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धार्मिक अनुष्ठान में 51 शिवलिंग पर 51 दंपतियों ने किया विधि-विधान से रुद्राभिषेक

बाबा न्यूज
आगरा। आगरा नरेश श्याम भक्त सेवा समिति द्वारा श्रावण मास के पावन अवसर पर हनुमान मंदिर रामलीला मैदान के पास प्रथम महारुद्राभिषेक महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस दिव्य धार्मिक अनुष्ठान में 51 शिवलिंग 51 दंपतियों ने भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं विश्व कल्याण की कामना की। ब्राह्मणों ने वैदिक रीति से शिवलिंग का महारुद्राभिषेक संपन्न कराया। दुग्ध, दही, घृत, मधु, गंगाजल, पंचामृत, चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा एवं पुष्पों से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। महारूद्राभिषेक अभिषेक आचार्य रजत पांडे द्वारा पूरे विधि विधान से संपन्न कराया।
अध्यक्ष अमन गर्ग ने बताया आगरा नरेश श्याम भक्त सेवा समिति द्वारा प्रथम महारुद्राभिषेक का उद्देश्य समाज में सनातन संस्कृति, धार्मिक संस्कारों और सामूहिक उपासना की परंपरा को सुदृढ़ यह करना है। अनुष्ठान का समापन भगवान भोलेनाथ की भव्य महाआरती के साथ हुआ।
इस अवसर पर मोहित प्रीती ,अनिल कमलेश ,विष्णू वसुदा ,सचिन दिव्या ,मनीष अमिता ,नंदन मोहिता ,अंकित रुबी मनोज प्रीती, मुरारी लाल सुनीता, सौरभ दीप्ति, मनोज सीमा सैनी, आदि भक्त उपस्थित रहे।

नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में गूंजा श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग, भावुक हुए श्रद्धालु

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आगरा। नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन तथा सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया। वृंदावन से पधारे कथावाचक श्री भरत लाल शास्त्री जी महाराज ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए सच्ची मित्रता, प्रेम, त्याग, संतोष और निष्काम भक्ति का महत्व बताया। श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग आते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी भक्ति और प्रेम में कभी कमी नहीं आई। गुरुकुल में साथ शिक्षा प्राप्त करने वाले श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निःस्वार्थ थी। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट के रूप में केवल चावल के कुछ मुट्ठीभर चावल के दाने थे, जिन्हें उन्होंने संकोच के साथ भगवान को अर्पित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की छोटी-सी भेंट में छिपे प्रेम को देखा और उसे अत्यंत प्रसन्नता से स्वीकार किया। सुदामा को देखते ही भगवान श्रीकृष्ण स्वयं दौड़कर उनके पास पहुंचे और अपने मित्र को गले लगा लिया। भगवान ने सुदामा के चरण धोकर उनका सम्मान किया। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची मित्रता में धन, पद और प्रतिष्ठा का कोई स्थान नहीं होता। बताया गया कि सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण से अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उन्हें विश्वास था कि उनका सखा उनके मन की बात बिना कहे ही समझ लेगा। जब वे अपने गांव लौटे तो उनकी झोपड़ी के स्थान पर सुंदर भवन देखकर आश्चर्यचकित रह गए। भगवान श्रीकृष्ण ने उनके जीवन से दरिद्रता दूर कर दी, लेकिन सुदामा के मन में अहंकार नहीं आया। उन्होंने इसे भगवान की कृपा मानकर स्वीकार किया।
श्री भरत लाल शास्त्री जी महाराज ने कहा कि सुदामा चरित्र मनुष्य को सरलता, संतोष और निष्काम भक्ति की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर कमल अग्रवाल, राकेश त्यागी, डॉ. सुरेंद्र सिंह बागोर, विक्रांत कुशवाहा, पार्षद राकेश वर्मा, अरुण, अशोक यादव, विनोद यादव, सुनील यादव, अजय बंसल, हनी अग्रवाल, नितेश अग्रवाल, सनी शर्मा, अनिल चौरसिया, श्रीमती नीतू सिंह, श्रीमती रेखा, बृजेश चौहान, आंसू सिकरवार, श्रीमती उषा यादव, श्रीमती आरती सिंह, श्रीमती प्रीति अग्रवाल, श्रीमती निशा अग्रवाल, मोना अग्रवाल, निशु, गुननु, रुनझुन और पुनना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सावन में शिवमय हुआ श्री खाटू श्याम मंदिर, महा रुद्राभिषेक से गूंजा हर-हर महादेव

 

भोलेनाथ के भव्य श्रृंगार और बाबा श्याम के अलौकिक फूल बंगले ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

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आगरा। सावन मास की पावन बेला में जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर शिव आराधना और श्याम भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना हुआ है। मंदिर में चल रहे सावन विशेष महा रुद्राभिषेक महोत्सव के अंतर्गत वैदिक मंत्रोच्चार, महामृत्युंजय मंत्र और हर-हर महादेव के जयघोष से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
पंडित मुकेश शर्मा, कमल कांत शास्त्री, अनंत उपाध्याय एवं पंकज शास्त्री के मार्गदर्शन में श्री खाटू श्याम जी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश चंद्र अग्रवाल एवं पल्लवी सिंघल ने विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान भोलेनाथ का महा रुद्राभिषेक किया। पंचामृत, गंगाजल एवं विभिन्न पूजन सामग्रियों से भगवान शिव का अभिषेक करते हुए भक्तों ने विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
सावन में शिवलिंग पर अर्पित होती जलधारा और गूंजते रुद्र मंत्र मानो भक्तों की आस्था को सीधे महादेव के चरणों तक पहुंचा रहे थे। शिव आराधना के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ भोलेनाथ के चरणों में नतमस्तक हुए और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
महा रुद्राभिषेक के पश्चात भगवान भोलेनाथ का अत्यंत मनोहारी एवं भव्य श्रृंगार किया गया। पुष्पों, बेलपत्र और आकर्षक श्रृंगार से सजे महादेव के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। शिवालय में सजे फूलों की मनमोहक छटा और दीपों की जगमगाहट ने वातावरण को और भी दिव्य बना दिया।
वहीं श्री खाटू श्याम जी का अलौकिक फूल बंगला भक्तों के आकर्षण का विशेष केंद्र रहा। रंग-बिरंगे पुष्पों से सजे बाबा श्याम के दरबार की दिव्यता देखते ही बन रही थी। फूलों के मध्य विराजमान बाबा श्याम की मनमोहक छवि के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल होते रहे और श्रद्धा से बाबा के चरणों में शीश नवाते रहे।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि सावन मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। इसी आध्यात्मिक भावना के साथ मंदिर में महा रुद्राभिषेक की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। प्रतिवर्ष सावन मास में 108 रुद्राभिषेक कराने का संकल्प लिया जाता है और इस वर्ष भी इसी उद्देश्य से आयोजन निरंतर चल रहा है। प्रतिदिन यजमानों द्वारा विधि-विधान से रुद्राभिषेक कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिव आराधना में सावन की हर बूंद आस्था बनकर महादेव तक पहुंचती है और बाबा श्याम के दरबार में पहुंचकर वही आस्था प्रेम और विश्वास में परिवर्तित हो जाती है। यही कारण है कि सावन के इस पावन अवसर पर मंदिर में शिव भक्ति और श्याम भक्ति का अनुपम वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान कर रहा है।
मंदिर परिसर में प्रतिदिन आकर्षक फूल बंगला एवं विशेष श्रृंगार किया जा रहा है। सावन मास की पूर्णिमा के अवसर पर महा आरती, महा अभिषेक एवं शरबत वितरण का विशेष आयोजन भी किया जाएगा। इसकी तैयारियां मंदिर परिसर में विशेष रूप से की जा रही हैं।

डमरू की थाप पर गूंजा हर-हर महादेव, आगरा में साकार हुआ कैलाश

 

लॉयंस क्लब कॉनराय, लॉयंस क्लब प्रयास एवं ऐरिश एंटरटेनमेंट ने आयोजित किया कैलाश कार्यक्रम
आदियोगी की विराट प्रतिमा, रुद्रपाठ और बाबा मन:कामेश्वर की महाआरती से अलौकिक हुआ सूरसदन; गजेंद्र प्रताप सिंह के भजनों पर शिवभक्ति में झूमे श्रद्धालु
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आगरा। सावन की पावन फुहारों के बीच आगरा नगरी पूरी तरह शिवमय हो उठी। डमरू की गूंज, शंखनाद, रुद्रपाठ, हर-हर महादेव के जयघोष और भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबे भजनों ने सूरसदन प्रेक्षागृह को मानो कैलाश धाम में परिवर्तित कर दिया। मंच पर विराजित बाबा मन:कामेश्वर नाथ के दिव्य स्वरूप और मध्य में स्थापित आदियोगी की विराट प्रतिमा के सानिध्य में सजे भव्य आध्यात्मिक आयोजन कैलाश में श्रद्धालु देर तक शिव आराधना में लीन रहे।
लॉयंस क्लब कॉनराय, लॉयंस क्लब प्रयास एवं ऐरिश एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित इस अनूठी शिवमय संध्या का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग, लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव मनीष अग्रवाल रावी, जिला अध्यक्ष विजय गुप्ता, लॉयंस क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रथम अजय भार्गव, लॉयंस क्लब प्रयास के संस्थापक अध्यक्ष संजीव मित्तल, अशु मित्तल, अल्पना भार्गव, तरुण अग्रवाल, राजीव बंसल, ऐरिश एंटरटेनमेंट के निदेशक पुनीत अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इसके पश्चात डमरू और शंखनाद की मंगल ध्वनि के साथ वातावरण में शिवत्व का संचार हुआ। श्री मन:कामेश्वर मंदिर के तिलकायत श्री महंत योगेश पुरी ने वैदिक विधि-विधान से रुद्रपाठ किया। मंत्रों की गूंज और ह्यहर-हर महादेवह्ण के जयघोष के बीच बाबा मन:कामेश्वर नाथ की प्रसिद्ध आरती हुई। जैसे ही आरती की दिव्य ज्योति से पूरा सभागार आलोकित हुआ, श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा वातावरण अलौकिक आनंद में डूब गया। पुनीत अग्रवाल और इशिता अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।

हजारों वर्ष पुराना है बाबा मन:कामेश्वर मंदिर का इतिहास
महंत योगेश पुरी ने बाबा मन:कामेश्वर नाथ मंदिर की प्राचीन महिमा और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंदिर हजारों वर्षों से सनातन आस्था का केंद्र रहा है। उन्होंने द्वापर युग की पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान नारायण ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, तब अपने आराध्य के दर्शन के लिए भगवान भोलेनाथ कैलाश से पधारे थे। किंतु उस समय यशोदा मैया ने बालक श्रीकृष्ण को किसी अपरिचित साधु के दर्शन कराने से मना कर दिया।
उन्होंने बताया कि इसी प्रसंग से जुड़ी मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने आगरा की पावन धरती पर अपने लिंग स्वरूप की स्थापना की, जो आज श्री मन:कामेश्वर नाथ के रूप में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले देवाधिदेव महादेव के रूप में पूजित हैं। जब गोकुल में बाल स्वरूप श्रीकृष्ण ने अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन की इच्छा व्यक्त की, तब महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि बाबा मन:कामेश्वर की महिमा अनंत है और सावन मास में यहां की जाने वाली शिव आराधना का विशेष महत्व है।

रुद्राष्टक से शुरू हुई भक्ति की सुरमयी यात्रा
कार्यक्रम के सांस्कृतिक चरण में उज्जैन से पधारे लोकप्रिय भजन गायक गजेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी ओजपूर्ण और भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण को शिवमय कर दिया। उन्होंने भगवान भोलेनाथ की स्तुति रुद्राष्टक से अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ किया। उनकी आवाज में गूंजे शिव स्तवन ने श्रोताओं को भक्ति के गहरे रस में डुबो दिया।
इसके बाद अनाहत नाथ बजाओ रे, शिव कैलाशों के वासी, सांसो की माला पर सिमरू मैं शिव का नाम सहित शिव भजनों की ऐसी श्रृंखला चली कि पूरा सभागार हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। कहीं श्रद्धालु हाथ उठाकर भोलेनाथ की आराधना करते दिखाई दिए तो कहीं भक्ति में झूमते नजर आए। गजेंद्र प्रताप सिंह की प्रस्तुति ने सावन की इस आध्यात्मिक संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।

आदियोगी के विराट स्वरूप ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
मंच के मध्य स्थापित आदियोगी की विराट प्रतिमा, बाबा मन:कामेश्वर नाथ का दिव्य स्वरूप, डमरू-शंखनाद, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत ने पूरे आयोजन को एक भव्य आध्यात्मिक अनुभव में बदल दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कैलाश की दिव्यता आगरा की धरती पर उतर आई हो। आयोजन में शिव की महिमा, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर राधा रमण दिगंबर, गीतिका अग्रवाल, तनुजा मांगलिक, विनीत खेड़ा, पुनीत अग्रवाल, अनुज खंडेलवाल, मनीष अग्रवाल, आशीष गर्ग, संजय गुप्ता, निकिता खंडेलवाल, अंकुश बंसल, निक्की बंसल, सौम्या गुप्ता, पूनम अग्रवाल, रूपाली घर, इशिता अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

शिव आराधना, आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हुआ रुद्राभिषेक

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आगरा। भगवान शिव की आराधना, वैदिक मंत्रों की दिव्य गूंज और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच सुनीता गुप्ता एवं डॉ. सुशील गुप्ता के निवास पर रुद्राभिषेक एवं पूजन समारोह श्रद्धा भक्ति के साथ संपन्न हुआ।
आध्यात्मिक आयोजन की श्रृंखला में पिछले आठ दिनों में 21 से अधिक रुद्राभिषेक एवं पूजा-अनुष्ठान संपन्न हुए। इन अनुष्ठानों के लिए बेंगलुरु स्थित आर्ट आॅफ लिविंग आश्रम से ब्रह्मचारी देव चैतन्य, पंडित श्रवण पांडे एवं सचिन मिश्रा विशेष रूप से पधारे और वैदिक विधि-विधान से पूजा-अनुष्ठान संपन्न कराए।
रुद्राभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, शिव स्तुति और सामूहिक प्रार्थना से वातावरण अत्यंत दिव्य एवं भक्तिमय हो उठा। सत्संग के माध्यम से आंतरिक शांति, सेवा, करुणा, सकारात्मकता और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया।
इस आध्यात्मिक यात्रा में वीडीएस कोआॅर्डिनेटर रानी बसलस, कंचन आहूजा, सीमा, जिला शिक्षक समन्वयक मुक्ता चतुवेर्दी, स्टेट टीचर कोआॅर्डिनेटर डॉ. रश्मि मिश्रा, स्टेट चिल्ड्रन एवं टीन कोआॅर्डिनेटर रुचिरा ढल तथा वरिष्ठ शिक्षक सुनील अग्रवाल, नीता शर्मा, ममता रल्ली एवं गायक रवि खुल्लर जी की विशेष सहभागिता रही।
शिव आराधना करुणा और चेतना को जागृत करने का माध्यम: डॉ. सुशील गुप्ता
डॉ. सुशील गुप्ता ने सभी श्रद्धालुओं, संतों, पंडित जी, शिक्षकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिव आराधना केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर शांति, करुणा और चेतना को जागृत करने का माध्यम है। जब सामूहिक रूप से प्रार्थना और सेवा की भावना जागती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम का समापन भगवान शिव से सर्वजन के सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं कल्याण की मंगलकामना के साथ हुआ।

650वीं जयंती वर्ष पर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को समर्पित होगा 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ

 

आठ अगस्त को कैलाश महादेव मंदिर, यमुना तट पर जुटेंगे सैकड़ों श्रद्धालु, आमंत्रण पत्र का हुआ विमोचन

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आगरा। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महासभा द्वारा 8 अगस्त को आयोजित होने वाले 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ की औपचारिक घोषणा करते हुए गुरुवार को संजय प्लेस स्थित होटल पीएल पैलेस में आमंत्रण पत्र का भव्य विमोचन किया गया। इस अवसर पर महासभा के पदाधिकारियों ने संत रविदास जी के समरसता, समानता, मानवता और सामाजिक सद्भाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
महासभा के अध्यक्ष रमेश कर्दम ने बताया कि 8 अगस्त को प्रातः 9:00 बजे कैलाश महादेव मंदिर, यमुना मैया के पावन तट पर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती के अवसर पर 21 कुंडीय समरसता महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। महायज्ञ में 500 से अधिक श्रद्धालु वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कर समाज में समरसता, शांति और भाईचारे की कामना करेंगे। उन्होंने बताया कि महायज्ञ के उपरांत आयोजन स्थल पर ही संत रविदास जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके सामाजिक आदर्शों पर आधारित विचार गोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें विद्वान वक्ता उनके जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालेंगे।
सचिव अभिनव मौर्य ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती पूरे वर्ष विविध कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई जा रही है। इसके अंतर्गत समय-समय पर धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन में जाति-पांति, ऊंच-नीच और भेदभाव का विरोध करते हुए समाज को समानता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। महासभा उन्हीं आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज में एकत्व, समरसता और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रही है।
महासभा के प्रचार प्रमुख विजय सामा ने संत रविदास जी के प्रसिद्ध वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि संत रविदास जी ने बाहरी आडंबरों से अधिक मन की पवित्रता, सत्य, सेवा और सदाचार को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि यदि मन निर्मल हो तो ईश्वर की कृपा हर स्थान पर प्राप्त होती है। यही संदेश आज भी समाज को जोड़ने और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।
आमंत्रण पत्र विमोचन समारोह में महासभा के संरक्षक मानसिंह चौधरी एवं मनोज राजौरा, संघटक मनमोहन निरंकारी, कोषाध्यक्ष सीए संजीव महेश्वरी, उपाध्यक्ष राकेश जाटव, स्वागत महामंत्री हर्ष दिवाकर, सह सचिव डॉ. मीनाक्षी, डॉ. निष्ठा शर्मा, जतिन कुशवाहा, मंगल सिंह, बबीता पाठक, कार्यालय प्रमुख अभिषेक कोटिया, नवीन गौतम, राजेंद्र पाल आदि उपस्थित रहे।
महासभा ने सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों से 8 अगस्त को आयोजित समरसता महायज्ञ एवं विचार गोष्ठी में सहभागिता कर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के समानता, सेवा और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

101 श्रद्धालुओं ने किया भगवान भोलेनाथ का अभिषेक

 

बालक श्रीराम की मनोहारी लीलाओं ने भक्तों को किया भावविभोर
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आगरा। यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में आयोजित नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, महारुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रतिदिन की भांति कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य महारुद्राभिषेक से हुआ। 101 श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से अभिषेक कर परिवार, समाज एवं राष्ट्र के सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
महारुद्राभिषेक में स्वास्तिक हैंडराइटिंग वेलफेयर ट्रस्ट की अध्यक्ष विनीता मित्तल, अंजलि अग्रवाल, शिखा गौतम, रुचि सिंघल, गीता सैनी, राधिका मित्तल, निधि गाबा, अनंत गर्ग, शालू खंडेलवाल, ज्योति मौर्य सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक किया।
संध्या में आयोजित श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस चित्रकूट धाम से पधारे कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं एवं महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ रक्षा प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का बाल स्वरूप हमें सरलता, निष्कपटता, आज्ञाकारिता और संस्कारयुक्त जीवन का संदेश देता है। वहीं महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का प्रसंग यह प्रेरणा देता है कि धर्म और सत्य की रक्षा के लिए सदैव सज्जनों का साथ देना चाहिए तथा अन्याय और अधर्म का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए।
महंत आचार्य पंडित सुनील कुमार वशिष्ठ ने कहा कि भगवान शिव स्वयं करुणा, त्याग और कल्याण के प्रतीक हैं। श्रावण मास में श्रद्धापूर्वक किए गए महारुद्राभिषेक, रुद्र महायज्ञ और शिव पूजन से व्यक्ति के जीवन के समस्त कष्टों का शमन होता है तथा उसे आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर धाम में आयोजित यह महोत्सव केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को धर्म, संस्कार, सेवा और सद्भाव का संदेश देने का माध्यम भी है।
इस अवसर पर राजेश अग्रवाल, पुनीत बागला, मनीष जैन, राजीव जैन, राजेश अग्रवाल, राजीव गुप्ता, रुचि बागला, अशु मित्तल, पंडित रामचरण शर्मा उपस्थित रहे।

 जनकल्याण की कामना के साथ सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का पूणार्हुति हवन संपन्न

महाहवन, पूणार्हुति एवं प्रसादी के साथ हुआ समापन, संतों और श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
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आगरा। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर सूर्यसुता फाउंडेशन द्वारा खंदारी हनुमान चौराहा स्थित नालंदा प्राइड में आयोजित नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का समापन गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दुर्गा सप्तशती के दशांश महाहवन, पूणार्हुति एवं प्रसादी वितरण के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। महायज्ञ के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का 100 बार संपुटित पाठ कर विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति तथा समस्त मानव समाज के सुख-समृद्धि की कामना की गई।
योगी आलोक नाथ (बागेश्वर धाम) ने कहा कि दुर्गा सप्तशती केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदिशक्ति का साक्षात स्वरूप है। गुप्त नवरात्रि में संपुटित सप्तचंडी पाठ और यज्ञ से व्यक्ति के भीतर आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और धर्म के प्रति आस्था का जागरण होता है। उन्होंने कहा कि जब सामूहिक रूप से मां भगवती का स्मरण किया जाता है, तो उसका शुभ प्रभाव पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ता है। विश्व में शांति, सद्भाव और मानव कल्याण की कामना से यह महायज्ञ संपन्न कराया गया है।
सूर्यसुता फाउंडेशन के सचिव पुष्कल गुप्ता ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना भी है। गुप्त नवरात्रि के इस नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ में श्रद्धालुओं की अपार आस्था और सहयोग ने आयोजन को सफल बनाया। उन्होंने कहा कि मां भगवती की कृपा से यह महायज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ और सभी श्रद्धालुओं ने पूणार्हुति एवं प्रसादी में सहभागी होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। संस्था भविष्य में भी जनकल्याण और राष्ट्रहित के ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों का क्रम निरंतर जारी रखेगी।
श्री मन:कामेश्वर मठ मंदिर के श्रीमहंत योगेश पुरी ने कहा कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की आराधना और चंडी यज्ञ से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है। ऐसे आयोजन समाज को सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
हनुमंत धाम मंदिर, लंगड़े की चौकी के महंत गोपी गुरु और भरत उपाध्याय ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। सामूहिक रूप से किए गए मंत्रोच्चार और हवन से वातावरण पवित्र होता है तथा जनकल्याण की भावना मजबूत होती है।
लायंस क्लब इंटरनेशनल के पूर्व डायरेक्टर जितेंद्र चौहान ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ाने वाले ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और सेवा भावना का संदेश देते हैं। विश्व शांति के लिए किया गया यह महायज्ञ अत्यंत प्रेरणादायी है।
इस अवसर पर कैलाश महादेव मंदिर के महंत निर्मल गिरी, गुरु का ताल गुरुद्वारा के बाबा अमरीक सिंह, योगी निर्भय नाथ, अनुज उपाध्याय, अजय राजोरिया, राजदीप ग्रोवर, डॉ दीपेश उपाध्याय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कीर्ति जी आदि उपस्थित रहे।

 

गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर मां पीतांबरा की विशेष आराधना

 


रात्रि हवन में दी गईं बगलामुखी के मंत्रों की आहुति
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आगरा। गुप्त नवरात्र के पावन पर्व पर प्राचीन सीताराम मंदिर, वजीरपुरा में आयोजित नौ दिवसीय विशेष रात्रि हवन एवं मां भगवती की आराधना का क्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ जारी है। अष्टमी तिथि पर मां पीतांबरा (बगलामुखी) की विशेष पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार एवं हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कीं और परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता तथा शत्रु बाधाओं से रक्षा की कामना की।
मंदिर के महंत अनंत उपाध्याय ने कहा कि गुप्त नवरात्र साधकों और शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस अवधि में की गई देवी आराधना, जप, तप, हवन और साधना का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि गुप्त नवरात्र आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और देवी कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर हैं, इसलिए श्रद्धालुओं को पूर्ण श्रद्धा और नियमपूर्वक मां आदिशक्ति की उपासना करनी चाहिए।
महंत अनंत उपाध्याय ने अष्टमी तिथि का महत्व बताते हुए कहा कि इस दिन मां पीतांबरा अर्थात मां बगलामुखी की आराधना का विशेष विधान है। मां बगलामुखी दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं और इन्हें शत्रुओं का स्तंभन करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनकी कृपा से साधक को साहस, आत्मविश्वास, वाणी में प्रभाव, न्यायिक कार्यों में सफलता तथा विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मां की उपासना सदैव धर्म, सत्य और लोककल्याण की भावना से करनी चाहिए।
रात्रि हवन के दौरान वैदिक मंत्रों एवं मां पीतांबरा के मंत्रों के साथ आहुतियां समर्पित की गईं। मंदिर परिसर मां के जयकारों, घंटा-घड़ियाल और शंखनाद से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ हवन में सहभागिता निभाई तथा मां भगवती से सभी के कल्याण की प्रार्थना की।
इस अवसर पर मनीष अग्रवाल, हर्षवर्धन पाठक, मुकेश शर्मा, अरुण उपाध्याय, मनोज अग्रवाल, हनी, बॉबी, डॉ. संजीव नेहरू आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

यमुना तट पर गूंजेगा ‘जय जगन्नाथ’, रथयात्रा महोत्सव का हुआ आगाज

 

आगरा  में पहली बार रथयात्रा निकालने वाले प्राचीन श्री जगन्नाथ महाराज मंदिर में हुआ आमंत्रण पत्र का विमोचन

14 जुलाई को नवयौवन दर्शन एवं नयन उत्सव, 16 जुलाई को होंगे श्री जगन्नाथ जी के रथयात्रा दर्शन और महाप्रसादी

48 वर्ष पुरानी परंपरा को संजोए है यमुना तट का श्री जगन्नाथ मंदिर

बाबा न्यूज 

आगरा। यमुना किनारा, बेलनगंज स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ जी महाराज मंदिर में शनिवार को श्री जगन्नाथ जी रथयात्रा महोत्सव के आमंत्रण पत्र का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं उत्साह का वातावरण रहा। मंदिर के सेवायत, पदाधिकारी एवं श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ जी के जयघोष के साथ आगामी महोत्सव की तैयारियों का शुभारंभ किया।
मंदिर के सेवायत पंडित लक्ष्मण शर्मा ने बताया कि 14 जुलाई (मंगलवार) को भगवान श्री जगन्नाथ जी के नवयौवन दर्शन एवं नयन उत्सव का आयोजन किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से 11 बजे तक महाहवन एवं विशेष पूजा संपन्न होगी। इसके उपरांत सायं 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालुओं को भगवान के नवयौवन स्वरूप के दर्शन कराए जाएंगे। स्नान यात्रा के बाद भगवान के विश्राम उपरांत होने वाले ये दर्शन विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं।
मंदिर की मुखिया सरिता शर्मा ने बताया कि 16 जुलाई (गुरुवार) को श्री जगन्नाथ जी के रथयात्रा दर्शन सायं 4 बजे से रात्रि 11 बजे तक होंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के दिव्य रथ स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे। सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।
मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सीए राकेश अग्रवाल एवं संजीव अग्रवाल ने बताया कि यह मंदिर लगभग दो सौ वर्ष पुराना है और आगरा की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में प्रमुख स्थान रखता है। उन्होंने बताया कि सन 1978 में आगरा में पहली बार श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा इसी मंदिर से निकाली गई थी। उस समय भगवान का रथ नगर भ्रमण करता था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते थे।
उन्होंने बताया कि बाद के वर्षों में विभिन्न परिस्थितियों एवं स्थान के अभाव के कारण रथयात्रा का नगर भ्रमण नियमित रूप से नहीं हो सका। उस ऐतिहासिक रथ को आज भी मंदिर परिसर में सुरक्षित एवं सहेजकर रखा गया है, जो इस मंदिर की गौरवशाली परंपरा का साक्षी है।
उन्होंने यह भी बताया कि श्री जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) के बाद आगरा में स्थापित यह पहला श्री जगन्नाथ मंदिर माना जाता है, जहां आज भी प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान की पूजा-अर्चना एवं उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्री जगन्नाथ के नवयौवन दर्शन, रथयात्रा दर्शन एवं महाप्रसादी का लाभ लेने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर आनंद अग्रवाल, तरंग सिंघल, पवन सिंघल, आदर्श नंदन गुप्त, सारंग सिंघल, चिराग शर्मा, स्नेहा शर्मा आदि उपस्थित रहे।