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वाराणसी के वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्लांट से 50 हजार टन बनी जैविक-खाद:7 महीने में करसड़ा प्लांट में बढ़ा 35.5 प्रतिशत कूड़ा निस्तारण

वाराणसी के करसड़ा स्थित कूड़ा प्लांट में पिछले 7 महीने में कूड़ा निस्तारण में 35.5 प्रतिशत का उछाल आया है। वाराणसी के करसड़ा में बने वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट से 50 हजार टन कंपोस्ट खाद भी इन 7 महीनों में बनाई गई और रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल देश की सीमेंट फैक्ट्रियों और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स को सप्लाई किया गया। स्वच्छ काशी, सुंदर काशी’ के संकल्प के तहत नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लगातार मजबूत कर रहा है। इस क्रम में करसड़ा स्थित ‘वेस्ट टू कंपोस्ट’ प्लांट में बीते सात महीनों के दौरान कचरा निस्तारण की गति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनवरी की तुलना में जुलाई 2026 तक कूड़े के प्रसंस्करण में करीब 35.5 प्रतिशत का उछाल आया है। 52 हजार टन निकाला गया रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया -​ वित्तीय वर्ष 2025-26 में करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट से लगभग 50,000 टन जैविक खाद (कंपोस्ट) का उत्पादन किया गया है। जिसे विभिन्न उर्वरक (फर्टिलाइजर) कंपनियों को बिक्री के लिए भेजा गया है। वहीं, इसी प्लांट से 52,000 टन रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) भी जनरेट किया गया, जिसे देश की कई प्रमुख सीमेंट इंडस्ट्रीज और बिजली उत्पादन में लगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स को ईंधन के रूप में भेजा गया है। शहर में रोजाना निकलता 1300 टन सॉलिड वेस्ट नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया -​शहर में प्रतिदिन 1000 से 1300 टन सॉलिड वेस्ट निकलता है, जिसके शत-प्रतिशत निस्तारण के लिए विभिन्न प्रोसेसिंग प्लांट कार्यरत हैं। इनमें करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट की क्षमता 600 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण की है। इसके अलावा रमना स्थित वेस्ट टू-चारकोल प्लांट की क्षमता प्रतिदिन करीब 600 टन सॉलिड वेस्ट से 200 टन कोयला बनाने की है। कूड़े से बन रही बायो गैस नगर आयुक्त ने बताया – रमना में ही निर्माण सामग्री व मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने के लिए कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडी) प्लांट भी कार्यरत है। जिसकी क्षमता 200 मीट्रिक टन है। ​पहाड़िया मंडी, भवानिया पोखरी व आईडीएच कॉलोनी में सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट स्थापित हैं। जहां वेस्ट टू एनर्जी प्रक्रिया के तहत प्रतिदिन लगभग 500 किग्रा सीबीजी (गैस) का उत्पादन किया जा रहा है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शहरवासियों से अपील की है कि काशी को स्वच्छ और हरित बनाए रखने में अपना सहयोग दें। घर और प्रतिष्ठानों से निकलने वाला गीला और सूखा कचरा हमेशा अलग-अलग बाल्टी या डस्टबिन में ही सफाईकर्मियों को सौंपें।

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