सुप्रीम कोर्ट ने अमरोहा प्रशासन को नोटिस जारी किया:कांवड़ यात्रा पर मीट दुकानें बंद करने के फैसले पर मांगा जवाब
अमरोहा में कांवड़ यात्रा के दौरान मीट की दुकानें बंद करने के प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, अमरोहा के डीएम, एसपी और इंस्पेक्टर को नोटिस जारी किया है। यह याचिका समाजसेवी और अधिवक्ता हाजी नासिर फारूक ने दायर की थी। अमरोहा प्रशासन ने कांवड़ यात्रा के मद्देनजर मीट, मछली और मुर्गे की दुकानों को 25 दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नोटिस बिना किसी नाम और पते के जारी किए गए थे। इस फैसले से खान-पान व्यवसाय से जुड़े हजारों लोग प्रभावित हुए। याचिकाकर्ता हाजी नासिर फारूक एडवोकेट ने कहा, “हम शिव भक्तों की आस्था का सम्मान करते हैं। जिन रास्तों से कांवड़ यात्रा गुजरती है, वहां मीट की दुकानें बंद होनी चाहिए। लेकिन जिन इलाकों में शत-प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और जो कांवड़ यात्रा के मार्ग में नहीं आते, वहां इस व्यवसाय पर पूरी तरह पाबंदी लगाना न्यायसंगत नहीं है।” इससे पहले हाजी नासिर फारूक ने इसी तर्क के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि प्रभावित दुकानदारों को खुद अदालत आना चाहिए। इसके बाद नासिर फारूक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उनकी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को नोटिस जारी किया।

