आगरा में 70 करोड़ के फर्जी GST बिलिंग रैकेट पकड़ा:तीन आरोपी गिरफ्तार, ITC घोटाला कर राजस्व को पहुंचाया जा रहा था नुकसान
आगरा में फर्जी फर्मों के माध्यम से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े जीएसटी फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। लोहामंडी थाना पुलिस, साइबर सेल और काउंटर इंटेलिजेंस टीम की संयुक्त कार्रवाई में 70 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग रैकेट का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों का जीएसटी पंजीकरण कराकर अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास ऑन करने का खेल चला रहे थे। राज्य कर विभाग की शिकायत पर वर्ष 2025 में थाना लोहामंडी में अपराध संख्या 223 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ व्यक्तियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया गया और उसके माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जी बिल जारी किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान ओम ट्रेडर्स और श्रीराम ट्रेडर्स नामक फर्मों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि इन फर्मों का इस्तेमाल केवल कागजों पर कारोबार दिखाने और फर्जी इनवॉइस तैयार करने के लिए किया जा रहा था। इनके जरिए विभिन्न व्यापारिक संस्थानों को अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ पहुंचाया जा रहा था। तीन आरोपी गिरफ्तार संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए रजत बनर्जी, राहुल और नितिन को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके आधार पर पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है। फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल का नेटवर्क जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी फर्मों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक व्यापारिक लेन-देन दर्शाया जाता था, जबकि वस्तुतः कोई माल का आवागमन नहीं होता था। इस प्रक्रिया के जरिए अवैध रूप से आईटीसी का लाभ लिया और दिलाया जाता था। मोबाइल, लैपटॉप और फर्जी मोहरें बरामद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और 10 फर्जी मोहरें बरामद की हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन उपकरणों और मोहरों का उपयोग फर्जी दस्तावेज तैयार करने, फर्मों का संचालन दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने के लिए किया जाता था। 70 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग के साक्ष्य अब तक की जांच में करीब 70 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जनरेट किए जाने के तथ्य सामने आए हैं। पुलिस और राज्य कर विभाग इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ और किन-किन लोगों को इसका लाभ पहुंचाया गया। अन्य संदिग्धों की तलाश जारी एडीसीपी सिटी हिमांशु गौरव ने बताया कि पूछताछ के दौरान कई अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है और जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी है।

