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डीईआई में दिया जाता है अनुशासन, सेवा, आत्मविकास और संतुलित जीवन मूल्य को विशेष महत्व

 

बाबा न्यूज
आगरा। प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन, मानसिक संतुलन और समग्र कल्याण का संदेश देता है। योग भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का आधार माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप दयालबाग की जीवनशैली तथा दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) की शैक्षणिक एवं शोध संस्कृति में अनुशासन, सेवा, आत्मविकास और संतुलित जीवन मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।

भगवद्गीता का संदेश “योगः कर्मसु कौशलम्” अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग है। यही भावना दयालबाग की दिनचर्या में भी परिलक्षित होती है, जहाँ योग केवल आसनों तक सीमित न रहकर जीवन जीने की एक समग्र पद्धति के रूप में देखा जाता है। दयालबाग में प्रतिदिन बच्चों को योगाभ्यास एवं सरल आसनों का प्रशिक्षण दिया जाता है तथा नियमित योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

दयालबाग की आध्यात्मिक परंपरा में सहज सुरत-शब्द योग का विशेष महत्व है। प्रातःकालीन ध्यान एवं साधना के माध्यम से मन की एकाग्रता, आत्मचिंतन तथा आंतरिक शांति के विकास पर बल दिया जाता है। भारतीय योग परंपरा के विभिन्न आयामों के साथ यह साधना व्यक्ति के मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास में सहायक मानी जाती है।

दयालबाग की जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यहाँ संतुलित जीवन, नियमित योगाभ्यास, व्यायाम, प्रकृति के निकट रहकर कार्य करना तथा सेवा-भाव से किए जाने वाले शारीरिक श्रम को स्वस्थ जीवनशैली के आवश्यक अंग के रूप में अपनाया जाता है। कृषि कार्यों में सहभागिता, सामुदायिक श्रम तथा नियमित शारीरिक गतिविधियाँ शरीर को सक्रिय रखने के साथ सहयोग, अनुशासन और उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करती हैं।

निस्वार्थ सेवा, सादगी और अनुशासन दयालबाग की कार्यसंस्कृति के प्रमुख आधार हैं। समाजहित में किए जाने वाले कार्य, सामूहिक उत्तरदायित्व तथा सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन व्यक्ति के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति जागरूकता भी दयालबाग की जीवनशैली का महत्वपूर्ण पक्ष है। स्वच्छ एवं हरित वातावरण, जैविक खेती, सौर ऊर्जा के उपयोग तथा प्रकृति के अनुरूप दिनचर्या के माध्यम से पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी जीवनशैली को प्रोत्साहित किया जाता है। प्रकृति के साथ सामंजस्य मानसिक शांति एवं संतुलित जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के पीएचडी शोधार्थियों ने भी योग, शोध और जीवन मूल्यों के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। उनका मानना है कि सच्चा शोध केवल प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के आंतरिक विकास, मानसिक संतुलन, नैतिक मूल्यों और समाज के कल्याण से भी जुड़ा होता है।

 

भौतिकी विभाग के पीएचडी शोधार्थी संत सरन ने कहा कि डीईआई में शोध करना उनके लिए केवल एक अकादमिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मविकास की यात्रा है। उन्होंने कहा कि डीईआई की शोध संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का आत्मीय और सहयोगी वातावरण है। यहाँ पीएचडी गाइड केवल अकादमिक मार्गदर्शन ही नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, सहयोगी और संरक्षक की भूमिका भी निभाते हैं तथा शोध की कठिन परिस्थितियों में निरंतर संवाद, प्रोत्साहन और सहयोग प्रदान करते हैं।

 

संस्कृत विभाग की शोधार्थी ग़ज़ल माथुर ने कहा कि शोध केवल नए ज्ञान की खोज नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के दृष्टिकोण, धैर्य तथा जीवन को समझने की क्षमता का भी विकास करता है।

 

शोधार्थी निकिता सत्संगी ने कहा कि पीएचडी के दौरान अनेक चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन दयालबाग का सकारात्मक वातावरण, योग तथा ज्ञान पर आधारित नियमित दिनचर्या मानसिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करती है।

 

शोधार्थी दीक्षा शर्मा ने कहा कि डीईआई का वातावरण विद्यार्थियों को बेहतर शोधकर्ता बनने के साथ-साथ बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। यहाँ ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा नैतिक मूल्यों का भी विकास होता है।

 

संस्कृत विभाग की शोधार्थी पूनम सिंह ने कहा कि दयालबाग की जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य को सर्वोपरि माना जाता है तथा यहाँ की नियमित दिनचर्या में प्रतिदिन योग को विशेष महत्व दिया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर डीईआई के पीएचडी शोधार्थियों ने यह संदेश दिया कि जब शोध में ज्ञान के साथ साधना, अनुशासन, योग, सेवा और मानवीय मूल्यों का समावेश होता है, तब शिक्षा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान का माध्यम बन जाती है।

फार्मासिस्ट भर्ती पदोन्नति का नोटिफिकेशन उत्तर प्रदेश में भी जारी किया जाए : डा.रविंद्र सिंह राणा

बाबा न्यूज
आगरा। भारत सरकार के अनुमोदन से फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया द्वारा “फार्मासिस्ट भर्ती पदोन्नति और सेवा दिन में 2025 ” का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसमें फार्मेसी अधिकारी और वेतनमान 46 00 ग्रेड पे से शुरुआत होगी। पदोन्नति के बाद वरिष्ठ फार्मेसी अधिकारी 4800 ग्रेड पे सहायक मुख्य फार्मेसी अधिकारी 5400 ग्रेड पे मुख्य फार्मेसी अधिकारी 5400 जिला फार्मेसी अधिकारी/ उपनिदेशक फार्मेसी 6600 ग्रेड पे संयुक्त निदेशक फार्मेसी 7600 ग्रेड पे के पद होंगे। इसके अलावा दो पदों का सृजन किया गया है जिसमें दवा सूचना अधिकारी एवं क्लिनिकल फार्मेसी अधिकारी जो डॉक्टर के साथ बैठकर मरीज को दवा प्रिसक्राइब करेंगे। स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देंगे। डॉक्टर मरीज को देखकर बीमारी डायग्नोज करेंगे। क्लिनिकल फार्मेसी अधिकारी दवा प्रिसक्राइब करेंगे ऐसा प्रावधान इस बजट नोटिफिकेशन में किया गया है। सभी पदों के हिसाब से कार्य दायित्व भी सौंप गए हैं, जिसमें दवाइयां के रखरखाव से लेकर गुणवत्ता उपलब्धता एवं स्वास्थ्य की जानकारी फार्मेसी अधिकारी मरीज को देंगे। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के महामंत्री डॉ रविंद्र सिंह राना ने भारत सरकार एवं फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया का आभार व्यक्त किया है।उत्तर प्रदेश सरकार से भी अनुरोध करूंगा कि प्रदेश में भी जल्द लागू किया जाय। अध्यक्ष डॉ मुकेश शर्मा , मंडल अध्यक्ष डॉ राजीव उपाध्याय, मंडलीय सचिव डॉ रामनरेश परमार, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ मुनेन्द्र चाहर , डॉ राजकुमार शर्मा ,वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ राजेश बघेल, उपाध्यक्ष डॉ जितेन्द्र कुमार, संगठन मंत्री डॉ योगेश त्यागी, कोषाध्यक्ष डॉ प्रवीण मिश्रा, डॉ योगेश चौधरी, डॉ एन के पाल, डॉ योगेन्द्र शर्मा, आदि ने हर्ष व्यक्त किया है।