डॉ. मोनिका सिंह बनीं उच्च शिक्षा की कार्यवाहक निदेशक:कार्यभार संभालते ही पुराने मामले खुले, फर्जी वेतन निर्धारण का आरोप
प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के कार्यवाहक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को हटाकर डॉ. मोनिका सिंह को नियुक्त किया है। उन्होंने शुक्रवार शाम को कार्यभार ग्रहण कर लिया। सरकार ने स्थायी निदेशक की जगह एक कार्यवाहक को हटाकर दूसरे कार्यवाहक को तैनात किया है। डॉ. मोनिका सिंह की तैनाती के साथ ही उनके खिलाफ पूर्व में हुई शिकायतों के मामले फिर से सामने आने लगे हैं। उन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन कर्मचारियों का वेतन निर्धारित करने का आरोप है। शिकायतकर्ता अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। यह मामला 2024 से 2026 के बीच का है, जब डॉ. मोनिका सिंह मेरठ में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी थीं। आरोप है कि 28 नवंबर 2024 को उन्होंने कृषक पीजी कॉलेज मवाना, मेरठ में तैनात अकाउंटेंट नवीन कुमार वर्मा, पुस्तकालय लिपिक उमेश चंद्र और आशुलिपिक मनु चौधरी के वेतन निर्धारण की फाइल स्वीकृत की थी। इस स्वीकृति का आधार उन्होंने 9 अक्टूबर 2024 के कॉलेज के प्राचार्य नीलम शर्मा के पत्र को बनाया, जबकि प्राचार्य नीलम शर्मा 31 अगस्त 2024 को ही सेवानिवृत्त हो चुकी थीं। आरोप है कि नीलम शर्मा के सेवानिवृत्त होने के बाद कॉलेज के तीन कर्मचारियों के वेतन निर्धारण का फर्जी प्रस्ताव तैयार किया गया। तीनों कर्मियों के वेतन निर्धारण के बाद कॉलेज प्रबंधन की मातृ संस्था जाट वैदिक शिक्षा सोसायटी मवाना, मेरठ की अध्यक्ष अर्चना वर्मा ने जनवरी 2026 में शासन से इसकी शिकायत की। उनका आरोप है कि जिन तीनों कर्मचारियों का वेतन निर्धारण किया गया है, उन पर गबन के आरोप हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वेतन निर्धारण के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। नवीन कुमार वर्मा और मनु चौधरी के खिलाफ 7 अप्रैल 2024 को गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था। डॉ. मोनिका सिंह ने इन कर्मचारियों के तथ्यों को छिपाकर वेतन का निर्धारण कर दिया। आरोप है कि वेतन निर्धारण के बाद तीनों कर्मियों की सेवा पुस्तिका कालेज नहीं भेजी गई। इस मामले की शिकायत निदेशालय ने कमेटी बनाकर जांच करवाई। जांच के बाद शिकायत सही पाई गई और मोनिका सिंह पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में कार्यवाही करने की संस्तुति की गई। इसी बीच मोनिका सिंह को पिछले महीने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पद से हटाकर नोएडा के राजकीय पीजी कालेज में प्राचार्य बना दिया गया। उस मामले में उनके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय शासन ने वरिष्ठता का आधार बनाते हुए 17 जुलाई को उनको उच्च शिक्षा निदेशक बना दिया गया। जबकि वरिष्ठता सूची में यह तीसरे नंबर है। उच्च शिक्षा में वर्तमान में सबसे वरिष्ठ दीपा अग्रवाल और डॉ भारती दीक्षित है। मोनिका सिंह तीसरे स्थान पर हैं फिर भी इनको शासन ने वरिष्ठ मानते हुए निदेशक बना दिया। वैसे यह वरिष्ठता सूची भी विवादित है और इसका मामला कोर्ट में लंबित है। डॉ. मोनिका सिंह का बयान
कृषक पीजी कालेज मवाना मेरठ मामले में शिकायत हुई थी। उस मामले जवाब दे दिया गया है। मेरे खिलाफ कोई कार्यवाही लंबित नहीं है। जो भी आरोप है, वह मनगढंत है। – डॉ. मोनिका सिंह। वरिष्ठता सूची पर विवाद
उच्च शिक्षा के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची पर लंबे समय से विवाद है। इसका मामला हाईकोर्ट में लंबित है। वरिष्ठता सूची पर 2021 से स्टे है। इसलिए 2017 से लेकर अब तक उच्च शिक्षा में डीपीसी नहीं हुई। डीपीसी न होने के कारण वरिष्ठता का विवाद है। इसलिए निदेशालय में स्थाई निदेशक की तैनाती नहीं हो रही है। पिछले कई वर्ष के कार्यवाहक निदेशक बनाए जा रहे हैं।

