे हैं। पार्टी ने उन्हें भी नई जिला कार्यसमिति में शामिल करते हुए जिला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। संतोष शुक्ला- जिला उपाध्यक्ष संतोष शुक्ला लंबे समय से संघ और संगठन से जुड़े हुए हैं। संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें नई टीम में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। मनीष जैन — जिला उपाध्यक्ष मनीष जैन इससे पहले भाजपा युवा मोर्चा में महानगर उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह व्यापारी समाज से आते हैं और व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर समय-समय पर आवाज उठाते रहे हैं। अब पार्टी ने उन्हें जिला उपाध्यक्ष बनाया है। श्वेता श्रीवास्तव — जिला उपाध्यक्ष श्वेता श्रीवास्तव इससे पहले महानगर महिला मोर्चा की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। महिला मोर्चा में उनके काम को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अब जिला स्तर पर आगे बढ़ाया है और जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। अच्युतानंद शाही — जिला महामंत्री अच्युतानंद शाही को लंबे समय से संगठनात्मक काम का अनुभव है। वह पहले महानगर महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब पार्टी ने उन्हें जिला स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए जिला महामंत्री बनाया है। प्रेमनाथ शुक्ला — जिला मंत्री प्रेमनाथ शुक्ला लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं और संगठन में लगातार सक्रिय रहे हैं। उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें नई कार्यसमिति में जिला मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी है। समरेंद्र कुमार सिंह- जिला महामंत्री समरेंद्र कुमार सिंह इससे पहले किसान मोर्चा में महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब पार्टी ने उन्हें मुख्य संगठन में आगे बढ़ाते हुए जिला महामंत्री की जिम्मेदारी दी है। किसान मोर्चा में उनके अनुभव का फायदा अब जिला संगठन को मिलने की उम्मीद है। विश्वेश श्रीवास्तव- विश्वेश श्रीवास्तव को जिला कार्यालय मंत्री बनाया गया है। ये गोरखपुर में एक कारोबारी हैं। पूर्व महानगर अध्यक्ष के भाई हैं। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की तैयारी भाजपा की नई जिला कार्यसमिति में पुराने अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ संगठन के अलग-अलग मोर्चों पर काम कर चुके नेताओं को जगह दी गई है। नई टीम के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की होगी। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए नई कार्यसमिति का गठन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि नई जिम्मेदारियों के जरिए संगठन में सक्रियता बढ़ाई जाए और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच भी पार्टी की पहुंच मजबूत की जाए। नई सूची में शामिल बाकी पदाधिकारी भी लंबे समय से पार्टी और संगठन से जुड़े हुए हैं। इन कार्यकर्ताओं को उनके अनुभव और सक्रियता के आधार पर अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।

व्हाट्सऐप लिंक पर क्लिक करते ही उड़ गए 12.56 लाख:आगरा में साइबर ठगों का डबल अटैक, बुजुर्ग समेत 2 लोग साइबर ठगों के बने शिकार

आगरा में साइबर ठगों ने दो अलग-अलग मामलों में लोगों को डिजिटल जाल में फंसाकर 24 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली। शास्त्रीपुरम निवासी बुजुर्ग से क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन के नाम पर 12.56 लाख उड़ाए गए। वहीं दूसरे पीड़ित से ऑनलाइन दवा और ट्रेडिंग के नाम पर करीब 12 लाख रुपये ठग लिए गए। दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लिंक पर क्लिक करते ही खाली हुआ खाता
शास्त्रीपुरम निवासी बृजमोहन गोयल के पास व्हाट्सऐप पर ‘सीनियर सिटीजन क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन’ के नाम से मैसेज आया। साथ में एक लिंक भेजा गया। लिंक खोलते ही सामने बैंक जैसी वेबसाइट खुली। ठगों ने उनसे बैंकिंग डिटेल भरवाई और फिर मोबाइल की स्क्रीन शेयर कराई। जैसे ही स्क्रीन शेयर हुई, ठगों ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर खाते से करीब 12.56 लाख रुपये निकाल लिए। रकम कटने के बाद पीड़ित को ठगी का पता चला। शिकायत पर पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू की है। दवा कंपनी और ट्रेडिंग के नाम पर ठगे 12 लाख
दूसरे मामले में भूप सिंह को पहले TATA 1mg के नाम पर ऑनलाइन दवा का झांसा देकर 5.33 लाख रुपये ठगे गए। इसके कुछ दिन बाद TATA Fintech ट्रेडिंग के नाम पर मुनाफे का लालच देकर उनसे 6.66 लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए गए।पुलिस के मुताबिक ठग पहले छोटे निवेश पर मुनाफा दिखाते हैं, फिर फीस और अतिरिक्त निवेश के नाम पर रकम बढ़ाते जाते हैं। भूप सिंह के साथ भी यही तरीका अपनाया गया। बैंक ट्रेल खंगाल रही पुलिस
साइबर क्राइम पुलिस अब दोनों मामलों में रकम किन खातों में गई, आगे कहां ट्रांसफर हुई और किन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ, इसकी पड़ताल कर रही है। दोनों में आरोपी अभी अज्ञात हैं।अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक न खोलें, स्क्रीन शेयर न करें और किसी भी निवेश से पहले उसकी प्रमाणिकता जरूर जांचें।

सई नदी में नहीं गिरेगा 59.88 MLD सीवेज:बिजनौर में बन रहा 100 MLD STP; 2044 तक लखनऊ में 1263 MLD होगी सीवेज शोधन क्षमता

लखनऊ में सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। सरोजनीनगर और मोहनलालगंज क्षेत्र से गुजरने वाली सई नदी में गिरने वाले 59.88 एमएलडी सीवेज वाले अनटैप्ड नाले को रोकने के लिए बिजनौर में 100 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण शुरू हो चुका है। परियोजना का निर्माण 23 जून 2026 से चल रहा है। इसके पूरा होने के बाद नाले का अशोधित सीवेज सीधे नदी में जाने से रोका जा सकेगा। साथ ही लखनऊ में निर्माणाधीन, मंजूरी और प्रस्तावित सभी एसटीपी परियोजनाएं पूरी होने पर वर्ष 2044 तक कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। सई नदी में जाता है 59.88 एमएलडी सीवेज वाला नाला लखनऊ नगर क्षेत्र में सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले की पहचान की गई है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज सीधे नदी में पहुंचता है। फिलहाल यह नाला सई नदी के प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत अब इस नाले को टैप करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
नाले से निकलने वाले सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोककर उसे एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। यहां सीवेज का शोधन करने के बाद ही पानी के निस्तारण या दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था की जाएगी। इससे सई नदी में अशोधित सीवेज का प्रवाह कम होगा। बिजनौर में 100 एमएलडी एसटीपी का निर्माण शुरू अनटैप्ड नाले को टैप करने के लिए बिजनौर में 100 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण चल रहा है। परियोजना का कार्यादेश 2 जून 2025 को जारी किया गया था। इसके बाद अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की गई और 23 जून 2026 से निर्माण कार्य शुरू हुआ।
एसटीपी तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा। इससे बड़ी मात्रा में अशोधित सीवेज के सई नदी में पहुंचने की समस्या पर रोक लगेगी। नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की योजना में बिजनौर एसटीपी को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। 2044 तक 1263 एमएलडी होगी शोधन क्षमता लखनऊ में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित सभी एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध हो जाएगी। इस क्षमता के आधार पर वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के शोधन की जरूरत पूरी करने की योजना है।
योजना का फोकस सिर्फ मौजूदा सीवेज को शोधित करने तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के साथ सीवेज की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए पहले से पर्याप्त क्षमता तैयार की जा रही है। इसका लक्ष्य अशोधित सीवेज को नदियों और जलस्रोतों में जाने से रोकना है। दौलतगंज एसटीपी के शोधित पानी से टेक्सटाइल पार्क की जरूरत होगी पूरी सीवेज शोधन के साथ शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। दौलतगंज में 39 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग के लिए 16 एमएलडी क्षमता के टीटीपी का निर्माण चल रहा है।
इस शोधित पानी का इस्तेमाल पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए किए जाने की योजना है। इससे उद्योगों के लिए साफ पानी की मांग कम होगी और एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी का उपयोग भी बढ़ेगा। राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में भी इस्तेमाल होगा शोधित पानी शहर में शोधित पानी के पुन: उपयोग की एक और योजना राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क से जुड़ी है। 3.5 एमएलडी एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी को पार्क में इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
इस पानी का उपयोग बागवानी और सफाई जैसे कामों में किया जा सकता है। इससे इन कामों के लिए पेयजल या अन्य स्वच्छ जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही शोधित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। एयरपोर्ट में भी इस्तेमाल करने की योजना बिजनौर में बन रहे 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में शोधित पानी के इस्तेमाल की योजना पर विचार चल रहा है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद एयरपोर्ट की विभिन्न जरूरतों में शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे साफ पानी की खपत कम करने के साथ सीवेज से शोधित होकर निकलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। नालों की टैपिंग के साथ पानी का दोबारा इस्तेमाल राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक लखनऊ में सीवेज प्रबंधन की योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। इसके लिए नदी में जाने वाले नालों की पहचान कर उनकी टैपिंग की जा रही है और सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सीवेज को शोधित करने के साथ उसके दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इससे एक तरफ नदी में प्रदूषण का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ शोधित पानी के इस्तेमाल से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सई नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में बड़ा कदम सई नदी में जाने वाले 59.88 एमएलडी सीवेज वाले नाले को टैप करना इस पूरी योजना का अहम हिस्सा है। बिजनौर का 100 एमएलडी एसटीपी तैयार होने के बाद इस नाले के सीवेज को शोधित करने की व्यवस्था मजबूत होगी।
इसके साथ लखनऊ की दूसरी एसटीपी परियोजनाएं पूरी होने पर 1263 एमएलडी की कुल शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। इससे वर्ष 2044 तक शहर की सीवेज शोधन जरूरतों को पूरा करने का आधार तैयार होगा और सई नदी में अशोधित सीवेज की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकेगा।