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पालेराम हत्याकांड में पिता-पुत्रों समेत 4 को उम्रकैद:चश्मदीद की हत्या में भी मिल चुकी है सजा, 2 घंटे में हुई थीं 2 हत्याएं

शामली के लांक गांव में साढ़े चार साल पहले हुए पालेराम हत्याकांड में अदालत ने पिता-पुत्रों सहित चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ऋतु नागर ने कृष्णपाल, उसके बेटों विवेक उर्फ केकड़ा और विशांत, और गांव निवासी अमित को दोषी पाया। कोर्ट ने चारों पर 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में चश्मदीद विनोद की हत्या के आरोपियों को भी पहले ही आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 3 जनवरी 2022 की शाम करीब 5:30 बजे हुई थी। शामली कोतवाली क्षेत्र के लांक गांव निवासी मजदूर पालेराम (50) को विवेक उर्फ केकड़ा अपने घर बुलाकर ले गया था। पालेराम मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। आरोप है कि विवेक के घर पहुंचने पर किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने पालेराम पर फावड़े से हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। आरोप है कि उन्होंने शव को एक बोरी में बंद किया और साइकिल पर रखकर तालाब के पास ले जाकर छिपा दिया। इसी दौरान गांव का ही विनोद वहां पहुंच गया और उसने पालेराम के शव को छिपाते हुए आरोपियों को देख लिया। पालेराम की हत्या के करीब दो घंटे बाद चश्मदीद विनोद की भी हत्या कर दी गई थी। विनोद की हत्या के मामले में कोर्ट पहले ही तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुना चुका है। अभियोजन के मुताबिक, पालेराम की हत्या के बाद आरोपियों को इस बात का डर सताने लगा कि विनोद घटना की जानकारी पुलिस को दे सकता है। इसी वजह से करीब दो घंटे बाद विनोद की भी हत्या कर दी गई। आरोप है कि विनोद पर भी फावड़े से हमला किया गया और उसकी जान ले ली गई। एक ही रात में दो लोगों की हत्या से गांव लांक में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। पालेराम के बेटे संदीप की ओर से शामली कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। तहरीर में कृष्णपाल, उसके बेटे विवेक उर्फ केकड़ा और विशांत और गांव निवासी अमित को नामजद किया गया। मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल फावड़ा, दाव और साइकिल बरामद की। इसके अलावा आरोपियों के मकान के कमरे में मृतक के खून के छींटे भी मिलने की बात सामने आई। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने 28 मार्च 2022 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और पुलिस की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने आरोपियों को दोषी साबित करने का प्रयास किया। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक पुंडीर ने बताया कि मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। उन्होंने न्यायालय के समक्ष घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता कुरबान चौधरी और शबनम चौधरी ने भी मामले में पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष कहा कि पालेराम को घर बुलाकर ले जाने, उसकी हत्या करने और शव को छिपाने के घटनाक्रम से आरोपियों की भूमिका सामने आती है। इसके अलावा हत्या में प्रयुक्त सामान की बरामदगी और आरोपी के मकान में खून के छींटे मिलने जैसे साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण बताया गया। अदालत ने चारों को माना दोषी सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। न्यायालय ने पत्रावलियों में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का अवलोकन किया। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ऋतु नागर ने कृष्णपाल, उसके बेटे विवेक उर्फ केकड़ा, विशांत और अमित को दोष सिद्ध पाया। अदालत ने चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही चारों पर कुल 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत के फैसले के बाद करीब चार साल से चल रहे पालेराम हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पालेराम की हत्या के बाद उसके चश्मदीद विनोद की हत्या कर दी गई थी। विनोद की हत्या के मामले में न्यायालय तीन अगस्त को ही कृष्णपाल और उसके बेटे विवेक उर्फ केकड़ा और विशांत को आजीवन कारावास की सजा सुना चुका है।

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