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25 साल बाद फिर गूंजा सेंट कॉनरेड्स का कैंपस

 

खट्टी-मीठी यादों के साथ मना 2001 बैच का सिल्वर जुबली रीयूनियन

देश-विदेश से पहुंचे पूर्व विद्यार्थियों ने शिक्षकों का जताया आभार

ठहाकों, संस्मरणों और भावुक पलों के बीच दोबारा जीया स्कूल जीवन

Baba news 

आगरा। सेंट कॉनरेड्स इंटर कॉलेज के वर्ष 2001 बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने 25 वर्षों बाद अपने प्रिय विद्यालय की चौखट पर कदम रखा तो मानो समय एक बार फिर पीछे लौट गया। कभी कक्षा में साथ बैठने वाले सहपाठी एक-दूसरे से गले मिलते दिखाई दिए तो कहीं पुराने किस्सों पर ठहाके गूंजे। शरारतों, दोस्ती, अनुशासन और गुरुजनों के स्नेह से जुड़ी खट्टी-मीठी यादों को दोबारा जीते हुए सिल्वर जुबली रीयूनियन भावनाओं और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया।
इस विशेष आयोजन में ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूएसए, दुबई सहित अन्य देशों तथा भारत के विभिन्न शहरों से आए पूर्व विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। वर्षों बाद सहपाठियों और शिक्षकों से मिलकर सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे। विद्यालय का प्रत्येक कोना पुरानी यादों को ताजा कर रहा था और हर मुलाकात में अपनत्व झलक रहा था।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य रेव. फादर बिपिन कुजूर, प्रबंधक रेव. फादर ग्रेशियन, सहायक प्रबंधक रेव. फादर लॉरेंस साल्डाना तथा शिक्षकों के आत्मीय स्वागत एवं प्रेरणादायी संबोधन से हुआ। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए पुराने दिनों की कई रोचक घटनाएं साझा कीं। पूर्व विद्यार्थियों ने भी अपने जीवन में शिक्षकों के मार्गदर्शन की भूमिका को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की तथा स्मृति-चिह्न भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रीयूनियन के दौरान कभी पुरानी शरारतों का जिक्र हुआ तो कभी कक्षा के मजेदार प्रसंगों पर सभी खुलकर हंसे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मनोरंजक गतिविधियों, अनुभव साझा करने के सत्र और अनौपचारिक संवाद ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि विद्यालय से मिली शिक्षा, संस्कार और मित्रता आज भी उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
कार्यक्रम संयोजक गौरव खंडेलवाल ने बताया कि सिल्वर जुबली रीयूनियन केवल 25 वर्षों बाद मिलने का अवसर नहीं था, बल्कि उन अनमोल यादों, संस्कारों और मित्रताओं को फिर से जीने का भावनात्मक उत्सव था, जिन्होंने सभी के जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आए पूर्व विद्यार्थियों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि सेंट कॉनरेड्स इंटर कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है, जिसके रिश्ते समय और दूरियों से भी मजबूत बने रहते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से सभी पूर्व छात्र एकत्र हुए। उन्होंने बताया कि सभी पूर्व विद्यार्थियों के ओर से विद्यालय को एक एयर कंडीशनर एवं अन्य सहयोग के लिए राशि भेंट की गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन बैच 2001 की कोर कमेटी ने किया, जिसमें अंकुर अग्रवाल, सीए विपुल बंसल, गौरव खंडेलवाल, अमित खंडेलवाल, पारुल अग्रवाल, दिवाकर पंजवानी, शिष्ट सिक्का एवं विकास मिश्रा शामिल रहे। विद्यालय की शिक्षिका रूपाली शर्मा ने विद्यालय की ओर से आयोजन के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल पर हुई रोचक परिचर्चा

 

भूत नहीं, मानवीय स्मृतियों और अदृश्य अनुभवों की कहानी है यह पुस्तक: संजय के. रॉय
लिट आगरा के मंच पर विज्ञान, अध्यात्म और अलौकिक अनुभवों पर हुआ सार्थक संवाद
बाबा न्यूज
आगरा। लिट आगरा संस्था द्वारा संजय प्लेस स्थित होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में प्रख्यात कला-संस्कृति उद्यमी एवं लेखक संजय के. रॉय की चर्चित पुस्तक ‘देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल ‘ के विमोचन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तक के विमोचन से हुआ। पुस्तक का लोकार्पण सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसपी सिंह, हरविजय बाहिया, डॉ. रंजना बंसल, डॉ. संदीप अग्रवाल, प्रो. निबीर घोष, डॉ. अशोक शर्मा एवं डॉ. राजीव भाटिया ने संयुक्त रूप से किया।
निधि लाल ने कार्यक्रम संचालन के दौरान लेखक संजय के. रॉय का परिचय देते हुए बताया कि वे देश के अग्रणी सांस्कृतिक उद्यमियों में शामिल हैं। वे टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं, जो भारत और विदेशों के अनेक प्रतिष्ठित साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करता है। विश्व के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में शामिल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संस्थापक सदस्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वे सलाम बालक ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी हैं तथा कला एवं संस्कृति से जुड़े अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ब्रिटेन के यॉर्क विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट से भी सम्मानित किया जा चुका है।
परिचर्चा के दौरान नीलम मेहरोत्रा और सुधा कपूर ने लेखक से परा दुनिया, आत्माओं, अलौकिक अनुभवों और अदृश्य संसार से जुड़े अनेक रोचक प्रश्न किए। उनके उत्तर में संजय के. रॉय ने कहा कि उनकी पुस्तक किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देने का प्रयास नहीं है, बल्कि जीवन में घटित उन वास्तविक अनुभवों का ईमानदार दस्तावेज है, जिन्हें उन्होंने स्वयं महसूस किया। उन्होंने बताया कि मात्र पाँच वर्ष की आयु में कोलकाता स्थित अपने पैतृक घर में उन्होंने पहली बार किसी अदृश्य उपस्थिति का अनुभव किया। इसके बाद दिल्ली और फिर भारत तथा विदेशों की यात्राओं के दौरान उन्हें अनेक ऐसे अनुभव हुए, जिन्होंने उन्हें यह सोचने पर विवश किया कि हमारे ज्ञात संसार के समानांतर भी एक ऐसी दुनिया हो सकती है, जिसे विज्ञान अभी पूरी तरह समझ नहीं पाया है।
विज्ञान और पराविज्ञान के संबंध में अपने विचार रखते हुए संजय के. रॉय ने कहा कि विज्ञान का कार्य प्रश्न पूछना और प्रमाण तलाशना है, जबकि मनुष्य के अनेक अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें तत्काल वैज्ञानिक कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। उन्होंने कहा कि हर अनजानी घटना को अंधविश्वास कहकर खारिज कर देना भी उचित नहीं और बिना विवेक के हर बात पर विश्वास करना भी सही नहीं। आवश्यकता खुले मन, जिज्ञासा और संवेदनशील दृष्टि से इन अनुभवों को समझने की है। उन्होंने कहा कि भय से अधिक महत्वपूर्ण है समझ और अनुभव, क्योंकि हर रहस्य के पीछे कोई न कोई मानवीय कहानी छिपी होती है।
लेखक ने बताया कि देयर इस ए घोस्ट इन माय रूम: लिविंग विद द सुपरनेचुरल केवल भूत-प्रेत की कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक संस्मरणात्मक यात्रा है, जिसमें स्मृतियां, यात्राएं, मानवीय रिश्ते, हास्य, रोमांच और जीवन के अनुत्तरित प्रश्न एक साथ चलते हैं। पुस्तक यह संकेत देती है कि शायद हमारे संसार के समानांतर भी एक ऐसा आयाम मौजूद है, जहां स्मृतियां, आत्माएं और ऊर्जा किसी न किसी रूप में विद्यमान रहती हैं। उन्होंने कहा कि आत्माओं को केवल डर का प्रतीक नहीं मानते, बल्कि उन्हें स्मृतियों, अधूरी इच्छाओं और मानवीय भावनाओं से जोड़कर देखते हैं। कहीं वे शरारती हैं, कहीं उदास, तो कहीं अशांत। पुस्तक विज्ञान और अध्यात्म, तर्क और अनुभव के बीच संतुलित संवाद स्थापित करती है और पाठक को यह सोचने पर विवश करती है कि क्या वास्तव में हमारी इंद्रियों से परे भी कोई संसार हो सकता है।
इस अवसर पर पूजा बंसल एवं अनुपम बोहरा ने पुस्तक के चुनिंदा अंशों का प्रभावशाली पाठ किया।
हरविजय बाहिया ने कहा कि आत्मकथा, यात्रा-वृत्तांत और अलौकिक अनुभवों का अनूठा संगम है। इसमें लेखक संजय के रॉय कोलकाता के पैतृक घर से लेकर लुटियंस दिल्ली और भारत सहित विदेशों के अनेक स्थानों पर हुए रहस्यमय अनुभवों का जीवंत वर्णन है।
कार्यक्रम में मनीष बंसल, रजनीश खंडेलवाल, विनोद महेश्वरी, पूनम सचदेवा, राशि गर्ग, कविता अग्रवाल, मोहित महाजन, श्वेता बंसल, दिव्या गोयल आदि उपस्थित रहे।

 

समर्पण की अंताक्षरी प्रतियोगिता में गूंजे सुरों के रंग

बाबा न्यूज
आगरा। भारत विकास परिषद् समर्पण शाखा की ओर से फतेहाबाद रोड स्थित होटल सनरिंग में आयोजित प्रतिभा निखार अंताक्षरी प्रतियोगिता में संगीत, मनोरंजन और उत्साह का शानदार संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगे परिधानों में सजी-धजी महिलाओं ने अपनी टीमों के साथ मंच पर फिल्मी और सदाबहार गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया। वहीं उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रांतीय सचिव सीए विवेक अग्रवाल, उपाध्यक्ष धर्मगोपाल मित्तल, कार्यक्रम प्रभारी सोनम मित्तल, सोनिया गर्ग, पूजा गोयल एवं श्वेता कंसल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
शाखा अध्यक्ष नितिन गोयल ने बताया कि प्रतियोगिता में पहली बार छह टीमों ने एक ही मंच पर अंताक्षरी में भाग लेकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने गीतों के साथ मिमिक्री और फिल्मी संवादों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में मनोरंजन का तड़का भी लगाया।
शाखा सचिव समीर जैन व कोषाध्यक्ष उमंग गोयल ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी छिपी हुई प्रतिभा को मंच प्रदान करना है, ताकि वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी कला का भी प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सौरभ गोयल, विजित गुप्ता, नवनीत गर्ग, प्रदीप सिंघल, विशाल सक्सेना, अंकित गर्ग, रिकेश मित्तल, गोविन्द सुगंधि, अनुज बंसल आदि उपस्थित रहे।

सुंदरकाण्ड के पाठ के साथ टैक्सेशन बार के स्थापना दिवस का शुभारंभ

बाबा न्यूज
आगरा। टैक्सेशन बार एसोसिएशन के 58वें स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ जयपुर हाउस स्थित राज्य कर भवन के बार रूम में वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धापूर्वक किया गया। समारोह का शुभारंभ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राज किशोर खण्डेलवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया।
अध्यक्ष राज किशोर खण्डेलवाल ने बताया कि स्थापना दिवस के प्रथम दिन प्रात: 11 बजे सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया। पाठ का वाचन एवं आयोजन पंडित बृज किशोर खण्डेलवाल के सान्निध्य में संपन्न हुआ। सुंदरकाण्ड पाठ के दौरान पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और उपस्थित अधिवक्ताओं ने भगवान श्री हनुमान से बार की निरंतर प्रगति, संगठन की एकता, सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य एवं न्यायिक कार्यों में सफलता की प्रार्थना की।
महासचिव अखिलेश भटनागर ने बताया कि सुंदरकाण्ड पाठ के उपरांत महाआरती में सभी अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। बड़ी संख्या में कर अधिवक्ताओं एवं बार के सदस्यों ने सहभागिता कर संस्था की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आज रविवार को 58वें स्थापना दिवस समारोह में बार की स्मारिका चिरंतन का विमोचन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल विमोचन करेंगे। समारोह में 50 वर्ष पूर्ण कर चुके वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर इस अवसर पर राम मोहन सिंह कोटिया, अनुराग गुप्ता, परमेंद्र पाल सिंह, अब्दुल अख्तर खान, संचित अग्रवाल, अभिनव बंसल, राकेश सारस्वत, मोहित अग्रवाल, कृष्ण मुरारी अग्रवाल, सुनील आनंद, राजेंद्र प्रसाद दीक्षित, सोमेंद्र जैन, मुनील अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, वैभव जैन, जीएस उप्पल, विशाल बिंदल, मनोज शर्मा, अनिल आदर्श जैन, संजय भटनागर, माधुर अग्रवाल, विजेंद्र अग्रवाल, राजकुमार गोयल, सुनील शर्मा, विनीत जैन, राकेश वर्मा, बरखा यादव, दीपिका राजपूत, रवि कुमार, मनोज त्रिपाठी, भगवान दास, संजीव यादव, गौरव शर्मा, अमित जैन आदि उपस्थित रहे।