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सई नदी में नहीं गिरेगा 59.88 MLD सीवेज:बिजनौर में बन रहा 100 MLD STP; 2044 तक लखनऊ में 1263 MLD होगी सीवेज शोधन क्षमता

लखनऊ में सई नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। सरोजनीनगर और मोहनलालगंज क्षेत्र से गुजरने वाली सई नदी में गिरने वाले 59.88 एमएलडी सीवेज वाले अनटैप्ड नाले को रोकने के लिए बिजनौर में 100 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण शुरू हो चुका है। परियोजना का निर्माण 23 जून 2026 से चल रहा है। इसके पूरा होने के बाद नाले का अशोधित सीवेज सीधे नदी में जाने से रोका जा सकेगा। साथ ही लखनऊ में निर्माणाधीन, मंजूरी और प्रस्तावित सभी एसटीपी परियोजनाएं पूरी होने पर वर्ष 2044 तक कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। सई नदी में जाता है 59.88 एमएलडी सीवेज वाला नाला लखनऊ नगर क्षेत्र में सई नदी में जाने वाले एक अनटैप्ड नाले की पहचान की गई है। इस नाले से करीब 59.88 एमएलडी सीवेज सीधे नदी में पहुंचता है। फिलहाल यह नाला सई नदी के प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत अब इस नाले को टैप करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
नाले से निकलने वाले सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोककर उसे एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। यहां सीवेज का शोधन करने के बाद ही पानी के निस्तारण या दोबारा इस्तेमाल की व्यवस्था की जाएगी। इससे सई नदी में अशोधित सीवेज का प्रवाह कम होगा। बिजनौर में 100 एमएलडी एसटीपी का निर्माण शुरू अनटैप्ड नाले को टैप करने के लिए बिजनौर में 100 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण चल रहा है। परियोजना का कार्यादेश 2 जून 2025 को जारी किया गया था। इसके बाद अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की गई और 23 जून 2026 से निर्माण कार्य शुरू हुआ।
एसटीपी तैयार होने के बाद नाले से आने वाले सीवेज को उपचारित किया जा सकेगा। इससे बड़ी मात्रा में अशोधित सीवेज के सई नदी में पहुंचने की समस्या पर रोक लगेगी। नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने की योजना में बिजनौर एसटीपी को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। 2044 तक 1263 एमएलडी होगी शोधन क्षमता लखनऊ में निर्माणाधीन, स्वीकृत और प्रस्तावित सभी एसटीपी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कुल 1263 एमएलडी सीवेज शोधन क्षमता उपलब्ध हो जाएगी। इस क्षमता के आधार पर वर्ष 2044 तक शहर में पैदा होने वाले सीवेज के शोधन की जरूरत पूरी करने की योजना है।
योजना का फोकस सिर्फ मौजूदा सीवेज को शोधित करने तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के साथ सीवेज की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए पहले से पर्याप्त क्षमता तैयार की जा रही है। इसका लक्ष्य अशोधित सीवेज को नदियों और जलस्रोतों में जाने से रोकना है। दौलतगंज एसटीपी के शोधित पानी से टेक्सटाइल पार्क की जरूरत होगी पूरी सीवेज शोधन के साथ शोधित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। दौलतगंज में 39 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग के लिए 16 एमएलडी क्षमता के टीटीपी का निर्माण चल रहा है।
इस शोधित पानी का इस्तेमाल पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जरूरतों के लिए किए जाने की योजना है। इससे उद्योगों के लिए साफ पानी की मांग कम होगी और एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी का उपयोग भी बढ़ेगा। राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क में भी इस्तेमाल होगा शोधित पानी शहर में शोधित पानी के पुन: उपयोग की एक और योजना राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पार्क से जुड़ी है। 3.5 एमएलडी एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी को पार्क में इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
इस पानी का उपयोग बागवानी और सफाई जैसे कामों में किया जा सकता है। इससे इन कामों के लिए पेयजल या अन्य स्वच्छ जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही शोधित पानी के पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। एयरपोर्ट में भी इस्तेमाल करने की योजना बिजनौर में बन रहे 100 एमएलडी एसटीपी से निकलने वाले शोधित पानी के पुन: उपयोग का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में शोधित पानी के इस्तेमाल की योजना पर विचार चल रहा है।
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद एयरपोर्ट की विभिन्न जरूरतों में शोधित पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे साफ पानी की खपत कम करने के साथ सीवेज से शोधित होकर निकलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। नालों की टैपिंग के साथ पानी का दोबारा इस्तेमाल राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह के मुताबिक लखनऊ में सीवेज प्रबंधन की योजना का मुख्य उद्देश्य अशोधित सीवेज को सई नदी में पहुंचने से रोकना है। इसके लिए नदी में जाने वाले नालों की पहचान कर उनकी टैपिंग की जा रही है और सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सीवेज को शोधित करने के साथ उसके दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इससे एक तरफ नदी में प्रदूषण का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ शोधित पानी के इस्तेमाल से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सई नदी को प्रदूषण से बचाने की दिशा में बड़ा कदम सई नदी में जाने वाले 59.88 एमएलडी सीवेज वाले नाले को टैप करना इस पूरी योजना का अहम हिस्सा है। बिजनौर का 100 एमएलडी एसटीपी तैयार होने के बाद इस नाले के सीवेज को शोधित करने की व्यवस्था मजबूत होगी।
इसके साथ लखनऊ की दूसरी एसटीपी परियोजनाएं पूरी होने पर 1263 एमएलडी की कुल शोधन क्षमता उपलब्ध होगी। इससे वर्ष 2044 तक शहर की सीवेज शोधन जरूरतों को पूरा करने का आधार तैयार होगा और सई नदी में अशोधित सीवेज की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकेगा।

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