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आगरा की धरती पर फिर गूंजेगी मुरारी बापू की अमृतवाणी

15 सितंबर से नौ दिवसीय रामकथा, हजारों श्रद्धालुओं को मिलेगा श्रीराम भक्ति और कथा रस का दिव्य संयोग

बाबा न्यूज़ 

आगरा। श्रीराम की भक्ति, मर्यादा और प्रेम का संदेश लेकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रामकथावाचक मुरारी बापू एक बार फिर आगरा की पावन धरती पर पधारने जा रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद बापू की अमृतवाणी का लाभ आगरा के श्रद्धालुओं को मिलने जा रहा है। आगामी 15 सितंबर से 23 सितंबर तक फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में नौ दिवसीय भव्य रामकथा का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर शहर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक उमंग दिखाई दे रही है।
रामकथा के आयोजन की घोषणा को लेकर हरी पर्वत, दिल्ली गेट स्थित चोखो जीमन रेस्टोरेंट में उद्घोषणा समारोह आयोजित किया गया। उद्घोषणा समारोह का शुभारंभ श्री हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े ललित गुप्ता और सतीश कुमार शाह ने बताया कि आगामी 15 सितंबर को शाम 4 बजे अंतरराष्ट्रीय संत मुरारी बापू आगरा पधारेंगे और श्री राम कथा का शुभारंभ करेंगे। इसके पश्चात 16 सितंबर से 23 सितंबर तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से बापू श्रद्धालुओं को श्रीराम कथा का रसपान कराएंगे।
उन्होंने बताया कि मुरारी बापू की कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को प्रेम, करुणा, सत्य, सेवा और मानवीय मूल्यों से जोड़ने वाला आध्यात्मिक अनुभव होती है। बापू अपनी सहज, सरल और भावपूर्ण शैली में श्रीराम के चरित्र के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि राम केवल आराध्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा हैं। रामकथा के प्रत्येक प्रसंग में परिवार, समाज और मानवता के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा मिलती है।

2003 के बाद अब होगा बापू का आगरा आगमन
अंशुल गुप्ता और कार्तिक गुप्ता ने बताया कि मुरारी बापू इससे पूर्व वर्ष 2003 में आगरा आए थे। इसके बाद से ही आगरा के श्रद्धालु उनकी रामकथा सुनने के लिए प्रतीक्षारत थे। लगभग दो दशक से अधिक समय बाद एक बार फिर बापू की वाणी आगरा में गूंजेगी। ऐसे में यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर बन गया है।
मनीष मित्तल और मनोज त्रिपाठी ने बताया कि कथा से पूर्व 2 सितंबर को सुबह 8:30 बजे कथा स्थल पर भूमि पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही कथा स्थल को भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप देने की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं।

32 बाई 40 फीट का भव्य मंच, विराजेंगे हनुमान जी
देवेश शाह और संजीव जैन के अनुसार कथा स्थल पर 32 बाई 40 फीट के भव्य मंच का निर्माण किया जा रहा है। इसी मंच पर कथा व्यास पीठ बनाई जाएगी। व्यास पीठ पर हनुमान जी का दिव्य एवं भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंच सज्जा में धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है, ताकि कथा स्थल पर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को रामभक्ति और आध्यात्मिक वातावरण की अनुभूति हो।
कथा में आगरा सहित विभिन्न स्थानों और अन्य प्रदेशों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगभग 5000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। आयोजन को व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जा रही हैं।

राम के आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश
मुरारी बापू की रामकथा की विशेषता उनकी सहज और आत्मीय कथन शैली है। श्रीराम के चरित्र के माध्यम से वे प्रेम, समर्पण, त्याग, मर्यादा, करुणा और सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाते हैं। उनकी कथा में धर्म के साथ-साथ जीवन के व्यावहारिक पक्षों को भी सहज भाषा में समझाया जाता है।
आयोजकों ने कहा कि वर्तमान समय में जब मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के बीच मानसिक शांति और आत्मिक संतोष की तलाश कर रहा है, ऐसे समय में रामकथा जीवन को भीतर से समृद्ध करने का माध्यम बनती है। श्रीराम का आदर्श मनुष्य को कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
आयोजन समिति ने आगरा के सभी रामभक्तों और श्रद्धालुओं से इस नौ दिवसीय रामकथा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीराम की भक्ति और मुरारी बापू की अमृतवाणी का लाभ लेने का आह्वान किया।
उद्घोषणा समारोह के अवसर पर ललित गुप्ता, सतीश कुमार शाह, मनीष मित्तल, मनोज त्रिपाठी, अंशुल गुप्ता, कार्तिक गुप्ता, देवेश शाह, दिव्या गुप्ता, रीटा शाह संजीव जैन, राकेश गुप्ता, विजय सिंह, अमित पोद्दार, लता गुप्ता, निराली शाह, सीताराम अग्रवाल, रैलेश अग्रवाल, पीयूष अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

भाकियू ने छह कार्यकर्ताओं को दी नई जिम्मेदारी:संभल में संगठन विस्तार पर हुई चर्चा, बिजली-गन्ना भुगतान और आवारा पशुओं का मुद्दा उठा

संभल में भारतीय किसान यूनियन (बीआरएसएस) भारत राष्ट्रीय सेवक संघ की ओर से रविवार को ग्राम गोजनी में जनजागरण अभियान के तहत बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन विस्तार के साथ किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। तहसील संरक्षक सेवक सैनी के नेतृत्व में हुई बैठक की अध्यक्षता इस्माइल खां ने की, जबकि संचालन सुफियान पाशा ने किया। 6 पदाधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी संगठन विस्तार के तहत ताराचंद सैनी को तहसील सचिव संभल, राजीव सैनी को तहसील प्रभारी, संजय सैनी को ग्राम अध्यक्ष, सतवीर सैनी को ग्राम प्रभारी, राकेश सैनी को ग्राम महासचिव और आकाश सैनी को ग्राम सचिव नियुक्त किया गया। कार्यकर्ताओं ने नए पदाधिकारियों का स्वागत किया और उनसे संगठन के हित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा जताई। किसानों की समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाने पर जोर जिला अध्यक्ष कामेन्द्र चौधरी ने कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य किसानों और मजदूरों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाना है। गांव-गांव संगठन को मजबूत कर किसानों की आवाज संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण किसान और मजदूर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में फसलों का उचित मूल्य, समय पर गन्ना भुगतान, पर्याप्त बिजली, खाद-बीज और सिंचाई जैसी सुविधाएं मिलना जरूरी है।
गांव-गांव चलेगा जनजागरण अभियान युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने कहा कि संगठन किसानों और ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार जनजागरण अभियान चलाएगा। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर काम करने की बात कही। बिजली, गन्ना भुगतान और आवारा पशुओं का मुद्दा उठा बैठक में बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं, गन्ना भुगतान में देरी, खाद-बीज की उपलब्धता और आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा सरकारी प्रमाण पत्र बनवाने में देरी और वारिसान दर्ज कराने जैसी समस्याओं को भी उठाया गया। इस अवसर पर जिला संगठन मंत्री चौ. ऋषिपाल सिंह, जिला प्रचार मंत्री सन्तवीर सिंह, जिला महासचिव इस्माइल खां, जिला मंत्री सुफियान पाशा, सेवक सैनी, मनीराम गूर्जर, मो. हसन, होराम सिंह सैनी, अशरफ अली, मुशाहिद अली, रामचरन सिंह सैनी, श्योराज सैनी, सतवीर सिंह सैनी और अर्जुन कुमार समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बागपत अड्डे पर अचानक धंसी सड़क:राहगीरों की बढ़ी परेशानी, रात में हादसे का खतरा

मेरठ के व्यस्त बागपत अड्डा चौराहे पर रविवार को अचानक सड़क का एक हिस्सा धंस गया। सड़क धंसने के बाद यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चौराहे पर दिनभर वाहनों की आवाजाही रहती है, ऐसे में सड़क धंसने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया है। सड़क का हिस्सा धंसने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों की नजर उस पर पड़ी। वाहन चालक धंसी हुई सड़क से बचकर निकलते नजर आए। कुछ लोगों ने बताया कि अगर वाहन चालक ने ध्यान नहीं दिया तो अचानक धंसे हिस्से में वाहन फंस सकता है और हादसा हो सकता है। रविवार सुबह भी मेरठ में बारिश हुई थी। इससे एक दिन पहले शनिवार को भी करीब दो-तीन घंटे लगातार बारिश हुई थी। इसके बाद बागपत अड्डे पर सड़क धंसने को लेकर लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण जमीन के नीचे पानी जाने से सड़क कमजोर हुई होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बारिश की वजह से ही सड़क धंसी है तो यह नगर निगम की सड़क निर्माण और गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में परेशानी और बढ़ जाएगी। अंधेरे में धंसी सड़क दिखाई नहीं देने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए खास खतरा रहेगा। लोगों ने निगम से मौके पर जल्द मरम्मत कराने के साथ ही सड़क के धंसे हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग या कोई चेतावनी लगाने की मांग की है, ताकि मरम्मत होने तक किसी तरह का हादसा न हो।

सहारनपुर मंडलायुक्त-डीएम ने मां शाकंभरी विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण:जलभराव समस्या पर नाले की सफाई के दिए निर्देश

सहारनपुर के मां शाकंभरी विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए रविवार शाम चार बजे मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार और डीएम अरविंद कुमार चौहान ने निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय में जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था, नालियों और ड्रेनेज सिस्टम का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्या का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आमजन को परेशानी न हो। निरीक्षण के दौरान, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने परामर्शी संस्था यूपीपीसीएल के अधिकारियों से जल निकासी के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव और पूरे प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी ली। यूपीपीसीएल के एई आकाश कुमार ने प्रस्तावित जल निकासी योजना और उसकी प्रगति के संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से वर्तमान में जल निकासी के लिए किए जा रहे इंतजामों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव कमल कृष्ण और विश्वविद्यालय अभियंता विवेक सिंह पुंडीर ने बताया कि परिसर से पानी निकालने के लिए फिलहाल पंपिंग सेट का उपयोग किया जा रहा है। पानी की निकासी को बेहतर बनाने के लिए दो अतिरिक्त मोटर खरीदने की प्रक्रिया भी जारी है। जिलाधिकारी ने मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तैयार की गई कार्ययोजना का लेआउट प्लान भी देखा और उसकी प्रगति की समीक्षा की। मंडलायुक्त ने जल निकासी के सभी मार्गों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद, अधिकारियों ने पुवारका ग्राम में स्थित नवनिर्मित पुलिया का निरीक्षण किया। नाले में जल प्रवाह बाधित होने की स्थिति को देखते हुए, उन्होंने पूरे नाले की जल्द सफाई कराने के निर्देश दिए। पुलिया के पास जमा अतिरिक्त मिट्टी को तत्काल जेसीबी से हटवाया गया, जिससे पानी के बहाव का रास्ता सुचारु हो सके। निरीक्षण के समय कुलपति प्रो. विमला वाई, मुख्य विकास अधिकारी सुमित राजेश महाजन, एसडीएम सदर सुबोध कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जल निकासी की व्यवस्था को प्रभावी बनाकर विश्वविद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

एक घंटे की बारिश ने खोली जल निकासी की पोल:बस स्टेशन, पटेल नगर और रोडवेज क्षेत्र में भरा पानी; राहगीर परेशान

अंबेडकरनगर में अकबरपुर में रविवार शाम करीब 5:30 बजे हुई एक घंटे की तेज बारिश ने नगर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। बारिश थमने के बाद शहर के कई प्रमुख इलाकों और सड़कों पर पानी भर गया। जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बस स्टेशन और रोडवेज क्षेत्र में भरा पानी तेज बारिश के बाद बस स्टेशन परिसर, पटेल नगर, रोडवेज क्षेत्र, कृषि भवन और बिजली विभाग कार्यालय के आसपास जलभराव हो गया। कई मुख्य मार्गों पर सड़क और नालियों का अंतर तक दिखाई नहीं दे रहा था। पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। हर साल बारिश में बनती है यही स्थिति स्थानीय लोगों का कहना है कि अकबरपुर में जलभराव की समस्या नई नहीं है। मानसून के दौरान थोड़ी देर की बारिश के बाद ही शहर के प्रमुख हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। लोगों का आरोप है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और जल निकासी के पर्याप्त इंतजाम न होने से समस्या गंभीर हो रही है। घंटों जमा रहा पानी, दुकानदार परेशान बारिश रुकने के बाद भी कई स्थानों पर घंटों तक पानी जमा रहा। इससे दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को भी परेशानी हुई। लोगों का कहना है कि जल निकासी व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्थायी समाधान की मांग स्थानीय लोगों ने नगर प्रशासन से नालियों की नियमित सफाई कराने, जल निकासी के अवरुद्ध रास्तों को दुरुस्त करने और जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान हर साल होने वाली समस्या से निपटने के लिए बारिश के बाद पानी निकालने के बजाय जल निकासी की ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था जरूरी है।

पोल्ट्री सेक्टर में होगा 100 करोड़ का निवेश:गोरखपुर में हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले कॉक्लेव में हुआ MOU

पूर्वांचल में पोल्ट्री उद्योग के विकास को नई दिशा प्रदान करने तथा पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े किसानों, उद्यमियों, विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से रविवार को गोरखपुर में एक दिवसीय ‘प्रथम पोल्ट्री कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में पोल्ट्री क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की संभावनाओं, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, विपणन, निवेश एवं रोजगार सृजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर कई उद्यमियों और पशुपालन विभाग के बीच पोल्ट्री सेक्टर में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए MOU भी हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने पोल्ट्री क्षेत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि एवं पशुपालन के साथ-साथ पोल्ट्री उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और बेहतर प्रबंधन को अपनाकर इस क्षेत्र में किसानों एवं युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की अनेक संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
विशिष्ट अतिथि विधायक महेंद्रपाल सिंह और प्रदीप शुक्ल ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग की संभावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों एवं युवाओं की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों एवं किसानों को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। कॉन्क्लेव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने पशुपालन एवं पोल्ट्री क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभागीय प्रयासों, सरकार की प्राथमिकताओं तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं पोल्ट्री क्षेत्र न केवल पोषण सुरक्षा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक प्रबंधन एवं बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक गोरखपुर मंडल डॉ. वेद प्रकाश, लखनऊ से आए अपर निदेशक डॉ. अनिल, डॉ. बृजेश त्रिपाठी, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, मंडल के सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डॉ. शंभू दयाल, रवि पाठक, अभिषेक आदि उपस्थित रहे। उद्यमियों ने पोल्ट्री सेक्टर में निवेश की दिखाई रुचि
कॉन्क्लेव के दौरान कई उद्यमियों ने पोल्ट्री सेक्टर में निवेश की रुचि दिखाई। कॉन्क्लेव के संयोजक डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग में करीब 100 करोड़ रुपये पूंजी निवेश के लिए MOU हुआ है। पशुपालन विभाग के साथ एमओयू करने वालों में आबाद हबीब, मोनू खान, स्वतंत्रवीर, फैज अहमद, दीपक सिंह, राजू सिंह, चंपारण एग्रो, शत्रुजीत सिंह और विनोद कुमार सिंह प्रमुख रहे। पोल्ट्री सेक्टर के प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. पंकज कुमार शुक्ला ने पोल्ट्री उत्पादन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने पोल्ट्री क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। कॉन्क्लेव में पोल्ट्री उद्योग से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। इनमें सुरेश चित्तुरी, डॉ. श्रीश निगम, ओ.पी. सिंह, उदय सिंह बयास, संतोष इरे, डॉ. जितेंद्र वर्मा, डॉ. शरद सिंह, वी.पी. सिंह एवं राजू सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभवों एवं विशेषज्ञता के आधार पर पोल्ट्री उद्योग की विभिन्न चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है पोल्ट्री उद्योग
कॉन्क्लेव के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज पोल्ट्री उद्योग केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कृषि-आधारित उद्योग के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इसमें गुणवत्तापूर्ण चूजों की उपलब्धता, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक प्रबंधन, रोगों की रोकथाम, जैव-सुरक्षा, आधुनिक आवास व्यवस्था, हैचरी प्रबंधन, उत्पादन लागत में कमी तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। तकनीकी सत्रों में पोल्ट्री उद्योग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने आधुनिक पोल्ट्री फार्मिंग, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, गुणवत्ता नियंत्रण, रोग नियंत्रण एवं जैव-सुरक्षा के साथ-साथ उद्योग के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। प्रतिभागियों को पोल्ट्री क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीनतम तकनीकों एवं भविष्य में होने वाले संभावित बदलावों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। क्षेत्र में बढ़ती जनसंख्या, पोषण की आवश्यकता, बाजार की उपलब्धता तथा युवाओं की उद्यमशीलता को देखते हुए पोल्ट्री क्षेत्र रोजगार और आर्थिक विकास का एक मजबूत माध्यम बन सकता है। इसके लिए किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, पशुचिकित्सकों, विभागीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। महिला एवं युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
कॉन्क्लेव के दौरान किसानों एवं पोल्ट्री उद्यमियों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पोल्ट्री पालन को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण से अपनाने के साथ-साथ प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और समय-समय पर विशेषज्ञ सलाह की व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। छोटे एवं मध्यम स्तर के पोल्ट्री पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया।
वक्ताओं ने पोल्ट्री उद्योग में बायो-सिक्योरिटी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि रोगों की रोकथाम के लिए फार्म स्तर पर साफ-सफाई, नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था, उचित टीकाकरण, रोग निगरानी एवं वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता देनी होगी।
स्वस्थ एवं सुरक्षित पोल्ट्री उत्पादन न केवल उत्पादकों के लिए लाभकारी है बल्कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए भी आवश्यक है। कॉन्क्लेव में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि पोल्ट्री क्षेत्र में महिला एवं युवा उद्यमियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कम समय में उत्पादन, बाजार की बढ़ती मांग और विभिन्न स्तरों पर उद्यम की संभावनाओं के कारण यह क्षेत्र स्वरोजगार के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे एवं मध्यम स्तर पर पोल्ट्री इकाइयों की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

मंदी की मार से बेहाल लोहा व्यापार

जीएसटी कार्रवाई और एमसीएक्स ने बढ़ाई व्यापारियों की चिंता
घाटे में बिक रहा लोहा, व्यापारियों ने उठाई नई मंडी और जीएसटी राहत की मांग
बाबा न्यूज
आगरा। आगरा लोहा व्यापारी एसोशिएशन की ओर से दालवाटी और साधारण सभा की बैठक का आयोजन शनिवार को पथौली स्थित दी ग्रांड हेरिटेज रेसॉर्ट में किया गया। अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि साधारण सभा की बैठक में जिले भर के व्यापारियों ने लोहे के व्यापार में आ रही मंदी, जीएसटी में व्यापारियों के साथ पारदर्शिता तथा आॅनलाइन ट्रेडिंग से प्रभावित होते व्यापार पर मंथन किया। आज लोहा व्यापार के बाजार में नकदी का संकट है और व्यापारी भारी घाटे में कारोबार करने को मजबूर हैं। कई बड़े व्यापारियों ने नुकसान के चलते अपने जीएसटी पंजीकरण तक सरेंडर कर दिए हैं। जीएसटी विभाग की जांच और कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में भय का माहौल है। अधिकारियों द्वारा प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर कागजात तैयार करने, हस्ताक्षर के लिए दबाव बनाने और अनावश्यक वसूली के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में विभाग को व्यापारी का उत्पीड़न नहीं, बल्कि सहयोग करना चाहिए।
महासचिव दिनेश अग्रवाल ने कहा कि लोहा व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव है। एमसीएक्स व्यवस्था के कारण व्यापारी जिस कीमत पर माल खरीदता है, उससे कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाता है। सरकार को इस व्यवस्था की समीक्षा कर व्यापारियों को राहत देनी चाहिए।इसके साथ ही पिछले करीब 25 वर्षों से आगरा में नई लोहा मंडी की मांग की जा रही है। इस सम्बन्ध में मंडलायुक्त समेत कई अधिकारीयों को ज्ञापन भी दिए जा चुके है। यदि सभी लोहा व्यापारियों को एक व्यवस्थित मंडी में स्थान उपलब्ध कराया जाए तो व्यापार को सुरक्षा, सुविधा और नई गति मिल सकती है। शाम के समय व्यापारिक क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाकर व्यापारियों, विशेषकर बुजुर्ग व्यापारियों को सुरक्षा दी जानी चाहिए।
कोषाध्यक्ष राकेश कुमार गोयन ने कहा कि हम सरकार से यह भी मांग करते हैं कि जो व्यापारी जीवनभर ईमानदारी से सरकार को टैक्स देता रहा है और बुढ़ापे में व्यापार करने में सक्षम नहीं रहता, उसके लिए टैक्स योगदान के आधार पर व्यापारी पेंशन योजना बनाई जाए। व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए उसके सम्मान और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी सरकार की होनी चाहिए। सरकार और प्रशासन लोहा व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुने और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए। इस अवसर पर नरेंद्र मंगल, अंजुल जैन, संजय गोयल, आशीष अग्रवाल, मोहित गोयल, सिद्धार्थ जैन, विपुल जैन, सोमल जैन, बादाम अग्रवाल, उमेश अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, योगेश अग्रवाल, शिवम अग्रवाल, गिरीश घर, रामसेवक, पॉपी भाई आदि मौजूद रहे।