डॉक्टर और नर्स 5 लाख में बेचते थे बच्चे:यूपी में डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज की नर्स मिलकर चला रहे बच्चा चोरी का नेटवर्क
यूपी के अलग-अलग जिलों के डॉक्टर और नर्स बच्चा चोरी गैंग चला रहे थे। ये लोग 5-5 लाख रुपए में मासूम बच्चों का सौदा करते थे। पुलिस अब तक बच्चा चोरी रैकेट से जुड़े 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने शनिवार को सीतापुर और लखीमपुर के 2 डॉक्टरों के साथ बरेली के एक मेडिकल कॉलेज की नर्स को भी गिरफ्तार किया है। बरेली की आंवला थाना पुलिस ने पश्चिम बंगाल के नदिया हाल पता यूपी के सीतापुर के महोली थाना क्षेत्र के उलदौली निवासी डॉ संजय कुमार विश्वास (60) को गिरफ्तार किया है। डॉ संजय सीतापुर में अपना हॉस्पिटल चला रहा था। लखीमपुर खीरी के थाना मैगलगंज गांव भगवतीपुर निवासी केशव राम उर्फ मंजेश (31) पुत्र सुरेंद्र कुमार को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। केशव राम उर्फ मंजेश इंटरमीडियट है और करीब 10 साल से अपना क्लिनिक चला रहा था। इसी तरह सीता (38) पत्नी मनोज चौहान निवासी गाजीपुर थाना दातागंज जनपद बदायूं हाल पता रसूलपुर थाना मीरगंज जनपद बरेली को भी गिरफ्तार किया है। सीता बरेली के भोजीपुरा स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में नर्स है। पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर खुलासा किया
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 24 मई 2026 को थाना आंवला के ग्राम मनौना से डेढ़ साल के एक बच्चे के अपहरण की सूचना मिली थी। इसके बाद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दो आरोपियों योगेश और पवन को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उत्तम बाजपेयी नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उत्तम बाजपेयी दलाल के रूप में कार्य करता था और बच्चों की सप्लाई को सुनिश्चित और फैसिलिटेट करने का काम करता था।
आज 30 मई को तीन अन्य आरोपियों संजय, मंजेश और सीता को गिरफ्तार किया गया है। ये तीनों आरोपी मेडिकल फील्ड से संबंधित हैं। इनमें से संजय सीतापुर में एक अस्पताल का संचालन करता है, मंजेश एक फर्जी क्लीनिक चलाता है और सीता एक नर्स के तौर पर कार्य करती है। पूछताछ में सामने आया है कि ये तीनों आरोपी बच्चों की सप्लाई में शामिल थे। अभी तक की जानकारी के अनुसार बच्चों को करीब 5 लाख रुपये में बेचा जाता था। इस गिरोह से संबंधित अन्य बायर तक पहुंचने का भी प्रयास किया जा रहा है।
जांच में अवैध गर्भपात का रैकेट चलने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जो महिलाएं बच्चा गिराना चाहती थीं, उन्हें कुछ पैसे दिए जाते थे और जब वे प्रेग्नेंसी की स्टेज पर पहुंचती थीं, तो ऑपरेशन कर बच्चे को प्राप्त कर आगे बेच दिया जाता था। इस मामले में न्यूबॉर्न बेबी भी शामिल हैं। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। बच्चों की तस्करी करने वाले इस गिरोह के 6 आरोपियों की अलग अलग काम थे। सीता अब तक इन लोगों से लिए गए बच्चों को 5-5 लाख रुपए में बेच चुकी है। तीसरा बच्चा मनौना धाम से अगवा किया गया था। इसे भी बेचने वाले थे लेकिन पुलिस की सक्रियता के चलते इस गैंग का भंडाफोड़ हो गया।
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्यवाही की जाएगी। इसमें अभी कुछ और भी लोगों के नाम सामने आ सकते है। पुलिस गहनता से पूरे मामले की जांच कर रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीओ आंवला नितिन कुमार, आंवला थाने के इंस्पेक्टर बीनू सिंह, सब इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह राघव, धर्मपाल सिंह, हेड कांस्टेबल श्याम सिंह, कांस्टेबल अजय सिंह, कांस्टेबल प्रियांशु और महिला कांस्टेबल छाया मौजूद रही।

