Breaking News
बाराबंकी में मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक:पत्नी से झगड़े के बाद पहुंचा, 4 घंटे समझाने के बाद नीचे उतरा

बाराबंकी के बड्डूपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। बाबा कुटी कस्बे के पास हुई इस घटना से हड़कंप मच गया। युवक चार घंटे से ज्यादा समय तक टावर पर रहा। पुलिस और स्थानीय लोगों के समझाने के बाद वह मंगलवार शाम 6 बजे सुरक्षित नीचे उतर आया। सीतापुर का रहने वाला है युवक युवक की पहचान सीतापुर जिले के सदरपुर थाना क्षेत्र के समनापुर निवासी रोहित पुत्र इंद्रेश के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पत्नी से विवाद के चलते उसके टावर पर चढ़ने की आशंका है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और स्थानीय लोगों ने समझाया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने लगातार समझाइश दी। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद युवक नीचे उतरने को राजी हुआ। उसके सुरक्षित उतरने पर पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।

श्रद्धा दुबे बुर्का पहनकर पुलिस को चकमा देती रही:गुमराह करने के लिए नेपाल जाकर वापस आ गई; लखनऊ-आगरा के लो बजट होटल में ठहरती रही

श्रद्धा दुबे…9 अक्टूबर की रात फरार हुई। अगले दिन बहराइच में भारत-नेपाल बॉर्डर पहुंची। अपनी गाड़ी छोड़ दी। नेपाल में अलग-अलग जगहों पर रही। 12 घंटे के अंतराल पर तीन वीडियो जारी किया। सीसीटीवी फुटेज में दिखी। नेपाल से वापस अपने घर यानी रायबरेली पहुंची। यहां एक न्यूज एजेंसी को इंटरव्यू दिया। इसके बाद फिर से फरार हो गई। दूसरी तरफ पुलिस पर उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार प्रेशर बनता रहा। DCP सेंट्रल विक्रांत वीर, ACP हजरतगंज रजनीश वर्मा, थाना प्रभारी विक्रम सिंह को हटा दिया गया। आखिरकार 11 दिन बाद यूपी STF ने श्रद्धा को पकड़ लिया। ये गिरफ्तारी महाराष्ट्र के नागपुर से हुई। अब सवाल है कि आखिर श्रद्धा 11 दिनों तक पुलिस को कैसे चमका देती रही? इस सवाल का कुछ जवाब एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने दिया। कुछ सवाल अभी भी ऐसे हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पाए। सबसे पहले यह जानते हैं कि श्रद्धा इतने दिनों तक कैसे बचती रही…. टैक्सी का इस्तेमाल कम, प्राइवेट गाड़ियों से किया सफर 9 अक्टूबर को शिवा की मौत के बाद श्रद्धा ने बहराइच के रूपईडीहा तक का सफर अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से किया। गाड़ी को बॉर्डर पर शुक्ला पार्किंग में छोड़कर वह 10 अक्टूबर की सुबह 6 बजे नेपाल में दाखिल हो गई। नेपाल से लौटकर वह वापस यूपी आ गई। पुलिस कैसे भागे हुए लोगों को ट्रेस करती है? ये श्रद्धा को मालूम था, इसलिए वह हर दिन अपनी लोकेशन बदल रही थी। एडीजी (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने बताया कि फरार होने के बाद वह प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल ज्यादा करती थी। कभी लिफ्ट लेती थी, कभी होटल के स्टाफ से कहकर बुकिंग करवा लेती थी। वह इतनी शातिर थी कि टोल क्रॉस करने के बाद गाड़ी बदल देती थी। ताकि अगर टोल के CCTV में गाड़ी दिख जाए, तो ट्रेसिंग करने वाली टीम कभी श्रद्धा तक न पहुंच सके। श्रद्धा ड्राइवर के आधार पर होटल बुक करती रही 11 अक्टूबर को नेपाल के महिमनगर में वह ई-रिक्शा पर दिखी। इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। इसमें श्रद्धा के साथ उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर आमिर भी दिखा था। यहां इन लोगों ने लो बजट होटल को चुना था, उसमें ड्राइवर ने अपना आधार कार्ड दिया था। श्रद्धा की पहली रात इसी होटल में बीती। इसके अगले दिन श्रद्धा यहां से निकल गई। वह नेपाल के दांग जिले में पहुंची। यहां श्रद्धा ने अपना फोन खोला था, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बंद कर दिया। इसके बाद उसने नेपाल की सिम के जरिए लोगों से संपर्क किया। हालांकि जिस वक्त उसने फोन खोला था, उस वक्त की लोकेशन पुलिस के पास पहुंच गई थी, इसके अगले दिन श्रद्धा ने वह लोकेशन छोड़ दी थी। अरेस्टिंग के बाद सामने आया कि श्रद्धा 11 दिनों की फरारी में 5 अलग-अलग होटल में रही। नेपाल से सीधा रायबरेली पहुंची, फिर लखनऊ श्रद्धा ने 15 अक्टूबर को नेपाल छोड़ दिया और कुशीनगर के रास्ते यूपी में दाखिल हो गई। 16 अक्टूबर को वह सीधे रायबरेली पहुंची। उसको अंदाजा था कि वो सीसीटीवी में नजर आ सकती है, इसलिए उसने रायबरेली बस स्टेशन पर उस गाड़ी को छोड़ दिया, जिसके जरिए वह नेपाल से आई थी। दूसरी टैक्सी से सारस तिराहा पहुंची और वहां से किराए पर आर्टिगा कार बुक की। बताया जाता है कि एक सट्टा व्यापारी से मिलने के लिए श्रद्धा रायबरेली गई थी। इस मुलाकात के बाद रात करीब 12 बजे वो लखनऊ पहुंच गई। श्रद्धा ने लखनऊ में ही न्यूज एजेंसी को बाइट दी, इसमें खुद को बेगुनाह बताया। उसी दिन अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद श्रद्धा फिर से फरार हो गई। पुलिस सोर्स के मुताबिक, वह लखनऊ से सीधे आगरा पहुंची और आगरा के ओम पैलेस होटल में 24 घंटे तक ठहरी रही। इस दौरान उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर आमिर भी साथ रहे। श्रद्धा पुलिस से बचने के लिए हर जगह बुर्का पहनती थी। बताया जा रहा है कि श्रद्धा ने आगरा में एक वकील से भी मुलाकात की थी। आगरा में रुकने के बाद ये लोग झांसी के रास्ते महाराष्ट्र के नागपुर निकल गए। पूरे रास्ते तीनों ने ही अपने फोन का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इनके पास एक अलग फोन था, उसके जरिए ये कुछ लोगों से संपर्क करते थे, जो इन्हें हिदायत देते थे। इनके लिए वकील और न्यूज एजेंसी में बाइट दिलवाई। मदद करने वाले कौन लोग हैं, ये पुलिस पूछताछ में पता लगेगा।

अदालत में पेश करने के लिए सबूत जुटाती रही श्रद्धा अमिताभ यश ने बताया कि श्रद्धा को पुलिस वर्किंग की जानकारी थी। अदालत में किस तरह के सबूत पेश किए जाते हैं, ये श्रद्धा को मालूम था। इसलिए उसने शिवा शर्मा के कई वीडियो बनाकर रखे थे। जिन्हें शिवा की मौत के बाद वो जारी करती रही।
अब ऐसा भी माना जा रहा है कि कोई पुलिस अधिकारी या कर्मचारी उसको गाइड कर रहा था? क्योंकि ये पहले ही सामने आ चुका है कि श्रद्धा के कनेक्शन ब्यूरोक्रेसी से लेकर पुलिस महकमे तक रहा है। पुलिस और एसटीएफ की नाक के नीचे से हुई ‘गायब’ श्रद्धा ने शनिवार को हाईकोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की थी। यहीं उसने एक एजेंसी को बाइट दी। बाइट मीडिया पर चलने के बाद जब तक पुलिस अलर्ट होती और श्रद्धा को पकड़ने की कोशिश करती तब तक श्रद्धा फिर फरार हो चुकी थी। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस हाईकोर्ट में श्रद्धा एंटीसिपेटरी बेल दाखिल करने आई थी, वहां पुलिस की सुरक्षा है। साथ ही हाईकोर्ट से यूपी एसटीएफ की दूरी भी एक किलोमीटर से कम है। ऐसे में पुलिस और एसटीएफ की नाक के नीचे तक आकर श्रद्धा कैसे बच गई, ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है। ————- ये पढ़ें – लिवइन पार्टनर की हत्या की आरोपी मॉडल श्रद्धा गिरफ्तार:11 दिन से फरार थी, यूपी एसटीएफ ने बहन-ड्राइवर के साथ नागपुर से पकड़ा लखनऊ के करोड़पति कारोबारी शिवा शर्मा हत्या की आरोपी लिवइन पार्टनर मॉडल श्रद्धा दुबे को मंगलवार को नागपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। श्रद्धा पर 50 हजार का इनाम था। वह 11 दिन से फरार थी। दावा है कि वह लखनऊ से सीतापुर होते हुए बहराइच के रास्ते नेपाल पहुंच गई थी। 18 अक्टूबर को नेपाल से वापस यूपी लौट आई। उसने ANI न्यूज एजेंसी को इंटरव्यू दिया। श्रद्धा ने कहा- मैंने शिवा की हत्या नहीं की है। शिवा मेरी आंखों के सामने बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदा था। पढ़िए पूरी खबर…

जेपीएस बोले- 2027 में सपा का आखिरी चुनाव साबित होगा:गठबंधन रहा तो 2032 में भाजपा और कांग्रेस के बीच होगा मुकाबला

हरदोई में सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव सपा का आखिरी चुनाव साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन बना रहा तो सपा पूरी तरह साफ हो जाएगी। वर्ष 2032 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रह जाएगा। वह मंगलवार को हरदोई के जीआईसी मैदान में क्षत्रिय महासभा की ओर से आयोजित विजयदशमी उत्सव एवं मेधा अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम दोपहर करीब एक बजे शुरू हुआ और शाम 3:30 बजे तक चला। कार्यक्रम में सांसद जयप्रकाश, सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह और क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने मंत्री जेपीएस राठौर और मध्य प्रदेश के रीवा-गुढ़ से आए विधायक नागेंद्र सिंह का स्वागत किया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री जेपीएस राठौर ने समाज के लोगों से शिक्षा को प्राथमिकता देने और कर्मशील बनने का आह्वान किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए सहनशीलता अपनाने और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी। मुख्य अतिथि विधायक नागेंद्र सिंह ने क्षत्रिय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षत्रियों के शौर्य और त्याग के बिना भारत के इतिहास की कल्पना नहीं की जा सकती। तेरहवीं में फिजूलखर्ची रोकने और विधवा बहुओं के पुनर्विवाह पर जोर क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने तेरहवीं के आयोजन में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने और असामयिक रूप से विधवा हुई बहुओं के पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने हरदोई में महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका की ओर से सिनेमा चौराहे पर प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव मंजूर होने के बावजूद प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी। इससे क्षत्रिय समाज में नाराजगी है। कार्यक्रम में राजा बक्श सिंह, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष सिंह सोमवंशी, कर्मवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह मल्हेरा, दीपू सिंह और कमलेंद्र सिंह सहित कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे।

मैनपुरी में युवक की संदिग्ध हालात में मौत:गले पर मिला फंदे का निशान, परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे

मैनपुरी में मंगलवार शाम करीब 4 बजे 40 साल के अपूर्व दीक्षित को परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, युवक के गले पर फंदे का निशान था। प्रारंभिक जानकारी में फांसी लगाने की बात सामने आई है। हालांकि, मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। परचून की दुकानों पर सामान सप्लाई करते थे मृतक की पहचान अपूर्व दीक्षित पुत्र सुभाष दीक्षित, निवासी जेल चौराहे के पास, मैनपुरी के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, वह परचून की दुकानों पर सामान सप्लाई करने का काम करते थे। अस्पताल लाए जाने के समय वह अर्धनग्न अवस्था में थे। उनके गले पर फंदे का निशान होने की बात भी सामने आई है। परिजनों ने कुछ भी कहने से किया इनकार युवक की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। परिजनों ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। तहरीर मिलने पर होगी कार्रवाई: सीओ सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों की ओर से अभी तक कोई प्रार्थना पत्र या तहरीर नहीं मिली है। युवक की मौत के कारणों के बारे में भी फिलहाल जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम या अन्य कानूनी प्रक्रिया के लिए प्रार्थना पत्र मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रक में घुसी कार, युवक की मौत:तीन घायल, ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के लिए दिल्ली से मथुरा आ रहे थे

मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर सोमवार देर रात करीब एक बजे सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 85 के समीप दिल्ली से मथुरा आ रही एक कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना में कार सवार एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसके तीन साथी घायल हो गए। चारों युवक मथुरा में होने वाले ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के संचालन के लिए आ रहे थे। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एक्सप्रेसवे के बचावकर्मी मौके पर पहुंच गए। जानकारी के अनुसार, दक्षिण दिल्ली के बसंत कुंज निवासी राजेश अपने साथी पीयूष शर्मा, विनय सिंह और दक्ष के साथ सोमवार रात दिल्ली से कार में मथुरा के लिए रवाना हुए थे। मथुरा में आयोजित होने वाले ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी के सिलसिले में चारों युवक आ रहे थे। कार पीयूष शर्मा चला रहे थे। बताया गया कि रात करीब एक बजे जब उनकी कार यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 85 के पास पहुंची, तभी अचानक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना में राजेश की मौत हो गई, जबकि पीयूष शर्मा, विनय सिंह और दक्ष घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया हादसे की सूचना मिलने पर थाना सुरीर के प्रभारी अरुण कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एक्सप्रेसवे के बचावकर्मियों ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया। वहीं, मृतक राजेश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। ‘हमारे राम’ कार्यक्रम में शामिल होने और उसके संचालन के लिए मथुरा आ रहे युवकों के साथ हुए इस हादसे से कार्यक्रम से जुड़े लोगों में शोक का माहौल है। पुलिस दुर्घटना के संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर रही है।