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श्रद्धा दुबे बुर्का पहनकर पुलिस को चकमा देती रही:गुमराह करने के लिए नेपाल जाकर वापस आ गई; लखनऊ-आगरा के लो बजट होटल में ठहरती रही

श्रद्धा दुबे…9 अक्टूबर की रात फरार हुई। अगले दिन बहराइच में भारत-नेपाल बॉर्डर पहुंची। अपनी गाड़ी छोड़ दी। नेपाल में अलग-अलग जगहों पर रही। 12 घंटे के अंतराल पर तीन वीडियो जारी किया। सीसीटीवी फुटेज में दिखी। नेपाल से वापस अपने घर यानी रायबरेली पहुंची। यहां एक न्यूज एजेंसी को इंटरव्यू दिया। इसके बाद फिर से फरार हो गई। दूसरी तरफ पुलिस पर उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार प्रेशर बनता रहा। DCP सेंट्रल विक्रांत वीर, ACP हजरतगंज रजनीश वर्मा, थाना प्रभारी विक्रम सिंह को हटा दिया गया। आखिरकार 11 दिन बाद यूपी STF ने श्रद्धा को पकड़ लिया। ये गिरफ्तारी महाराष्ट्र के नागपुर से हुई। अब सवाल है कि आखिर श्रद्धा 11 दिनों तक पुलिस को कैसे चमका देती रही? इस सवाल का कुछ जवाब एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने दिया। कुछ सवाल अभी भी ऐसे हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पाए। सबसे पहले यह जानते हैं कि श्रद्धा इतने दिनों तक कैसे बचती रही…. टैक्सी का इस्तेमाल कम, प्राइवेट गाड़ियों से किया सफर 9 अक्टूबर को शिवा की मौत के बाद श्रद्धा ने बहराइच के रूपईडीहा तक का सफर अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से किया। गाड़ी को बॉर्डर पर शुक्ला पार्किंग में छोड़कर वह 10 अक्टूबर की सुबह 6 बजे नेपाल में दाखिल हो गई। नेपाल से लौटकर वह वापस यूपी आ गई। पुलिस कैसे भागे हुए लोगों को ट्रेस करती है? ये श्रद्धा को मालूम था, इसलिए वह हर दिन अपनी लोकेशन बदल रही थी। एडीजी (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने बताया कि फरार होने के बाद वह प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल ज्यादा करती थी। कभी लिफ्ट लेती थी, कभी होटल के स्टाफ से कहकर बुकिंग करवा लेती थी। वह इतनी शातिर थी कि टोल क्रॉस करने के बाद गाड़ी बदल देती थी। ताकि अगर टोल के CCTV में गाड़ी दिख जाए, तो ट्रेसिंग करने वाली टीम कभी श्रद्धा तक न पहुंच सके। श्रद्धा ड्राइवर के आधार पर होटल बुक करती रही 11 अक्टूबर को नेपाल के महिमनगर में वह ई-रिक्शा पर दिखी। इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। इसमें श्रद्धा के साथ उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर आमिर भी दिखा था। यहां इन लोगों ने लो बजट होटल को चुना था, उसमें ड्राइवर ने अपना आधार कार्ड दिया था। श्रद्धा की पहली रात इसी होटल में बीती। इसके अगले दिन श्रद्धा यहां से निकल गई। वह नेपाल के दांग जिले में पहुंची। यहां श्रद्धा ने अपना फोन खोला था, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बंद कर दिया। इसके बाद उसने नेपाल की सिम के जरिए लोगों से संपर्क किया। हालांकि जिस वक्त उसने फोन खोला था, उस वक्त की लोकेशन पुलिस के पास पहुंच गई थी, इसके अगले दिन श्रद्धा ने वह लोकेशन छोड़ दी थी। अरेस्टिंग के बाद सामने आया कि श्रद्धा 11 दिनों की फरारी में 5 अलग-अलग होटल में रही। नेपाल से सीधा रायबरेली पहुंची, फिर लखनऊ श्रद्धा ने 15 अक्टूबर को नेपाल छोड़ दिया और कुशीनगर के रास्ते यूपी में दाखिल हो गई। 16 अक्टूबर को वह सीधे रायबरेली पहुंची। उसको अंदाजा था कि वो सीसीटीवी में नजर आ सकती है, इसलिए उसने रायबरेली बस स्टेशन पर उस गाड़ी को छोड़ दिया, जिसके जरिए वह नेपाल से आई थी। दूसरी टैक्सी से सारस तिराहा पहुंची और वहां से किराए पर आर्टिगा कार बुक की। बताया जाता है कि एक सट्टा व्यापारी से मिलने के लिए श्रद्धा रायबरेली गई थी। इस मुलाकात के बाद रात करीब 12 बजे वो लखनऊ पहुंच गई। श्रद्धा ने लखनऊ में ही न्यूज एजेंसी को बाइट दी, इसमें खुद को बेगुनाह बताया। उसी दिन अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद श्रद्धा फिर से फरार हो गई। पुलिस सोर्स के मुताबिक, वह लखनऊ से सीधे आगरा पहुंची और आगरा के ओम पैलेस होटल में 24 घंटे तक ठहरी रही। इस दौरान उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर आमिर भी साथ रहे। श्रद्धा पुलिस से बचने के लिए हर जगह बुर्का पहनती थी। बताया जा रहा है कि श्रद्धा ने आगरा में एक वकील से भी मुलाकात की थी। आगरा में रुकने के बाद ये लोग झांसी के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर निकल गए। पूरे रास्ते तीनों ने ही अपने फोन का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इनके पास एक अलग फोन था, उसके जरिए ये कुछ लोगों से संपर्क करते थे, जो इन्हें हिदायत देते थे। इनके लिए वकील और न्यूज एजेंसी में बाइट दिलवाई। मदद करने वाले कौन लोग हैं, ये पुलिस पूछताछ में पता लगेगा।

अदालत में पेश करने के लिए सबूत जुटाती रही श्रद्धा अमिताभ यश ने बताया कि श्रद्धा को पुलिस वर्किंग की जानकारी थी। अदालत में किस तरह के सबूत पेश किए जाते हैं, ये श्रद्धा को मालूम था। इसलिए उसने शिवा शर्मा के कई वीडियो बनाकर रखे थे। जिन्हें शिवा की मौत के बाद वो जारी करती रही।
अब ऐसा भी माना जा रहा है कि कोई पुलिस अधिकारी या कर्मचारी उसको गाइड कर रहा था? क्योंकि ये पहले ही सामने आ चुका है कि श्रद्धा के कनेक्शन ब्यूरोक्रेसी से लेकर पुलिस महकमे तक रहा है। पुलिस और एसटीएफ की नाक के नीचे से हुई ‘गायब’ श्रद्धा ने शनिवार को हाईकोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की थी। यहीं उसने एक एजेंसी को बाइट दी। बाइट मीडिया पर चलने के बाद जब तक पुलिस अलर्ट होती और श्रद्धा को पकड़ने की कोशिश करती तब तक श्रद्धा फिर फरार हो चुकी थी। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस हाईकोर्ट में श्रद्धा एंटीसिपेटरी बेल दाखिल करने आई थी, वहां पुलिस की सुरक्षा है। साथ ही हाईकोर्ट से यूपी एसटीएफ की दूरी भी एक किलोमीटर से कम है। ऐसे में पुलिस और एसटीएफ की नाक के नीचे तक आकर श्रद्धा कैसे बच गई, ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है। ————- ये पढ़ें – लिवइन पार्टनर की हत्या की आरोपी मॉडल श्रद्धा गिरफ्तार:11 दिन से फरार थी, यूपी एसटीएफ ने बहन-ड्राइवर के साथ नागपुर से पकड़ा लखनऊ के करोड़पति कारोबारी शिवा शर्मा हत्या की आरोपी लिवइन पार्टनर मॉडल श्रद्धा दुबे को मंगलवार को नागपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। श्रद्धा पर 50 हजार का इनाम था। वह 11 दिन से फरार थी। दावा है कि वह लखनऊ से सीतापुर होते हुए बहराइच के रास्ते नेपाल पहुंच गई थी। 18 अक्टूबर को नेपाल से वापस यूपी लौट आई। उसने ANI न्यूज एजेंसी को इंटरव्यू दिया। श्रद्धा ने कहा- मैंने शिवा की हत्या नहीं की है। शिवा मेरी आंखों के सामने बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदा था। पढ़िए पूरी खबर…

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